Magh Mela 2026: ॐ नम: शिवाय संस्था 48 वर्षों से माघ मेले में चला रही अन्नक्षेत्र, कोई श्रद्धालु नहीं जाता भूखा
Prayagraj News: ओम नम: शिवाय संस्था की ओर से माघ मेले और कुंभ मेले में पिछले 48 वर्षों से यह संस्था अन्न क्षेत्र चला रही है. इस भंडारे में हर दिन हजारों लोगों का भोजन तैयार होता है.

संगम की रेती पर माघ मेले की शुरुआत होने जा रही है. माघ मेले में देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु आते हैं. लेकिन यहां आने वाले लोगों पर मां गंगा का ऐसा आशीर्वाद है कि कोई भी व्यक्ति भूखा नहीं रहता है. इसके लिए कई संस्थाओं की ओर से अन्नक्षेत्र और भंडारे चलाये जाते हैं. जिसमें प्रतिदिन हजारों लोगों को प्रसाद ग्रहण कराया जाता है.
माघ मेले में पिछले 48 वर्षों से एक अन्न क्षेत्र ऐसा भी है जो कि सबसे अनूठा है. इस महा रसोई में महा कराहों में मशीनों के जरिए प्रसाद तैयार कराया जाता है. जिसमें हर दिन हजारों लोग प्रसाद ग्रहण करते हैं. खास बात ये है कि ये भंडारा पूरे माघ मेले के दौरान 24 घंटे इसी तरह से चलता रहता है और सैकड़ों सेवादार श्रद्धालुओं की सेवा में दिन रात लगे रहते हैं.
क्रेन की मदद से भट्टियों पर चढ़ाए जाते हैं कराहे
ओम नम: शिवाय संस्था की ओर से माघ मेले और कुंभ मेले में पिछले 48 वर्षों से यह संस्था अन्न क्षेत्र चला रही है. इसमें बड़े-बड़े कराहे क्रेन के जरिए भट्टियों पर चढ़ाये जाते हैं. यह महा कराहे खासतौर पर पंजाब के जालंधर से मंगाए गए हैं. जिसमें एक साथ चालीस क्विंटल सब्जियां और दालें तैयार होती हैं. जबकि महा कराहे में एक साथ पांच हजार पूड़ियां भी निकाली जाती हैं.
भंडारे में हर दिन तैयार होता है हजारों लोंगो को भोजन
इसके साथ ही पूड़ियां और रोटियां बनाने के लिए मशीनों का भी प्रयोग किया जाता है. इस भंडारे में हर दिन हजारों लोगों का भोजन तैयार होता है. जिसमें सैकड़ों सेवादार पूरे सेवाभाव से लगे रहते हैं. यहां आने वाले श्रद्धालुओं को बैठाकर पूरे सेवा भाव से निशुल्क भोजन कराया जाता है.
माघ मेले में सात स्थानों पर चल रहा है भंडारा
इस बार माघ मेले में ओम नमः शिवाय गुरु जी की ओर से प्रसाद वितरण के लिए एंबुलेंस सेवा भी शुरू की गई है. पांच ई रिक्शा मंगाये गए हैं. जिन पर मेले में विभिन्न क्षेत्रों में लोगों को प्रसाद उपलब्ध कराया जा रहा है. उनके मुताबिक अभी 10 और ई रिक्शा एंबुलेंस मंगाए जा रहे हैं. फिलहाल माघ मेले में सात स्थानों पर इसी तरह से भंडारा चलाया जा रहा है.
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