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पाकिस्तान से आईं सीमा हैदर का बनेगा वोटर आईडी कार्ड... SIR प्रक्रिया में क्या होगा?

Seema Haider News: SIR अभियान को लेकर सीमा हैदर पर असर की चर्चा तेज है लेकिन SIR सिर्फ वोटर लिस्ट अपडेट करता है. नागरिकता और कानूनी प्रक्रिया पहले से कोर्ट व राष्ट्रपति की याचिका पर निर्भर है.

उत्तर प्रदेश के साथ-साथ कई राज्यों में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान ने हर तरफ बहस छेड़ दी है. वोटर लिस्ट की बड़े पैमाने पर जांच-परख इसकी वजह है. SIR का मकसद है, पुरानी एंट्री हटाना, संदिग्ध नामों की जांच, और डेटा का मिलान करना. लेकिन सोशल मीडिया पर सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि इस अभियान का असर क्या सीमा हैदर जैसे मामलों पर भी पड़ेगा? क्या वह नोएडा छोड़ने को मजबूर होंगी?

सीमा गुलाम हैदर पाकिस्तान के कराची की रहने वाली महिला हैं. 2014 में उनकी शादी गुलाम हैदर से हुई. साल 2023 में PUBG गेम खेलते हुए उनकी पहचान और फिर दोस्ती नोएडा के सचिन मीणा से हुई. कहा जाता है कि नेपाल में दोनों मिले, मंदिर में शादी की और उसके बाद सीमा अपने चार बच्चों के साथ नेपाल बॉर्डर से भारत आ गईं.

नोएडा में रहने के दौरान दोनों को हिरासत में लिया गया. सीमा पर भारत में अवैध प्रवेश और फर्जी पहचान का केस दर्ज हुआ, लेकिन बाद में उन्हें जमानत मिल गई. इसी दौरान सीमा का मामला राष्ट्रीय सुर्खियों में छा गया. 

क्या SIR अभियान सीमा पर असर डाल सकता है?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि वोटर लिस्ट की इस बड़ी जांच का सीमा हैदर के केस से क्या संबंध है? इसका सीधा जवाब है, सीमा हैदर पर इसका कोई सीधा असर नहीं पड़ता.

SIR सिर्फ मतदाता सूची को अपडेट करने का काम करता है. यह अभियान किसी को घर खाली कराने, शहर छोड़ने या कहीं और भेजने से बिल्कुल नहीं जुड़ा है. न ही यह अभियान पुलिस जांच या केंद्रीय एजेंसियों की नागरिकता जांच जैसा होता है. इसके तहत सिर्फ यह देखा जाता है कि वोटर लिस्ट में गलत या डुप्लीकेट एंट्री तो नहीं हैं.

सीमा हैदर खुद अवैध प्रवेश के केस में पहले से कोर्ट में पेश हो रही हैं और जमानत पर हैं. इसलिए SIR उनके ठिकाने, लोकेशन या रहने की जगह पर कोई प्रभाव नहीं डालता.

सीमा का मामला जीवनदान का है- वकील एपी सिंह

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, सीमा के वकील एपी सिंह ने दावा किया है कि सीमा का मामला वोटर लिस्ट से बिलकुल अलग है. उनका कहना है कि  सीमा का मामला जीवनदान का है, वोटर लिस्ट का नहीं. यह मसला मानवीय आधार से जुड़ा है और राष्ट्रपति के पास लंबित दया याचिका के तहत आता है. पाकिस्तान दस्तावेजों के सत्यापन में सहयोग नहीं कर रहा है, लेकिन इससे केस पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा.

उनका कहना है कि सीमा न तो जासूस हैं न ही आतंकी, बल्कि प्रेम के कारण भारत आई हैं. एपी सिंह ने यहां तक कहा कि अगर सीमा को आतंकी साबित कर दिया जाए तो डबल फांसी दे दीजिए.

ऐसी स्थिति में हो सकती है कार्रवाई

अगर सीमा हैदर ने कभी वोटर आईडी या किसी भारतीय पहचान दस्तावेज के लिए आवेदन किया हो. उस स्थिति में SIR टीम सवाल उठा सकती है. लेकिन अभी तक ऐसा कोई आधिकारिक रिकॉर्ड सामने नहीं आया है. सीमा हैदर ने जुलाई 2023 में भारतीय नागरिकता के लिए राष्ट्रपति को दया याचिका भेजी थी. यह याचिका आज भी लंबित है.

इसीलिए वकील एपी सिंह का दावा है कि अंतिम फैसला राष्ट्रपति भवन से आएगा, न कि किसी वोटर लिस्ट वाले अभियान से. SIR और सीमा का केस दोनों प्रक्रियाएँ पूरी तरह अलग हैं और एक-दूसरे से नहीं टकरातीं.

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