अम्बेडकरनगर: सपा बागी विधायक के फलाहार में जुटे भारी समर्थक, दिखाई सियासी ताकत
उत्तर प्रदेश के जलालपुर विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के बागी विधायक राकेश पाण्डेय ने दो वर्षों तक सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूरी बनाने के बाद शारदीय नवरात्र उनके आवास पर समर्थकों का हुजूम जुटा.

उत्तर प्रदेश के अम्बेडकरनगर की जलालपुर विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के बागी विधायक राकेश पाण्डेय के अकबरपुर स्थित आवास पर समर्थकों का भारी हुजूम जुटा. करीब दो वर्षों तक अस्वस्थता के चलते सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूर रहे विधायक ने शारदीय नवरात्र के अवसर पर फलाहार कार्यक्रम का आयोजन किया.
इस कार्यक्रम में जिले के अलग-अलग क्षेत्रों से प्रधान, बीडीसी सदस्य, स्थानीय नेता और कार्यकर्ता पहुंचे. इन लोगों की मौजूदगी ने यह साफ कर दिया कि सियासी गलियारों में भले ही दूरियां बढ़ी हों, लेकिन जमीनी पकड़ अब भी मजबूत है.
निमंत्रण पत्र के भावुक संदेश ने छूआ लोगों का दिल
कार्यक्रम के लिए बांटे गए निमंत्रण पत्र पर लिखे एक भावुक संदेश ने भी लोगों का ध्यान खींचा. निमंत्रण पत्र में लिखा था, 'लगभग दो वर्षों की अस्वस्थता के बाद आप सबसे फिर मिलना ही इस नवरात्र का मेरा सबसे बड़ा प्रसाद होगा.' इस संदेश के जरिए विधायक ने अपने समर्थकों से भावनात्मक जुड़ाव बनाने की कोशिश की. बीमारी के बाद पहली बार समर्थकों से रूबरू हुए राकेश पाण्डेय से मिलने के लिए लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला.
हालांकि, इस फलाहार कार्यक्रम को केवल धार्मिक आयोजन या सामाजिक मेल-मिलाप तक सीमित नहीं माना जा रहा है. इसके पीछे जिले की राजनीति से जुड़े कई सियासी मायने भी निकाले जा रहे हैं. राकेश पाण्डेय उन सात बागी विधायकों में शामिल रहे हैं, जिन्होंने राज्यसभा चुनाव के दौरान समाजवादी पार्टी के रुख से अलग जाकर बीजेपी उम्मीदवार के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की थी. इस घटनाक्रम के बाद से ही उनके राजनीतिक रुख को लेकर चर्चाएं होती रही हैं.
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आगामी विधानसभा चुनाव क्या होगी परिवार की भूमिका?
वहीं, राकेश पाण्डेय के बेटे और पूर्व सांसद रितेश पाण्डेय भी परिवार की सियासी गतिविधियों को लेकर चर्चा में रहे हैं. रितेश पाण्डेय ने 2024 का लोकसभा चुनाव भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर लड़ा था. ऐसे में आगामी विधानसभा चुनाव और अम्बेडकरनगर की राजनीति में पाण्डेय परिवार की भूमिका क्या होगी, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं.
फलाहार कार्यक्रम में समर्थकों की मौजूदगी को इसी राजनीतिक संदर्भ में देखा जा रहा है. हालांकि, इसे किसी आगामी सियासी रणनीति का औपचारिक ऐलान नहीं कहा जा सकता, लेकिन इस आयोजन ने जिले में पाण्डेय परिवार की राजनीतिक सक्रियता को लेकर चर्चाएं जरूर तेज कर दी हैं.





















