पाखरो रेंज घोटाला: डेढ़ साल की जांच के बाद CBI ने सरकार को सौंपी रिपोर्ट, जानिए पूरा मामला
Uttarakhand News: जिम कॉर्बेट के पाखरो रेंज में घोटाले की जांच के बाद सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट उत्तराखंड शासन को सौंप दी है. आरोप है कि टाइगर सफारी के नाम पर 215 करोड़ रुपये वित्तीय दुरुपयोग किया गया.

Jim Corbett National Park News: विश्व प्रसिद्ध जिम कॉर्बेट टाइगर रिजर्व की पाखरो रेंज में हुए बहुचर्चित घोटाले की जांच में बड़ा अपडेट सामने आया है. करीब डेढ़ साल की जांच के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अपनी रिपोर्ट उत्तराखंड शासन को सौंप दी है. सीबीआई अधिकारियों ने प्रमुख सचिव वन आरके सुधांशु से मुलाकात कर रिपोर्ट सौंपी. अब शासन से अभियोजन स्वीकृति मिलने के बाद जल्द ही आरोपियों के खिलाफ सीबीआई कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की जाएगी.
उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट के आदेश पर अक्टूबर 2023 में यह जांच विजिलेंस से हटाकर सीबीआई को सौंपी गई थी. इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू से जांच कर रहा है. इस मामले में प्रमुख सचिव आर के सुधांशु से एबीपी लाइव ने बात की तो उन्होंने ये तो स्वीकार की सीबीआई के अफसर उनसे मिले लेकिन उन्होंने ओर कुछ बताने से इंकार कर दिया.
परियोजना के नाम पर 215 करोड़ रुपये का वित्तीय दुरुपयोग
गौरतलब है कि वर्ष 2019 में कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के पाखरो रेंज के 106 हेक्टेयर वन क्षेत्र में टाइगर सफारी विकसित करने का निर्णय लिया गया था. परंतु निर्माण कार्य बिना वित्तीय स्वीकृति के शुरू कर दिया गया. परियोजना के नाम पर भारी अवैध कटान और निर्माण कार्य किए गए. राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की टीम ने मौके पर निरीक्षण कर अनियमितताओं की पुष्टि की. शिकायतों के बाद विजिलेंस जांच शुरू हुई और वर्ष 2022 में तत्कालीन डीएफओ किशन चंद और रेंजर बृज बिहारी शर्मा के खिलाफ मामला दर्ज किया गया.
आरोप है कि टाइगर सफारी के नाम पर 215 करोड़ रुपये का भारी वित्तीय दुरुपयोग किया गया. दूसरे मदों का पैसा कथित सांठगांठ से इस कार्य में लगाया गया और ठेकेदारों से अवैध लेनदेन किए गए. विजिलेंस जांच में यह भी सामने आया कि पाखरो रेंज के लिए खरीदे गए जेनरेटर सेट का उपयोग एक पूर्व मंत्री के करीबी के पेट्रोल पंप और कॉलेज में किया जा रहा था.
पार्क निदेशक ने अनियमितताओं को रोकने का प्रयास किया
हालांकि इस पूरे प्रकरण के बीच यह भी उल्लेखनीय है कि कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के तत्कालीन निदेशक ने अपने स्तर से कई अनियमितताओं को रोकने का प्रयास किया. उन्होंने समय-समय पर उच्चाधिकारियों को इस बाबत सूचित किया और कार्यों पर निगरानी भी रखी. निदेशक के प्रयासों से कुछ हद तक नुकसान को सीमित करने में मदद मिली, लेकिन विभागीय राजनीति और दबाव के चलते वह सभी गड़बड़ियों को रोकने में पूरी तरह सफल नहीं हो सके.
मामले की जड़ में वन विभाग के भीतर चली आ रही गुटबाजी भी एक बड़ी वजह रही. कई अधिकारियों के बीच आपसी टकराव और अधिकारों की खींचतान ने स्थिति को और जटिल बना दिया. यही आपसी लड़ाई बाद में सरकार के लिए भी परेशानी का सबब बन गई. विभाग के भीतर पारदर्शिता की कमी और गुटों में बंटे अधिकारी घोटाले के खुलासे में भी एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाते रहे.
डीएफओ, रेंजर समेत पांच लोगों से होगी पूछताछ
सीबीआई सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट में पांच अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन चलाने की अनुमति मांगी गई है. इनमें तत्कालीन डीएफओ, रेंजर और कुछ अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं. जल्द ही शासन से अनुमति मिलने के बाद सीबीआई कोर्ट में चार्जशीट दाखिल करेगी, जिसके बाद घोटाले से जुड़े कई और अहम खुलासे सामने आ सकते हैं.
सरकार भी इस पूरे मामले को लेकर सतर्क है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पहले ही स्पष्ट किया था कि भ्रष्टाचार के किसी भी मामले में दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा. ऐसे में अब निगाहें शासन के अगले कदम और सीबीआई की चार्जशीट पर टिकी हैं.
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Source: IOCL






















