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यूपी पुलिस में जाति आधारित तैनातियों के दावे पर अखिलेश यादव के दावे में कितना दम? चौंका रहे हैं ये आंकड़े

यूपी पुलिस में तैनातियों का मुद्दा इन दिनों जमकर चर्चा में है. Samajwadi Party के मुखिया अखिलेश यादव के दावे पर DGP के बयान के बाद भी सियासी हलचल कम नहीं हुई है.

UP Police News: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बीते दिनों यह दावा किया कि राज्य की पुलिस सेवा में जातियों के आधार पर तैनातियां मिल रहीं हैं. उनके इस दावे पर सरकार की ओर से तो कुछ नहीं कहा गया लेकिन राज्य पुलिस के महानिदेशक प्रशांत कुमार ने कहा कि यह आंकड़े गलत हैं और उन्हें (अखिलेश यादव) ऐसी टिप्पणी नहीं करनी चाहिए. प्रशांत कुमार के इस बयान पर भी अखिलेश की प्रतिक्रिया आई. उन्होंने कहा था कि सरकार खुद कुछ नहीं कह रही बल्कि अधिकारी को आगे कर रही है. 

अब आइए हम आपको बताते हैं कि कन्नौज सांसद अखिलेश के दावों में कितना दम है? इतना ही नहीं हम आपको यह भी बताएंगे कि वर्ष 2012 से 2017 के दौरान यूपी पुलिस में तैनातियों की क्या स्थिति थी, जब भारतीय जनता पार्टी की ओर से यह आरोप लगाए जाते थे कि पुलिस में 'यादववाद' चल रहा है. 

उत्तर प्रदेश पुलिस में कुल 301,289 कर्मी हैं. इसमें से आरक्षित वर्ग आने वाले पुलिसकर्मियों की संख्या-1,95,272 है. मौजूदा संख्या के आधार पर आरक्षण देखें तो कुल कर्मियों के 65% पद आरक्षित हैं. वहीं स्वीकृत आरक्षण 50% है.

पदवार तैनाती की बात करें तो राज्य में एएसपी/डिप्टी एसपी/सहायक कमांडेंट में एससी वर्ग से 182, एसटी वर्ग से 14 और ओबीसी वर्ग के 234 कर्मी तैनात हैं. वहीं इंस्पेक्टर/आरआई पद पर एससी से 717, एसटी 21 और ओबीसी वर्ग से 1,433 तैनातियां हैं. एसआई/आरएसआई पद पर एससी से 4,337, एसटी से 113, ओबीसी वर्ग से 10,508 तैनातियां हैं.

एएसआई/एआरएसआई पद पर 115 एससी, 8 एसटी, 223 कर्मी ओबीसी वर्ग में नियुक्त हैं. हेड कांस्टेबल पद पर एससी से 11,635, एसटी 538 और ओबीसी वर्ग से 26,417 कर्मी तैनात हैं. कॉन्सटेबल पद 44,311 एससी, 3,687 एसटी और 90 हजार 739 कर्मी ओबीसी वर्ग से तैनात हैं. 

इस तरह एएसपी/डिप्टी एसपी/सहायक कमांडेंट पद पर कुल 430, इंस्पेक्टर/ आरआई पद पर 2171, एसआई/आरएसई पद पर 14 हजार 958, एएसआई/ एआरएसआई पद पर 386, हेड कॉन्सटेबल पद पर 38 हजार 590 और कॉन्सटेबल पद पर 1 लाख 38 हजार 737 तैनातियां आरक्षित वर्ग से हैं.

इन सभी को जोड़ें तो पुलिस में एससी वर्ग से 61 हजार 337, एसटी 4 हजार 381 और ओबीसी वर्ग से 1 लाख 29 हजार 554 पुलिसकर्मी तैनात हैं. इनकी कुल संख्या 1 लाख 95 हजार 272 है. बता दें यूपी पुलिस नियुक्तियों में एससी के लिए 21, एसटी 2 और ओबीसी वर्ग के लिए 27 फीसदी आरक्षण है. वहीं मौजूदा संख्या पर नजर डालें तो एससी वर्ग में 20.36 फीसदी, एसटी वर्ग में 1.50 फीसदी और ओबीसी वर्ग में 43 फीसदी तैनातियां हैं. जो कुल फोर्स का 65 फीसदी है.

मौजूदा आंकड़े इस ओर संकेत करते हैं कि यूपी पुलिस में आरक्षण को मंजूरी 50 फीसदी है लेकिन फोर्स में तैनातियां आरक्षण की सीमा से आगे हैं. उपरोक्त डाटा पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो द्वारा साल 2023 तक के आधार पर हैं.

अखिलेश ने क्या कहा था?
अखिलेश यादव का आरोप है कि आगरा, मैनपुरी और चित्रकूट जिलों के अधिकांश थानों में क्षत्रिय (ठाकुर) थानेदार तैनात हैं. समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद रामजी लाल सुमन से मिलने के लिए शनिवार (19 अप्रैल, 2025) को आगरा दौरे के दौरान अखिलेश यादव ने आरोप लगाया था कि आगरा के विभिन्न थानों में कुल 48 थानेदार तैनात हैं, जिनमें से 15 पीडीए और बाकी ‘सिंह भाई लोग’ (क्षत्रिय) हैं.

अखिलेश मैनपुरी- कुल 15 थानेदारों में से तीन पीडीए और 10 ‘सिंह भाई लोग’ हैं. चित्रकूट- कुल 10 थानेदारों में से दो पीडीए और पांच ‘सिंह भाई लोग’ हैं. महोबा- 11 (थाना प्रभारियों) में से तीन पीडीए और छह ‘सिंह भाई लोग’ हैं.

