राजकुमार भाटी के बयान ने बढ़ाई अखिलेश यादव की चुनौती, जिस जिले में की पहली रैली वहीं से आ रहे इस्तीफे
UP Politics: राजकुमार भाटी के बयान से अखिलेश यादव की मुश्किलें बढ़ गईं हैं. अब उस जिले से इस्तीफे का दौर शुरू हो गया है जहां अखिलेश ने 2027 चुनाव सबसे पहली सियासी सभा की थी.

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की चुनौती बढ़ती दिख रही है. इसी साल मार्च में सपा चीफ ने जिस जिले में साल 2027 में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव के लिए अपनी सबसे पहली सियासी रैली की थी, अब वहीं से इस्तीफों का दौर शुरू हो गया है. गौतमबुद्धनगर स्थित दादरी में 29 मार्च को अखिलेश ने रैली की थी. इस रैली के कर्ता-धर्ता राजकुमार भाटी को माना गया.
अब ग्रेटर नोएडा में ब्राह्मण समाज पर कथित अशोभनीय टिप्पणी को लेकर समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजकुमार भाटी का विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है. इसी क्रम में जनपद दीवानी एवं फौजदारी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज भाटी और सचिव शोभाराम चंदीला ने समाजवादी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है.
स्वर्ण नगरी स्थित प्रेस क्लब में आयोजित प्रेसवार्ता में दोनों नेताओं ने अपने इस्तीफे की घोषणा की. उन्होंने कहा कि वह लंबे समय से समाजवादी पार्टी से जुड़े रहे हैं. मनोज भाटी सपा अधिवक्ता सभा के राष्ट्रीय सचिव भी रहे हैं, जबकि शोभाराम चंदीला पार्टी के पुराने कार्यकर्ता हैं. उन्होंने कहा कि अधिवक्ताओं के हितों को सर्वोपरि रखते हुए उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता छोड़ने का फैसला लिया है.
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मनोज भाटी और शोभाराम चंदीला ने कहा कि इस तरह के बयानों से समाज में विघटनकारी मानसिकता को बढ़ावा मिल रहा है और अधिवक्ता समाज के बीच असहज स्थिति पैदा हो रही है. उन्होंने कहा कि बार एसोसिएशन में करीब 700 अधिवक्ता ब्राह्मण समाज से जुड़े हुए हैं. ऐसे बयान केवल ब्राह्मण समाज ही नहीं, बल्कि सनातन समाज के अन्य वर्गों में भी नाराजगी पैदा कर रहे हैं.
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दोनों नेताओं ने कहा कि अधिवक्ता समाज की जिम्मेदारी सामाजिक समरसता बनाए रखने की होती है और किसी भी प्रकार की विभाजनकारी राजनीति से दूरी बनाए रखना जरूरी है. उनका कहना था कि बार एसोसिएशन में सभी धर्मों और समाजों के लोग मिल-जुलकर काम करते हैं, ऐसे में किसी भी विवादित या अपमानजनक टिप्पणी से गलत संदेश जाता है.
प्रेसवार्ता के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी से जुड़े कुछ अधिवक्ताओं और पदाधिकारियों द्वारा करीब 600 वकीलों के लिए बनाए जा रहे चैंबर निर्माण कार्य को रुकवाने की कोशिश की जा रही है. इसे अधिवक्ताओं के हितों के खिलाफ बताते हुए दोनों नेताओं ने नाराजगी जताई.
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उन्होंने संकेत दिए कि भविष्य में वह किसी राजनीतिक विचारधारा से ऊपर उठकर अधिवक्ता समाज के अधिकारों और सम्मान की लड़ाई लड़ेंगे.
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Source: IOCL

























