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'हिन्दू कायर हैं, मुसलमान धन्य हैं जो...', माघ मेले की घटना के बीच शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का बड़ा बयान

Swami Avimukteshwaranand News: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि क्या किसी साधु संत सनातनी को परमिशन लेकर गंगा में स्नान करना होगा. कोई बच्चा अपनी मां गंगा से मिलने के लिए परमिशन लेता है.

प्रयागराज में माघ मेले में मौनी अमावस्या के दिन हुई घटना को लेकर धरने पर बैठे ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आज सोमवार (19 जनवरी, 2026) को प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस पूरे मामले पर बात की. शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौनी अमावस्या के पर्व पर हुए विवाद को लेकर कहा कि अधिकतर लोग समझ नहीं पा रहे कि यह आखिर ऐसा क्यों हुआ? किसी संत किसी साधु की सरकार के अधीन मेला प्रशासन कैसे बाल बटुकों और संतों के साथ ऐसा दुर्व्यवहार कर सकता है.

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि पहला आरोप है कि बैरिकेड तोड़ा गया तो सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक किया जाना चाहिए. हम अपने शिविर से स्थानीय पुलिस प्रशासन के साथ स्नान के लिए निकले थे, पुलिस ने कहा था कि हमें आपको स्नान कराने के लिए लगाया गया है. आश्रम से लेकर संगम तट तक वो हमारे साथ गए है, जहां बैरिकेड लगी पुलिस से उन्होंने ही वार्ता कर बैरिकेड खुलवाई थी. अगर हमारे लोग कोई उद्दंडता कर रहे थे तो किसी ने आकर क्यों नहीं बताया, हमने सदा नियम का पालन किया है, आगे भी करेंगे.

उन्होंने कहा कि अब क्या किसी साधु संत सनातनी को परमिशन लेकर गंगा में स्नान करना होगा. इसमें परमिशन की कोई बात नहीं है क्या कोई बच्चा अपनी मां गंगा से मिलने के लिए परमिशन लेता है. यहां लोग अपने पाप का उपार्जन करने पुण्य लाभ लेने आते है लेकिन शंकराचार्य को ऐसा मंतव्य नहीं होता है. हमारी डुबकी को देखकर लाखों करोड़ों लोग यहां आते है. हम अपने मूवमेंट की सूचना देते है ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था नहीं हो. हमारे शिविर से जो सूचना दी जानी थी वो दी गई थी, 3 दिन पहले पूरा कार्यक्रम लिखकर दिया जा रहा है.

हमारे बद्रीनाथ में आज भी शंकराचार्य जी की पालकी जाती है- शंकराचार्य

शंकराचार्य ने कहा कि क्या ये सूचना को ही परमिशन मान बैठे हैं, हम गंगा स्नान परमिशन लेकर नहीं करेंगे. उन्होंने कहा कि पूरे माघ मेला का इतिहास निकालकर देख लें, शंकराचार्य हमेशा से पालकी में ही स्नान करने जाते रहे हैं. हमारे बद्रीनाथ में आज भी शंकराचार्य जी की पालकी जाती है और जब पट बंद होते हैं तब भी पालकी नीचे आती है. कुंभ मेला या माघ मेला में पालकी में जाना हमारी परंपरा रही है, बीते 2 माघ मेले से हम खुद जाते रहे हैं.

उन्होंने कहा कि किसी संत के लिए करतब करते हुए संगम तक गए, हमारा उनसे कोई विरोध नहीं, क्या दो तरह के संत हो गए हैं.एक संत जो चापलूसी करे और दूसरा जो चापलूसी नहीं करेगा. इस मेला प्रशासन को बदला जाना चाहिए, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने बड़ा आरोप लगाया है कि कल हमारी मृत्यु हो जाती. सुबह 9.47 बजे से शाम 5 बजे तक हमने पालकी से जो देखा वो हम भूल नहीं सकते हैं. पालकी से उतारकर उनके जवान धक्का-मुक्की कर भगदड़ करते और हमको मार दिया जाता. कुंभ मेला में भगदड़ इसीलिए हुई क्योंकि इसी मेला प्रशासन के अधिकारी सो रहे लोगों को भगाने लगे और डंडा मारा जाने लगा था.

