वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर विवाद में हाईकोर्ट की सुनवाई, नए एक्ट को दी जाएगी चुनौती
Prayagraj News: यूपी के मथुरा स्थित वृंदावन में बांके बिहारी मंदिर को लेकर मामले में कोर्ट में आज सुनवाई हुई है. जिसमें अब नए एक्ट को चुनौती देने के लिए जल्द ही संशोधन अर्जी दाखिल की जाएगी.

इलाहाबाद हाईकोर्ट में बुधवार को वृंदावन स्थित श्री बांकेबिहारी मंदिर मामले पर अहम सुनवाई हुई. अदालत को बताया गया कि प्रदेश सरकार द्वारा पारित नए एक्ट को चुनौती देने के लिए जल्द ही संशोधन अर्जी दाखिल की जाएगी.
इससे पहले मई 2025 में जारी अध्यादेश को श्री बांकेबिहारी जी और दो अन्य याचियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. सरकार की ओर से अदालत को जानकारी दी गई कि अब विधानसभा में एक्ट पारित हो चुका है और केवल राज्यपाल की स्वीकृति शेष है. ऐसे में अध्यादेश का अस्तित्व स्वतः समाप्त हो जाएगा.
सुप्रीम कोर्ट से मिली अनुमति
हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ को बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट ने यह छूट दी है कि अध्यादेश या एक्ट को चुनौती देने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की जा सकती है.
इसी आधार पर एक और याचिका दाखिल की गई है. याची पक्ष के वकीलों ने कहा कि जैसे ही एक्ट की प्रमाणित प्रति उन्हें मिलेगी, वे संशोधन अर्जी दायर कर इसे चुनौती देंगे. बता दें इस मामले में मंदिर का रख-रखाव सेवायतों द्वारा किया जाता है. जिसमें आरोप है कि सरकार अब मंदिर को निजी हाथों में रखना चाहती है.
याचिकाकर्ताओं ने क्या कहा?
याचियों की ओर से पेश अधिवक्ता लोकेश भारद्वाज ने अदालत को बताया कि बांकेबिहारी मंदिर उनके सेवायतों की निजी संपत्ति है. उन्होंने कहा कि सिविल कोर्ट का फैसला भी सेवायतों के पक्ष में है और सरकार द्वारा लाया गया एक्ट उनकी धार्मिक और निजी स्वतंत्रता का उल्लंघन है.
याचिाकाकर्ता का कहना है कि सरकार मंदिर पर नियंत्रण स्थापित करना चाहती है. याचीगण का कहना है कि सरकार का उद्देश्य मंदिर पर नियंत्रण स्थापित करना है. जबकि परंपरागत रूप से इस मंदिर का संचालन सेवायतों द्वारा किया जाता रहा है. उनका आरोप है कि सरकार की नियत मंदिर की स्वायत्तता को खत्म करने की है, इसलिए वे एक्ट को संवैधानिक आधार पर चुनौती देंगे.
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