उत्तराखंड में बारिश से बढ़ा फ्लैश फ्लड का खतरा, देहरादून समेत 11 जिलों में अलर्ट; सावधानी बरतने की सलाह
Uttarakhand Weather: देहरादून, उत्तरकाशी, पौड़ी गढ़वाल, टिहरी गढ़वाल, चमोली, अल्मोड़ा, नैनीताल, बागेश्वर, पिथौरागढ़, चंपावत और रुद्रप्रयाग जिलों में फ्लैश फ्लड का कम से मध्यम जोखिम बना रह सकता है.

उत्तराखंड में लगातार बारिश के बीच फ्लैश फ्लड का खतरा बढ़ गया है. भारत मौसम विज्ञान विभाग के नेशनल फ्लैश फ्लड गाइडेंस बुलेटिन में राज्य के कई जलग्रहण क्षेत्रों और उनके आसपास के इलाकों में अगले 24 घंटे के दौरान कम से मध्यम स्तर के फ्लैश फ्लड जोखिम की संभावना जताई गई है.
आईएमडी की ओर से 21 जुलाई की सुबह जारी बुलेटिन में हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख के साथ उत्तराखंड के कुछ जलग्रहण क्षेत्रों को भी ‘एरिया ऑफ कंसर्न’ में रखा गया है. मौसम मॉडल ने अगले 24 घंटे में कुछ क्षेत्रों में 130 मिलीमीटर तक बहुत भारी बारिश का पूर्वानुमान दिया है.
इन 11 जिलों में अगले 24 घंटे खतरा
आईएमडी के अनुसार, 22 जुलाई सुबह 5:30 बजे तक उत्तराखंड के देहरादून, उत्तरकाशी, पौड़ी गढ़वाल, टिहरी गढ़वाल, चमोली, अल्मोड़ा, नैनीताल, बागेश्वर, पिथौरागढ़, चंपावत और रुद्रप्रयाग जिलों के कुछ जलग्रहण क्षेत्रों और आसपास के इलाकों में फ्लैश फ्लड का कम से मध्यम जोखिम बना रह सकता है.
बुलेटिन में कहा गया है कि लगातार या तेज बारिश के कारण पूरी तरह संतृप्त मिट्टी वाले क्षेत्रों तथा निचले इलाकों में सरफेस रनऑफ और जलभराव हो सकता है. पहाड़ी क्षेत्रों में अचानक पानी का बहाव बढ़ने से छोटे नाले और बरसाती धाराएं उफान पर आ सकती हैं.
देहरादून, उत्तरकाशी और टिहरी में तत्काल खतरा
21 जुलाई सुबह 5:30 बजे तक के आंकड़ों में देहरादून, उत्तरकाशी, टिहरी गढ़वाल, पिथौरागढ़ और चंपावत के कुछ जलग्रहण क्षेत्रों में बीते छह घंटों के दौरान कम से मध्यम फ्लैश फ्लड खतरा दर्ज किया गया. इसके बाद सुबह 11:30 बजे तक देहरादून, उत्तरकाशी और टिहरी गढ़वाल के कुछ जलग्रहण क्षेत्रों में यह खतरा बने रहने की संभावना जताई गई. इन क्षेत्रों में बारिश के कारण संतृप्त जमीन और निचले इलाकों में पानी भरने की आशंका है.
पिछले 24 घंटे में 100 मिमी तक बारिश
बुलेटिन के मुताबिक कुछ प्रभावित जलग्रहण क्षेत्रों में बीते छह घंटों में 40 मिलीमीटर और पिछले 24 घंटों में 100 मिलीमीटर तक बारिश दर्ज की गई. देश के कई हिस्सों में मिट्टी की नमी और संतृप्ति का स्तर बढ़ा हुआ है, जिससे नई बारिश का अधिकांश पानी जमीन में समाने के बजाय तेजी से बह सकता है. ऐसी स्थिति में पहाड़ी ढलानों, छोटे नालों, बरसाती गदेरों और निचले इलाकों में अचानक जलप्रवाह बढ़ने का खतरा रहता है.
क्या होता है फ्लैश फ्लड जोखिम?
फ्लैश फ्लड सामान्य बाढ़ की तुलना में बहुत तेजी से विकसित होता है. कम समय में तेज बारिश होने, मिट्टी के पूरी तरह संतृप्त होने या छोटे नदी-नालों में अचानक पानी बढ़ने से स्थानीय स्तर पर बाढ़ जैसी स्थिति बन सकती है. आईएमडी ने स्पष्ट किया है कि यह फ्लैश फ्लड गाइडेंस बुलेटिन है, औपचारिक चेतावनी नहीं. इसका इस्तेमाल प्रशासन और संबंधित एजेंसियों को संवेदनशील जलग्रहण क्षेत्रों में संभावित खतरे का आकलन करने में मदद देने के लिए किया जाता है.
लोगों को बरतनी होगी सावधानी
संवेदनशील क्षेत्रों के लोगों को नदी-नालों, बरसाती धाराओं और निचले इलाकों से दूरी बनाए रखनी चाहिए. तेज बारिश के दौरान पानी से भरी सड़क, पुलिया या रपटे को पार करने का प्रयास नहीं करना चाहिए. पहाड़ी मार्गों पर यात्रा करने वाले लोगों को मौसम और प्रशासन की ताजा जानकारी लेने के बाद ही निकलना चाहिए.
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