शंकराचार्य ने कहा कि मेले में भगदड़ करवाई जाती है, पहले हमें रोका गया फिर हमारे डंडी संन्यासी को ले जाया गया उसको मारा पीटा गया. पहले उसको बाल पकड़कर घसीटा गया और जूतों से मारा गया, बुजुर्ग को जूते से मारा गया. उन्होंने कहा कि शायद रावण भी दया करता लेकिन नेपाल से आए हमारे संत को चोटी से पकड़कर मारा गया. शंकराचार्य ने एक बटुक का खून लगा दुपट्टा दिखाकर बताया कैसे मारपीट हुई. उन्होंने कहा कि प्रशासन चाहता है कि 1762 में पानीपत की तीसरी लड़ाई हुई थी, उस युद्ध में विश्वास राव ने अपने भतीजे को घिरा देखा तो हाथी से कूद गए, सेना ने समझा हमारा सेनापति मारा गया और जिसकी वजह से अहमद शाह अब्दाली युद्ध जीत गया. ठीक उसी तरह ये लोग मुझे पालकी से उतारकर ऐसी घटना करना चाहते थे.

बीते दो साल से इसी रूट से पालकी में जाते रहे हैं- स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद

उन्होंने कहा कि अगर मैं जनता की नजरों से दूर होता तो दुश्मन साजिश में सफल हो जाते. उन्होंने कहा कि हमें पालकी का शौक नहीं है, प्रधानमंत्री जब आते तब उनको ऊंची गाड़ी में खड़ा किया जाता है ताकि जनता उनको दूर से देखकर संतुष्ट हो जाती है. मैं तो इस पूरे माघ मेला में गौ रक्षा के लिए हर साधु के पास पैदल जा रहा हूं. तीन वर्ष पहले जब शंकराचार्य हुए तब भी ऐसे ही जाते रहे हैं. जब सामान्य रूप से पैदल होकर गए तो जनता में भागा-दौड़ी हो जाती थी अव्यवस्था हो जाती थी, तब हम बीते दो साल से इसी रूट से पालकी में ही जाते रहे है.

यह माघ मेला में ऐसे ही पालकी से गए, तब किसने शिकायत कि कोई अव्यवस्था हुई या भगदड़ हुई. कोई अगर हमारी पीठ को हमारी परंपरा को कलंकित करने का काम करेगा तो यह बर्दाश्त नहीं होगा. हम यहां अपने मन से नहीं बैठे हैं, हमारे लोगों को प्रशासन अलग ले गए और तब सादे वर्दी में कमर में पिस्टल लगाकर आए जवान हमको ले गए. बीते 25 साल में जबसे सन्यासी हुए तब से कभी अकेले नहीं रहे, कल पहला अवसर था जब हम अपने लोगों के साथ नहीं थे. हमें किले के पास ले जाया गया, जनता हमें देखकर आई हमने किसी से नहीं कहा कि यह दुर्व्यवहार कर रहे हैं. अगर ऐसा करते तो जनता आक्रोशित हो सकती थी, वो लोग जैसा हमें छोड़े उसी तरह पालकी रखी है.

हम किसी अनशन पर किसी धरने पर नहीं बैठे हैं- स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद

उन्होंने कहा रात एक बजे तक जब तक अमावस्या तिथि रही हम बैठे रहे, हम किसी अनशन पर किसी धरने पर नहीं बैठे हैं. हम माघ मेले में माघी पूर्णिमा तक ऐसे ही रहेंगे और फिर माघ मेला में आएंगे लेकिन शिविर में प्रवेश तभी करेंगे जब प्रशासन गंगा स्नान कराएगा. हमारी पक्ष है कि हम अपने शिविर में प्रवेश तभी करेंगे जब सभी चार शंकराचार्यों और वैष्णवाचार्य को स्नान के प्रोटोकॉल का निर्धारण नहीं हो जाता है. कल हमने तात्कालिक तौर पर विचार था कि हम वापस जाएंगे लेकिन हमारे वरिष्ठ गुरु भाई द्वारिका पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती का फोन आया था, उन्होंने कह ऐसे मेला छोड़कर नहीं जाना चाहिए. सरकार तो चाहती ही है, धार्मिक आयोजन का व्यवसायीकरण हो जाएगा.

