'कोई अगर किसी का नाम वोटर लिस्ट से कटवाने का अपराध करेगा तो...', SIR को लेकर अखिलेश यादव ने किसे चेताया?
Akhilesh Yadav Statement: वोटर के नाम काटे जाने के मामले पर अखिलेश यादव ने बीजेपी पर निशाना साधा है, साथ ही कार्यकर्ताओं को कई आवश्यक निर्देश दिए हैं.

समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष व उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने आक्रामक रुख अपनाते हुए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर बड़ा हमला बोला है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्वीटर) पर एक वीडियो शेयर करते हुए पार्टी कार्यकर्ताओं को भी अहम निर्देश दिए हैं.
एसपी चीफ अखिलेश यादव ने एक्स पर लिखा, "SIR में फार्म 7 के माध्यम से जो भी कोई, किसी और का नाम वोटर लिस्ट से कटवाने का गैर कानूनी अपराध करेगा, उसके खिलाफ FIR लिखवाई जाए. ये लोगों की पहचान, जाति, सब्सिडी, काम, दुकान, कारोबार, नौकरी, संविदा, खेत, जमीन हड़पने का षड्यंत्र भी हो सकता है."
'नहीं बचने चाहिये वोटर के नाम काटने वाले गुनहगार'
अखिलेश यादव ने आगे कहा कि, "इसलिए हर मतदाता चौकन्ना होकर अपने वोट की जांच-पड़ताल करें. समस्त पीडीए प्रहरी जुट जाएं और FIR लिखवाएं या कानूनी मदद के लिए पार्टी कार्यालय से संपर्क करें. वोटरों के नाम काटने में शामिल कोई भी गुनहगार बचना नहीं चाहिए, चाहे वो सत्ताधारी दल का बूथ स्तर का कार्यकर्ता हो, पदाधिकारी, पार्षद, विधायक, सांसद, मंत्री या फिर कोई भी अधिकारी."
अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि "भाजपा और उनके संगी-साथियों का भंडाफोड़ करने में जुट जाएं और ‘पीडीए प्रहरी’ का कर्तव्य और भी मुस्तैदी से निभाएं."
अखिलेश यादव ने केंद्रीय बजट को भाजपाई बजट दिया करार
केंद्रीय बजट पर सपा चीफ अखिलेश यादव ने प्रतिक्रिया दी है, उन्होंने केंद्रीय बजट को 'भाजपाई बजट' करार दिया है. अखिलेश यादव ने एक्स पर लिखा, "हमने तो पहले ही कहा था सवाल ये नहीं है कि शेयर बाजार रविवार को खुलेगा, सवाल ये है कि और कितना गिरेगा."
'बजट में आम जनता का जिक्र, न फिक्र'
अखिलेश यादव ने आगे कहा कि, "जब भाजपा सरकार से कोई उम्मीद नहीं है, तो उसके बजट से क्या होगी. हम तो भाजपा के हर बजट को 1/20 (एक बँटे बीस) का बजट मानते हैं, क्योंकि वो 5% लोगों के लिए होता है. भाजपा का बजट, अपने कमीशन और अपने लोगों को सेट करने का बजट होता है. भाजपा का बजट, भाजपाई भ्रष्टाचार की अदृश्य खाता-बही होता है. इस बजट में न आम जनता का ज़िक्र है न फिक्र."
उन्होंने कहा कि "महंगाई बेतहाशा बढ़ने पर भी इस बजट में जनता को टैक्स में छूट न देना, ‘टैक्स-शोषण’ है. अमीरों के काम-कारोबार और घूमने-फिरने पर दस तरह की छूटें दी गईं हैं लेकिन बेकारी-बेरोज़गारी से जूझ रहे लोगों की उम्मीदों की थाली, खाली है."























