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राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में अखिलेश यादव ने दोनों ओर से घेरा! अयोध्या में फिर फंसी बीजेपी?

UP में 2027 में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी एक बार फिर बीजेपी को अयोध्या में फंसाने की कोशिश कर रही है. सपा चीफ बीजेपी को दोनों ओर से घेरने की रणनीति बनाते दिख रहे हैं.

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भारतीय जनता पार्टी की हिन्दुत्ववादी सियासत की रणनीति को कमजोर करने की कोशिश शुरू कर दी है. माना जा रहा है कि बीजेपी की इस रणनीति पर पलटवार की शुरुआत उन्होंने अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाकर की है.

अयोध्या का मुद्दा बीजेपी के लिए राजनीतिक और प्रतीकात्मक दोनों दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. ऐसे में राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर उठे विवाद को सियासी बहस का विषय बनाकर सपा प्रमुख ने एक बार फिर बीजेपी को उसी मैदान में घेरने की कोशिश की है, जिसे पार्टी अपनी सबसे बड़ी वैचारिक और राजनीतिक उपलब्धियों में गिनती है.

इस मामले में कन्नौज सांसद ने न सिर्फ सबसे पहले मुद्दा उठाया बल्कि जब विशेष जांच समिति गठित कर दी गई उसके बाद यह भी कह दिया कि 'बताओ अधिकारी जांच करेंगे हमारे भगवान के पुजारियों की? ये सनातन का अपमान है.'

अखिलेश यादव ने चढ़ावा चोरी के आरोपों पर कब-कब, क्या-क्या कहा?

7 जून दोपहर को सपा चीफ ने अयोध्या मामले पर सबसे पहला पोस्ट किया. उन्होंने दावा किया था, 'समस्त विश्व में भगवान राम के उपासकों के लिए ये एक बेहद संवेदनशील समाचार है कि ‘राम मंदिर’ के चढ़ावे की करोड़ों की रकम गायब पाई गई है.' उसके बाद फिर अखिलेश ने 7 जून को ही देर रात एक पोस्ट किया, जिसमें श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी और महासचिव के बयान पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने लिखा था - 'चेहरे के भाव और देह की भाषा हताशा और निराशा से भरी है.'

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अखिलेश ने राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर लगाए गए अपने आरोपों पर स्पष्टीकरण आने के बाद 9 जून को 11 सवाल भी पूछे. अपने इन सवालों में कन्नौज सांसद ने पूछा था- ⁠डबल इंजन क्या सिर्फ डबल ईंधन का उपभोग करने के लिए हैं या उनकी कोई जिम्मेदारी भी है? अपने इस सवाल के जरिए अखिलेश, राम मंदिर के बहाने, भारतीय जनता पार्टी की केंद्र और यूपी की राज्य सरकार को निशाना बनाने की कोशिश करते दिखे.

इसी दिन देर रात एक पोस्ट में अखिलेश ने पूछा था- 'सरकार मौन क्यों है? क्या जांच की आंच से बड़े लोग डरे हुए हैं?' करीब चार दिन बाद 13 जून को अखिलेश ने फिर लिखा. अखिलेश का यह पोस्ट एसआईटी गठित होने के बाद आया. इसमें उन्होंने लिखा कि 'यदि दोषी के बारे में पता करने में पुलिस अक्षम है तो हम सहायता कर दें.'

फिर 14 जून को अखिलेश ने आगरा में एक कार्यक्रम के दौरान कहा- 'प्रभु श्रीराम के चढ़ावे में अगर कोई बात हुई है तो कैमरा बंद करके आपस में बातचीत कर लें. जो चढ़ावा चोरी हुआ है वो वापस कर दें. अधिकारी जांच करेंगे हमारे पुजारियों की? यह सनातन धर्म का अपमान है. कोई इसको स्वीकार नहीं कर सकता.'

अयोध्या- बीजेपी के लिए मजबूती या कमजोर नब्ज?