शंकराचार्य ने कहा कि 11 मार्च को दिल्ली में गौ रक्षा के लिए बड़ा संत सम्मेलन करेंगे, संत अपनी ताकत का एहसास कराएंगे. यह इसलिए हुआ क्योंकि हम गौ रक्षा की बात करते हैं. जबकि बीजेपी की सरकारें गौ माता की हत्या करने वालों से चंदा ले रही है, गौ रक्षा बीजेपी की सरकारें नहीं कर पा रही हैं.

हिंदू कायर है जो गौ माता की हत्या पर नहीं निकलता- शंकराचार्य

उन्होंने कहा कि योगी मंदिर को तोड़ने वाला आदमी है, काशी की हर गली में हम गए,40 दिन तक मंदिरों को बचाने के लिए निकले थे. हमारे साथ 40 दिन में कभी 100 से ऊपर हिन्दू नहीं आए. ज्ञानवापी के पास एक बुलडोजर रात में अतिक्रमण का काम कर रहा था, उसी में ज्ञानवापी की 3 ईंटे गिर गईं तो 10 हजार मुसलमान इकट्ठा हो गया था, धन्य है मुसलमान जो अपने धर्म की रक्षा के लिए निकलता है. हिंदू कायर है जो गौ माता की हत्या पर नहीं निकलता.

जब मुख्यमंत्री झूठ बोल सकता है तो ये कमिश्नर झूठ क्यों ना बोले

शंकराचार्य ने प्रयागराज की मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल की तस्वीर दिखाते हुए कहा, अगर ये चाहती तो कल ये स्थिति सम्भाल सकती थीं. इन्होंने मीडिया को झूठ और भ्रामक जानकारी दी है. ये झूठ क्यों ना बोला जब मुख्यमंत्री झूठ बोल सकता है तो ये कमिश्नर झूठ क्यों ना बोले, शंकराचार्य ने गृह सचिव आईपीएस मोहित गुप्ता की तस्वीर दिखाई. कहा यह स्वयं सादी वर्दी में था,ये सबसे हैंडसम नजर आ रहा था. मैंने इसको देखा यह गृह सचिव स्वयं अपने हाथों से दंडी बच्चों को मार रहा था, कल भी कोई ऐसा था जो यह  सब देख रहा था.

पुलिस कमिश्नर प्रयागराज बहुत हठधर्मी और दुष्ट 

मोहित गुप्ता की तस्वीर दिखाते हुए कहा,यह पुलिस अफसर है या गुंडा है. पुलिस कमिश्नर प्रयागराज जोगिंदर कुमार की तस्वीर दिखाते हुए कहा कि बहुत हठधर्मी और दुष्ट है. इसी ने कहा था बड़ी गर्मी चढ़ी थी अभी उतारता हूं. उन्होंने कहा पुलिस कमिश्नर ने हमारे रथ को बीच सड़क पर रोका, मैंने कहा किनारे करवा दो तो बोला कि पुलिस के कंधे इसके लिए नहीं है तो फिर पुलिस के कंधे से ही भेजा.

डीएम ने प्रेस में गलत और असत्य बातें बताई

डीएम मनीष कुमार वर्मा की तस्वीर दिखाकर कहा कि डीएम एक जिम्मेदारी भरा पद होता है यह स्वयं वहां थे. क्या उनको ऐसी स्थिति पैदा होने दिया जाना चाहिए था, अगर ऊपर से कहा गया था तो ठीक है आप आज्ञाकारी है. डीएम ने प्रेस में गलत और असत्य बातें बताई, एक सीएम की तस्वीर दिखाते हुए कहा इसका नाम विनीत सिंह है. यही फिल्म का खलनायक है, यही सबको अंदर ले जाकर मार रहा था, गाली दे रहा था. इसने लात मारी, इसने हमारे ब्रह्मचारी की छड़ी छीनकर मारा.

