उत्तराखंड चुनाव से पहले धामी सरकार की नई रणनीति, कांग्रेस ने उठाए सवाल
विधानसभा चुनावों से पहले उत्तराखंड में अलग-अलग जिलों में कैबिनेट बैठकों लेकर विपक्षी कांग्रेस ने सवाल खड़े कर दिए हैं. जबकि से चुनावी रणनीति से जोड़ा जा रहा है.

उत्तराखंड में चुनाव से पहले नई रणनीति के तहत सरकार अलग-अलग जिलों में कैबिनेट बैठक आयोजित कर रही है. हालांकि सरकार की कवायद पर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस इस पहल पर सरकार को घेरने की कोशिश में जुटी हुई है. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने सवाल उठाते हुए कहा है कि सरकार को यह साफ करना चाहिए कि इन बैठकों का मकसद क्या है और क्या इनसे संबंधित जिलों की समस्याएं वाकई सुलझ भी रही हैं ?
गोदियाल के अनुसार, अगर सरकार को जिलों में जाकर बैठक करनी ही थी तो पांच साल के कार्यकाल में कई बारे बैठकें की जा सकती थीं. आरोप लगाते हुए गोदियाल ने यह भी कहा है कि चुनाव करीब आते ही सरकार को जिलों की याद आने लगी है और अब जाकर यह कवायद शुरू की गई. कांग्रेस का तर्क है कि जब सरकार के फैसले सचिवालय में हो ही रहे हैं तो जिलों में बैठकें आयोजित करना चुनावी संदेश देने से ज्यादा कुछ नहीं है.
यह भी पढ़ें: CM योगी के शहर में डुप्लीकेट वोट..., अखिलेश के दावे से मची हलचल
पहली जिलेवार बैठक बनबसा में
धामी सरकार द्वारा इस तरह की सबसे पहली रणनीति चंपावत जिले के बनबसा क्षेत्र में अक्टूबर 2026 को अपनायी गई. पिछले हफ्ते रविवार को हुई इस बैठक में कैबिनेट ने 24 प्रस्तावों पर मोहर लगायी थी. ख़ास बात यह भी है कि चम्पावत मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का विधानसभा क्षेत्र भी है. वहीं दूसरी बैठक आज यानी 12 अक्टूबर सोमवार को हरिद्वार जिले में आयोजित की गई.
बनबसा में हुई बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने ने एक्स पर यह भी पोस्ट किया था कि कैबिनेट बैठकें केवल देहरादून तक सीमित नहीं रहेंगी बल्कि अलग-अलग जिलों में होंगी ताकि स्थानीय समस्याओं और प्राथमिकताओं को करीब से समझा जा सके. वहीं बनबसा में आयोजित यह कैबिनेट बैठक केवल कैबिनेट के द्वारा लिए गए निर्णयों से सीमित नहीं रही बल्कि मुख्यमंत्री द्वारा बैठक के बाद चंपावत के लिए चार घोषणाएं भी की गई.
क्या सभी जिलों में आयोजित होंगी बैठक ?
यह बैठकें उत्तराखंड के सभी जिलों में आयोजित होंगी, ऐसे कयास तो लगाए ही जा रहे हैं. हालांकि इस बारे में किसी प्रकार की कोई औपचारिक पुष्टि या घोषणा नहीं की गई है. यह निर्णय पूरी तरह से मुख्यमंत्री का है कि अगली बैठक कब और किस जिले में आयोजित होगी. इससे एक बात तो साफ़ है कि यह बैठकें चुनावी एजेंडे के तहत आयोजित की जा रही हैं.
पहली बैठक मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र में की गई जो संकेत देता है कि इस क्षेत्र में मुख्यमंत्री अपनी पकड़ मज़बूत रखते हुए चुनाव में बंपर वोटों से एक बार फिर जीतना चाहते हैं. वहीं दूसरी बैठक हरिद्वार जिले में जहां 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की पकड़ थोड़ी कमज़ोर रही. पूरे जिले में कुल मिलाकर 11 विधानसभा सीटें हैं जिस में 6 सीटों पर कांग्रेस , 3 पर भाजपा , 1 पर बसपा जबकि एक सीट पर निर्दलीय विधायक है. जाहिर है कि हरिद्वार जिले में बैठक आयोजित कर सरकार इन कमज़ोर सीटों पर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहेगी.
क्या है रणनीति ?
इस तरह जिलेवार बैठकों का मुख्य मकसद स्थानीय समस्याओं को प्राथमिकता से सुलझाने को लेकर भी है, जिसे आगामी चुनाव में उपलब्धियों के तौर पर क्षेत्र की जानता के बीच रखा जा सकता है. हालांकि सरकार का यह प्रयास धरातल पर क्या असर दिखाता है और अगली बैठक कब और कहाँ होती है इस पर सबकी नजर बनी हुई है.
यह भी पढ़ें: 'ठोस सबूत हैं तो...', ज्ञानेश कुमार के बचाव में उतरे बृजभूषण सिंह






