सोशल मीडिया साइट एक्स पर अखिलेश यादव ने 21 अप्रैल, 2025 को लिखा था- '90% पीडीए का प्रयागराज पुलिस में सिर्फ़ 25% प्रतिनिधित्व है. यह पीडीए के साथ किया जा रहा ‘आनुपातिक अन्याय’ है.' उन्होंने एक चार्ट भी पोस्ट किया जिसमें दावा किया गया था कि प्रयागराज के कुल 44 पुलिस थानों में से 11 एसएचओ पीडीए समुदाय से हैं, 11 क्षत्रिय और 19 अन्य सामान्य जातियों से हैं.

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अखिलेश के आरोपों पर किसने क्या कहा?
उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक प्रशांत कुमार ने कन्नौज सांसद के आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि एसएचओ की नियुक्तियां सरकारी आदेश के अनुसार की जा रही हैं. सोशल मीडिया पर कुछ खबरें हैं, जिसमें एसएचओ की संख्या गलत बताई गई. यह पूरी तरह गलत है. संबंधित जिलों की ओर से स्पष्टीकरण दिया जा चुका है और कोई भी जिम्मेदार व्यक्ति गलत आंकड़े न दे. उन्हें (सपा चीफ अखिलेश यादव) भ्रामक तथ्य देने से बचना चाहिए. सभी को सूचित किया गया है कि वे सोशल मीडिया पर भ्रामक तथ्यों का जवाब सही आंकड़ों के साथ दें. मैं राजनीतिक बयानों पर टिप्पणी नहीं करना चाहता. 

इसके अलावा अखिलेश के आरोप के जवाब में आगरा पुलिस कमिश्नरेट ने 20 अप्रैल, 2025 को कहा था कि आगरा जिले में कुछ साइट्स और लोग एसएचओ की नियुक्ति के बारे में भ्रामक तथ्य प्रस्तुत कर रहे हैं. आगरा कमिश्नरेट में 39% ओबीसी, 19% एससी और 42% सामान्य के थाना प्रभारी नियुक्त हैं, जबकि सरकारी आदेश के अनुसार 27% ओबीसी संवर्ग के नियुक्त होने चाहिए. मैनपुरी पुलिस ने एसएचओ का जातिवार आंकड़ा दिया. मैनपुरी पुलिस के अनुसार 50% एसएचओ सामान्य वर्ग से थे, जबकि 31% ओबीसी और 19% अनुसूचित जाति के एसएचओ तैनात हैं.

वहीं चित्रकूट पुलिस ने कहा कि जिले में सात एसएचओ सामान्य वर्ग से हैं, जबकि तीन ओबीसी और दो एससी वर्ग से हैं.

अब बात करते हैं अखिलेश यादव के सरकार की. उस वक्त भी आरोप लगाए गए थे कि थानों में 'यादववाद फलफूल'रहा है.

अखिलेश यादव की सरकार में खासकर साल 2014 में करीब 60% थानों की कमान यादव अधिकारियों के पास थी. यह दावा एक मीडिया रिपोर्ट में किया गया था. अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट में गृह विभाग के सूत्रों के हवाले से दावा किया गया था कि वर्ष 2014 में जब धर्मेंद्र यादव, बदायूं से लोकसभा सांसद थे, तब करीब 60% थानों की कमान यादव अधिकारियों के हाथ में थी.

वर्ष 2014 में प्रकाशित अखबार की रिपोर्ट के अनुसार 22 में से 16 थानों की कमान यादव अधिकारियों के हाथ में थी. कानपुर में 36 में से 25 थानों की कमान यादवों के हाथ में थी.

रिपोर्ट में दावा किया गया था कि लखनऊ में 50% से ज़्यादा थानेदार यादव थे. कन्नौज में वर्ष 2014 में जब डिंपल यादव सांसद थीं तब नौ थानों में से पांच यादव थानेदार थे. वहीं फर्रुखाबाद में 14 थानों में सात यादव एसओ थे. इटावा 20 थानों में नौ यादव एसओ थे.

दूसरे कैडर्स से लाए गए अधिकारी
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया था कि अखिलेश के सीएम बनने के बाद उन्होंने दूसरे कैडर से यशस्वी यादव और प्रदीप यादव सरीखे अधिकारियों को वापस बुलाया. महाराष्ट्र कैडर के यशस्वी यादव एसपी कानपुर बने. वहीं प्रदीप यादव को पंजाब से लाया गया था. (रिसर्च- तीर्थेश नंदन)

राहुल सांकृत्यायन, बतौर डिप्टी न्यूज़ एडिटर, abp लाइव में कार्यरत हैं. राजनीति और समकालीन विषयों में रुचि है. इससे पहले राहुल, न्यूज़ 18 हिन्दी, वन इंडिया हिन्दी और अमर उजाला में विभिन्न पदों पर सेवाएं दे चुके हैं. देश के प्रतिष्ठित संस्थान भारतीय जनसंचार संस्थान IIMC से हिन्दी पत्रकारिता की पढ़ाई कर चुके राहुल ने इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के अनुषांगिक महाविद्यालय- ईश्वर शरण डिग्री कॉलेज से बी.कॉम किया है. केंद्रीय विद्यालय बस्ती से हाईस्कूल और सरस्वती विद्या मंदिर रामबाग बस्ती से इंटरमीडिएट करने वाले राहुल ने गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से दूरस्थ शिक्षा कार्यक्रम के तहत पत्रकारिता में परास्नातक भी किया है.

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