शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद बोले, '...तभी तो अखिलेश यादव ने हमारे ऊपर लाठी चलवा दी थी'
Shankaracharya Avimukteshwaranand News: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि उनका बीजेपी या कांग्रेस से कोई लेना-देना नहीं है. सिर्फ धर्म, गौमाता और मतदाता के अधिकार के मुद्दे पर संघर्ष कर रहे हैं.

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने राजनीतिक दलों और गौमाता के मुद्दे को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि उनका किसी भी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है और वे हमेशा अपने धार्मिक मुद्दों को लेकर आवाज उठाते रहे हैं. उन्होंने कहा कि पहले जब समाजवादी पार्टी की सरकार में उन पर लाठीचार्ज हुआ था, तब बीजेपी के कार्यकर्ता उनके साथ खड़े थे, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे बीजेपी के समर्थक थे.
'समाजवादी पार्टी ने हम पर लाठी चलवाई'
शंकराचार्य ने कहा, "समाजवादी पार्टी ने हमारे ऊपर लाठी चलाई. उस समय आप लोग यह सवाल नहीं पूछ रहे थे. उस समय तो बीजेपी के लोग हमारे साथ खड़े हुए थे. जिस समय हम समाजवादी पार्टी का विरोध कर रहे थे, काशी में 2015 में उस समय 5 हजार बीजेपी के लोग हमारे अगल-बगल खड़े थे. तभी तो अखिलेश यादव ने हमारे ऊपर लाठी चलवा दी. उसने समझा कि ये भी बीजेपी के हैं."
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उन्होंने कहा कि आज कुछ लोग उन्हें बीजेपी का आलोचक बता रहे हैं, जबकि उनका किसी भी पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है.
शंकराचार्य ने आगे कहा, "बीजेपी हो, कांग्रेस हो, ये सब राजनीतिक पार्टियां हैं. हमें उनसे क्या लेना-देना है? सत्ता से भी हमें कुछ लेना-देना नहीं रहता, क्योंकि हमें सत्ता से कुछ चाहिए नहीं. हम कोई सरकारी सुविधा नहीं चाहते हैं और इमदाद भी हम नहीं लेते हैं. हमारे विद्यालय भी चलते हैं. हम ग्रांट भी नहीं लेते हैं, क्योंकि सरकार के पैसे में वह पवित्रता नहीं है. ऐसा हम मानते हैं."
उन्होंने यह भी कहा कि जब एक रुपये का ट्रस्ट बनाए जाने की बात हुई थी, तब भी उन्होंने उसका विरोध किया था क्योंकि उनके अनुसार सरकारी धन की पवित्रता पर सवाल था.
हम मुद्दे की लड़ाई लड़ते हैं- शंकराचार्य
शंकराचार्य ने कहा, "हमने गलत पैसे का विरोध उस समय भी किया था और आज भी करते हैं. इसलिए हम बीजेपी और कांग्रेस नहीं देखते हैं. हम तो अपना मुद्दा देखते हैं, अपने मुद्दे को उठाते हैं और अपने मुद्दे के लिए लड़ते हैं."
उन्होंने कहा कि इस समय उनका सबसे बड़ा मुद्दा गौमाता और मतदाता के अधिकार का है. उनका कहना था कि असली शक्ति किसी नेता या राजनीतिक दल के पास नहीं, बल्कि मतदाता के पास होती है.
गौमाता और मांस निर्यात पर उठाए सवाल
शंकराचार्य ने कहा कि उन्होंने पूरे प्रदेश में लोगों से पूछा कि क्या उन्होंने मांस बिक्री के लिए वोट दिया था. उनके मुताबिक किसी भी व्यक्ति ने ऐसा नहीं कहा.
उन्होंने कहा, "नेता लोग हमारा वोट ले लेते हैं और हमें बताते तक नहीं हैं कि हमारे वोट लेकर वे क्या-क्या करेंगे. बताइए, जो प्रदेश की सरकार करोड़ों पशुओं का मांस आज बेच रही है, निर्यात कर रही है, क्या उसने जनता से सहमति ली है? क्या किसी सरकार को जनता की सहमति के बिना कुछ भी करने का अधिकार है? हम तो चींटी भी मारना नहीं चाहते और हमारा वोट लेकर हमारा नेता करोड़ों पशुओं का मांस कटवाकर बेच रहा है. आखिर हम पाप के भागीदार होंगे कि नहीं होंगे?"
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'हमें सिर्फ धर्म से लेना-देना है'
अपने बयान के अंत में शंकराचार्य ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक दल का समर्थन या विरोध करना नहीं है. उन्होंने कहा, "यह हमारे धर्म का मूलभूत प्रश्न है, हम उसका उत्तर तलाशने के लिए निकले हुए हैं. यह बहुत छोटे स्तर के लोगों की बात है कि यह पार्टी, वह पार्टी. हमें पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है. जब हमें बीजेपी से ही लेना-देना नहीं है, तो फिर और किस पार्टी से लेना-देना होगा? हमें तो धर्म से लेना-देना है और धर्म के प्रतीकों से लेना-देना है."
