भारतीय जनता पार्टी, उसके सहयोगी दल और उनके नेता दावा करते रहे हैं कि अयोध्या में राम मंदिर 500 वर्षों के संघर्ष के बाद बना. हालांकि राम मंदिर के उद्घाटन और लोकार्पण के बाद चुनावों में बीजेपी को इसका सीधा लाभ मिलता नहीं दिखा.

अयोध्या जिले में रुदौली, मिल्कीपुर (एससी), बीकापुर, अयोध्या और गोसाईंगंज विधानसभा सीट हैं. साल 2022 के चुनाव में अयोध्या से बीजेपी के वेद प्रकाश, बीकापुर से अमित सिंह चौहान, रुदौली से रामचंद्र यादव और गोसाईंगंज से सपा के टिकट पर अभय सिंह (जो अब बीजेपी के साथ हैं) ने जीत हासिल की थी. वहीं मिल्कीपुर से सपा के अवधेश प्रसाद विधायक चुने गए थे. यानी 2022 में पांच में से तीन सीटों पर बीजेपी और दो सीटों पर सपा ने जीत दर्ज की थी. हालांकि आज के सियासी परिप्रेक्ष्य में पांचों सीटों पर बीजेपी का कब्जा है.

साल 2024 में अयोध्या में मंदिर का लोकार्पण हुआ, उसी साल करीब तीन महीने बाद हुए लोकसभा चुनाव में बीजेपी न सिर्फ 2014 और 2019 के मुकाबले कम सीटों के साथ लोकसभा में पहुंची बल्कि फैजाबाद लोकसभा सीट भी हार गई. सपा के अवधेश प्रसाद ने बीजेपी के लल्लू सिंह को पराजित कर दिया.

हालांकि चुनाव परिणामों के बाद बीजेपी और उसके नेता यह कहकर खुद को तसल्ली देते रहे कि भले ही पार्टी फैजाबाद लोकसभा सीट हार गई हो, लेकिन अयोध्या विधानसभा क्षेत्र में उसे बढ़त मिली थी.

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मिल्कीपुर ने दी थी राहत!

लोकसभा चुनाव के करीब 10 महीने बाद फरवरी 2025 में अयोध्या जिले की मिल्कीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में बीजेपी ने वापसी की. फैजाबाद सांसद और सपा नेता अवधेश प्रसाद के बेटे अजीत प्रसाद को हराकर बीजेपी के चंद्रभानु पासवान ने जीत दर्ज की.

इस जीत के बाद बीजेपी ने राहत की सांस ली थी. हालांकि सपा प्रमुख आज भी कई मौकों पर मिल्कीपुर उपचुनाव में कथित धांधली के आरोप लगाते रहे हैं.

SIT गठन के बाद किसने क्या कहा?

उधर, अखिलेश यादव के आरोपों के बीच बीजेपी नेता डॉ. रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर पूरे मामले की जांच कराने की मांग की थी. उन्होंने कहा था कि अगर जांच में किसी तरह की अनियमितता सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन यदि आरोप गलत साबित होते हैं तो जांच एजेंसियों की रिपोर्ट ही विपक्ष को जवाब देगी.

अब जबकि इस मामले में सरकार ने एसआईटी गठित कर दी है, उसके बाद भारतीय जनता पार्टी अखिलेश यादव के आरोपों को निराधार बताते हुए जांच पूरी होने का इंतजार करने की बात कर रही है. उत्तर प्रदेश सरकार के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने बाराबंकी में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन कर दिया गया है. जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उन्हें सार्वजनिक किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी.

सांसद दिनेश शर्मा ने क्या कहा?

इसके साथ ही बीजेपी सांसद दिनेश शर्मा ने अयोध्या राम मंदिर चंदे में हेराफेरी के आरोपों की तीन सदस्यीय एसआईटी जांच पर कहा, 'ये चोरी शब्द अच्छा नहीं है. जो भी विवाद है, उस पर लोग पारदर्शी तरीके से और समर्पित भाव से काम कर रहे हैं. एसआईटी का गठन हो चुका है, इसलिए इस पर ज्यादा बोलना उचित नहीं है. जो एसआईटी का निर्णय आएगा, वह देखा जाएगा. इसके बाद दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा.'