नीचे वाले इंस्पेक्टर दरोगा सिपाही कल की घटना से दुखी थे- शंकराचार्य

सीओ विनीत सिंह ने कहा हम पुरी के शंकराचार्य के शिष्य हैं, यह हमारे और पुरी के शंकराचार्य के बीच भेद डालना चाह रहा है. सभी घायलों की मेडिकल रिपोर्ट तैयार है. यह सब बड़े रैंक वाले अफसर कर रहे थे, नीचे वाले इंस्पेक्टर दरोगा सिपाही कल की घटना से दुखी थे. प्रशासन ने कुल 35 लोगों को हिरासत में लिया था, 12 लोगों का मेडिकल करवाया गया है और 3 लोग अभी भी भर्ती हैं. हमारी मठ की लीगल सेल है वो निर्णय लेगा कि आगे क्या करना है, संभवतः हाईकोर्ट ने याचिका डाली जाएगी. अगर हम कोई अपराध कर रहे है तो कार्रवाई करने का अधिकार है.

उन्होंने कहा कि जब मेरे लोगों को पकड़ रहे थे तब मुझे क्यों ने पकड़ा, क्यों कार्रवाई नहीं की सब कुछ हो तो मेरे ही नेतृत्व में हो रहा था. हमारे साथ लोग 5/7 घंटे अन्याय सहते रहे, जो सीओ विनीत सिंह आए थे उसने नीचे उतरने को कहा. 3 घंटे रहे तब वहां क्या अव्यवस्था हुई.

हम शंकराचार्य हैं या नहीं यह देश का प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री तय नहीं करेगा

ज्योतिष पीठ पर उनके शंकराचार्य पद पर आसीन होने को लेकर विवाद पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा हम शंकराचार्य हैं या नहीं यह देश का प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति या मुख्यमंत्री तय नहीं करेगा. मुझे दो शंकराचार्यों द्वारका पीठ और श्रृंगेरी मठ की स्वीकृति मिली है और तीसरे गोवर्धन पीठ पुरी के शंकराचार्य की मौन स्वीकृति है. उन्होंने कहा कि हमने भूल सुधार का पूरा मौका दिया कि प्रशासन आए तो हम स्नान कर लें लेकिन प्रशासन से कोई नहीं आया. प्रशासन आकर हमें मौनी अमावस्या पर स्नान करवाता तो कुछ नहीं होता हम ये टेक नहीं रखते.

वह पालकी पर ही माघी पूर्णिमा तक इसी तरह बैठे रहेंगे

फिलहाल स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा है कि वह पालकी पर ही माघी पूर्णिमा तक इसी तरह बैठे रहेंगे. उनका कहना है कि जब तक प्रशासन अपनी भूल सुधार नहीं करता है उनका यह विरोध जारी रहेगा.

सौरभ मिश्रा प्रयागराज के निवासी हैं. वह पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. अपने करियर की शुरुआत सौरभ ने 2020 में इंडिया अहेड से की, इसके बाद रिपब्लिक भारत में 2 महीने कार्य किया. सौरभ, वर्ष 2023 से अप्रैल 2025 तक मैं हिंदी खबर में एसोसिएट रिपोर्टर रहे. इन्होंने कई बड़े स्तरीय इवेंट और जन-सरोकार की खबरें कवर किए हैं. निष्पक्ष और तथ्य आधारित रिपोर्टिंग इनकी प्राथमिकता है.सौरभ ने पत्रकारिता जगत में पूरी ईमानदारी और मेहनत से काम किया है उन्हें हर दिन कुछ नया सीखना, लोगों से संवाद करना और समाज से जुड़े मुद्दों पर काम करना पसंद है. सौरभ ने स्नातक की पढ़ाई कानपुर यूनिवर्सिटी से की है और वर्तमान में भी पत्रकारिता से जुड़े हैं.
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