Mahoba News: महोबा में ताला सैयद की दरगाह क्षतिग्रस्त, कजली मेले की उपेक्षा पर नाराज लोग
Mahoba News: यूपी के महोबा में आल्हा-ऊदल के गुरु ताला सैयद की मजार क्षतिग्रस्त हो गई है. कजली मेले में उपेक्षा पर जनता नाराज है. बता दें लाखों रुपए से होने जा रहा कजली मेला.

बुंदेलखंड की वीर गाथाओं में महोबा के आल्हा-ऊदल का नाम बड़े सम्मान से लिया जाता है, लेकिन उनके पराक्रम के मार्गदर्शक गुरु ताला सैयद को आज उपेक्षा का शिकार होना पड़ रहा है. ताला सैयद की ऐतिहासिक मजार, जो महोबा की पहाड़ी पर स्थित है, बारिश और प्रशासनिक अनदेखी के कारण क्षतिग्रस्त हो चुकी है.
आगामी 10 अगस्त से शुरू हो रहे 15 दिवसीय कजली मेला महोत्सव की तैयारियां जोरों पर हैं, जिसमें आल्हा-ऊदल की वीरता को याद किया जाएगा. लेकिन जिस गुरु ने उन्हें तलवारबाजी, युद्ध नीति और नीति-धर्म का पाठ पढ़ाया, उसकी मजार की उपेक्षा समाज को खल रही है.
युद्ध कला में निपुण थे ताला सैयद
इतिहासकारों के अनुसार ताला सैयद केवल युद्ध कला में निपुण नहीं थे, बल्कि वे धर्मनिष्ठ, न्यायप्रिय और मानवता के प्रतीक थे. उन्होंने आल्हा-ऊदल को केवल योद्धा नहीं, बल्कि लोकहितकारी वीर बनने की शिक्षा दी.
लोककथाओं में ताला सैयद को हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक माना गया है, लेकिन आज उनकी मजार प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार है.महोबा संरक्षण एवं विकास समिति और नगर पालिका परिषद द्वारा आयोजित इस मेले के आमंत्रण कार्ड में भी ताला सैयद का न तो कोई जिक्र है और न ही उनकी मजार की तस्वीर. इससे हर वर्ग के लोग, इतिहासकार और समाजसेवी नाराज हैं.
मजार के खादिम ने क्या कहा?
मजार की देखभाल कर रहे खादिम बाबा फरीद का कहना है कि उन्होंने 2023 में ही पुरातत्व विभाग और प्रशासन को मजार की स्थिति से अवगत कराया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. अब जब मेला शुरू होने वाला है और हजारों श्रद्धालु आने वाले हैं, तो क्षतिग्रस्त मजार किसी भी हादसे का कारण बन सकती है.
इतिहासकार रामू दद्दा बताते हैं कि ताला सैयद वही शख्स हैं जिन्होंने आल्हा-ऊदल को इतना सक्षम बनाया कि उन्होंने पृथ्वीराज चौहान जैसे सम्राट को भी युद्ध में पराजित किया. जनता और इतिहास प्रेमियों की मांग है कि जिस तरह आल्हा-ऊदल को सम्मान दिया जा रहा है, उसी तरह उनके गुरु ताला सैयद की मजार का जीर्णोद्धार कर उन्हें भी उचित सम्मान दिया जाए.
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