अखिलेश यादव का दबाव कितना करेगा काम?

कुल मिलाकर राम मंदिर चढ़ावा विवाद ने अयोध्या की राजनीति को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है. अखिलेश यादव लगातार इस मुद्दे को उठाकर बीजेपी पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि बीजेपी और सरकार जांच के नतीजों का इंतजार करने की बात कर रहे हैं.

अब सबकी निगाहें एसआईटी की रिपोर्ट और उसके बाद होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं. यह देखना दिलचस्प होगा कि इस पूरे विवाद का उत्तर प्रदेश की राजनीति और 2027 के विधानसभा चुनाव पर कितना असर पड़ता है. साथ ही बीजेपी की हिन्दुत्ववादी रणनीति पर अखिलेश की रणनीति, कितना सफल हो पाती है.

राहुल सांकृत्यायन, abp live में बतौर डिप्टी न्यूज़ एडिटर कार्यरत हैं और स्टेट्स टीम का नेतृत्व कर रहे हैं. राहुल राजनीति, शासन-प्रशासन और समकालीन विषयों की खबरों की कवरेज और खबरों एवं घटनाक्रमों के संपादकीय समन्वय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं.

पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव रखने वाले राहुल ने अपने करियर की शुरुआत में राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और फीचर डेस्क पर भी काम किया है. उनकी विशेष रुचि राजनीतिक खबरों, अपराध से जुड़े मामलों और राज्यों की समकालीन राजनीतिक गतिविधियों की कवरेज में रही है.

राहुल इससे पहले न्यूज़18 हिन्दी, वनइंडिया हिन्दी और अमर उजाला जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में विभिन्न पदों पर काम कर चुके हैं, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज और स्टेट्स कवरेज में महत्वपूर्ण अनुभव हासिल किया.

अपने पत्रकारिता करियर के दौरान राहुल ने कई महत्वपूर्ण घटनाओं और बड़े आयोजनों की कवरेज की है, जिनमें कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2018, लोकसभा चुनाव 2024 ऑपरेशन सिंदूर और महाकुंभ 2025 जैसे प्रमुख घटनाक्रम शामिल हैं.

राहुल ने देश के प्रतिष्ठित पत्रकारिता संस्थान भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली से हिन्दी पत्रकारिता में शिक्षा प्राप्त की है. उन्होंने इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के आनुषंगिक महाविद्यालय ईश्वर शरण डिग्री कॉलेज, प्रयागराज से बी.कॉम किया है. इसके अलावा राहुल ने केंद्रीय विद्यालय बस्ती से हाईस्कूल और सरस्वती विद्या मंदिर रामबाग, बस्ती से इंटरमीडिएट की पढ़ाई की. आगे चलकर गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, हिसार से दूरस्थ शिक्षा कार्यक्रम के तहत पत्रकारिता में परास्नातक भी किया.

खबरों के अलावा साहित्य और वैचारिक लेखन में भी राहुल की गहरी रुचि है. राहुल हिंदी साहित्य के प्रमुख रचनाकारों जैसे राहुल सांकृत्यायन, यशपाल, मुंशी प्रेमचंद, हजारी प्रसाद द्विवेदी और सर्वेश्वर दयाल सक्सेना के लेखन को विशेष रूप से पढ़ना पसंद करते हैं. इसके साथ ही ओम प्रकाश वाल्मिकी, महादेवी वर्मा, अष्टभुजा शुक्ल, विनोद शुक्ल, दुष्यंत कुमार, रामनाथ सिंह, अदम गोंडवी, राही मासूम रजा, गोपाल दास नीरज की रचनाओं में भी उनकी दिलचस्पी है.

खबरों के लिए राहुल से rahulsa@abpnetwork.com पर संपर्क किया जा सकता है. 

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