UP के इन जिलों की 50 से अधिक सीटों पर BJP की नजर, 3 चुनावों में भी नहीं भेद पाई विपक्ष का किला
UP Vidhan Sabha Chunav 2027: उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने कमर कस ली है. बीजेपी की नजर उन सीटों पर है जहां वह विपक्ष का किला नहीं भेद पाई है.

उत्तर प्रदेश सरकार कैबिनेट में फेरबदल और विस्तार के बाद अगले साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने रणनीति पर काम तेज कर दिया है. इन सबके बीच पार्टी की निगाह उन सीटों पर जिसमें वह साल 2012, 2017 और 2022 के चुनाव में हारी है.
इन सीटों में सबसे ज्यादा सीटें पूर्वांचल क्षेत्र की हैं. इनमें आजमगढ़, मऊ, जौनपुर, गाजीपुर और मिर्जापुर जैसे जिले शामिल हैं. वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश की करीब 13 सीटें सहारनपुर, मुरादाबाद और बिजनौर क्षेत्र में आती हैं. 2022 के विधानसभा चुनाव में इन दोनों क्षेत्रों की 35 सीटों में से 27 पर समाजवादी पार्टी ने जीत हासिल की थी.
हालांकि बाद में हुए उपचुनावों में BJP ने स्वार, रामपुर और कुंदरकी जैसी सीटों पर जीत दर्ज कर अपनी स्थिति मजबूत की. बाकी सीटों में समाजवादी पार्टी की सहयोगी सुहेल देव भारतीय समाज पार्टी को तीन सीटें मिली थीं, जबकि BJP की सहयोगी अपना दल और निषाद पार्टी के खाते में दो-दो सीटें गई थीं. एक सीट बहुजन समाज पार्टी के पास रही.
2012, 2017 और 2022 के चुनाव में बीजेपी या उसके अलायंस का कोई साथी जिन सीटों पर जीत हासिल नहीं कर सका उसमें सहारनपुर जिले में बेहट, नकुड़, देवबंद और गंगोह सीटें लगातार बीजेपी गठबंधन से दूर रहीं. शामली में कैराना और थानाभवन सीट बीजेपी नहीं जीत सकी. मुजफ्फरनगर में बुढ़ाना, मीरापुर और पुरकाजी सीटें तीनों चुनाव में बीजेपी गठबंधन के खाते में नहीं आईं.
इन सीटों पर नहीं जीत पाई है बीजेपी
इसके साथ ही मेरठ जिले में सिवालखास, किठौर और हस्तिनापुर सीटें बीजेपी गठबंधन नहीं जीत सका. बिजनौर में नगीना, धामपुर और चांदपुर सीटें लगातार विपक्ष के पास रहीं. अमरोहा में नौगावां सादात और धनौरा सीटें भी बीजेपी गठबंधन से दूर रहीं. हाथरस की सादाबाद सीट भी इसी लिस्ट शामिल है.
वहीं मुरादाबाद मंडल में ठाकुरद्वारा, कांठ, कुंदरकी और बिलारी सीटें बीजेपी गठबंधन नहीं जीत पाया. संभल जिले की संभल सीट भी लगातार विपक्ष के पास रही. रामपुर में स्वार, चमरौआ और बिलासपुर सीटें बीजेपी नहीं जीत सकी.
उधर, बरेली जिले में शेरगढ़ और फरीदपुर, फर्रुखाबाद में कायमगंज और अमृतपुर सीटें भी बीजेपी गठबंधन के लिए कठिन रहीं. कन्नौज जिले में तिर्वा और छिबरामऊ, इटावा में जसवंतनगर, औरैया में दिबियापुर तथा मैनपुरी में करहल सीट बीजेपी नहीं जीत सकी.
प्रयागराज और अयोध्या की यह सीटें भी पहुंच से दूर
अयोध्या मंडल में गोसाईंगंज सीट लगातार बीजेपी गठबंधन से बाहर रही. प्रयागराज जिले में प्रतापपुर और हंडिया सीटें भी बीजेपी गठबंधन के खाते में नहीं आईं.
पूर्वांचल में जौनपुर की केराकत और मड़ियाहूं, भदोही की ज्ञानपुर और औराई, मऊ की मोहम्मदाबाद गोहना, बलिया की रसड़ा और सिकंदरपुर, देवरिया की भाटपार रानी तथा कुशीनगर की तमकुहीराज सीटें भी लगातार बीजेपी गठबंधन से दूर रहीं.
आजमगढ़ मंडल में गोपालपुर, सगड़ी, मुबारकपुर और मेहनगर सीटें बीजेपी नहीं जीत सकी. अंबेडकरनगर में आलापुर, जलालपुर और अकबरपुर सीटें भी बीजेपी गठबंधन के खाते में नहीं आईं. संतकबीरनगर की खलीलाबाद और मेंहदावल सीटें इसमें शामिल हैं.

























