UPSC में हिंदी से IAS-IPS बनने वालों की संख्या घटी, 2024 में सिर्फ 5 उम्मीदवार
आंकड़ों के अनुसार, हिंदी-मैथिली माध्यम से CSE मुख्य परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों में IAS और IPS पदों के लिए अनुशंसित उम्मीदवारों की संख्या 2021 में 10, 2022 में 27, 2023 में 14 और 2024 में 4 रही.

UPSC CSE Data: यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में हिंदी और दूसरे क्षेत्रीय भाषाओं में मुख्य परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों की संख्या बढ़ी है, लेकिन हिंदी-मैथिली माध्यम से परीक्षा देकर आईएएस और आईपीएस पदों के लिए अनुशंसित होने वाले उम्मीदवारों की संख्या में पिछले कुछ वर्षों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. 2024 में ऐसे सिर्फ पांच उम्मीदवार आईएएस और आईपीएस पदों के लिए अनुशंसित हुए, जबकि 2022 में यह संख्या 27 तक पहुंच गई है. यह जानकारी केंद्र सरकार ने राज्यसभा में दी है.
कितने उम्मीदवार IAS-IPS के लिए अनुशंसित हुए?
सरकार की ओर से राज्यसभा में जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार हिंदी-मैथिली माध्यम से सीएसई मुख्य परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों में आईएएस और आईपीएस पदों के लिए अनुशंसित उम्मीदवारों की संख्या 2021 में 10, 2022 में 27, 2023 में 14 और 2024 में 4 रही. यानी 2022 में 27 उम्मीदवारों के साथ यह संख्या 4 साल के दौरान सबसे ज्यादा थी, इसके बाद इसमें लगातार कमी दर्ज की गई और 2024 में यह आंकड़ा 5 तक पहुंच गया.
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हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं में मुख्य परीक्षा देने वाले बढ़े
सरकार ने हिंदी और आठवीं अनुसूची में शामिल अन्य भाषाओं में सीएसई मुख्य परीक्षा लिखने वाले उम्मीदवारों का आंकड़ा भी दिया है. इसमें 2024 में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दरजी दिखाई देती है. 2021 में 538 उम्मीदवारों ने इन भाषाओं में मुख्य परीक्षा दी थी, जो 2022 में बढ़कर 587 और 2023 में 599 हो गई. 2024 में यह आंकड़ा 1133 हो गया. हालांकि इन उम्मीदवारों में मुख्य परीक्षा में सफल होने वालों की संख्या अलग रही. आंकड़ों के अनुसार 2019 में 26, 2022 में 71, 2023 में 57 और 2024 में 50 उम्मीदवार मुख्य परीक्षा में क्वालीफाई हुए.
बिहार से UPSC में अनुशंसित उम्मीदवारों की संख्या
राज्यसभा में दिए गए जवाब में बिहार से सिविल सेवा परीक्षा में अनुशंसित उम्मीदवारों का सालाना आंकड़ा भी जारी किया गया. इसके अनुसार 2021 में बिहार में 54 उम्मीदवार अनुशंसित हुए थे. 2019 में यह संख्या बढ़कर 63, 2023 में 82 हुई, जबकि 2024 में घटकर 72 रह गई. कुल मिलाकर सरकार के आंकड़े बताते हैं कि हिंदी और दूसरी क्षेत्रीय भाषा में यूपीएससी मुख्य परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों की संख्या में बढ़ोतरी हुई, लेकिन हिंदी-मैथिली माध्यम से आईएएस और आईपीएस के लिए अनुशंसित उम्मीदवारों की संख्या 2022 के 27 से घटकर 2024 में सिर्फ 5 रह गई.
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