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एक ही पात्रता परीक्षा का क्या फायदा, जब सालों -साल पूरी नहीं हो पातीं भर्तियां, पढ़ें ये स्पेशल रिपोर्ट

सरकार ने कई नौकरियों के लिये अब एक ही पात्रता परीक्षा किये जाने का एलान किया है. लेकिन सवाल ये भी उठ रहा है कि तमाम ऐसी भर्तियां हैं जिनके विज्ञापन काफी पहले निकाले गये थे लेकिन वह अभी भी अधर में लटकी हैं. पढ़ें ये स्पेशल रिपोर्ट.

प्रयागराज. केंद्रीय कैबिनेट ने नान टेक्निकल पदों पर होने वाली भर्तियों के लिए एक ही पात्रता परीक्षा कराने का जो फैसला किया है, उसका प्रतियोगी छात्रों के साथ ही भर्तियों से जुड़े विशेषज्ञ स्वागत कर रहे हैं और इसे एक दूरगामी कदम बता रहे हैं. इस फैसले के बाद यूपी समेत दूसरे राज्यों की भर्तियों में भी यह नियम लागू किये जाने की मांग उठने लगी है. प्रतियोगी छात्रों का कहना है कि इससे न सिर्फ उनका पैसा और समय बचेगा, बल्कि बेवजह की यात्राएं भी नहीं करनी होंगी. इसके अलावा अलग-अलग सिलेबस के बजाय एक ही पाठ्यक्रम की तैयारी उनके लिए ज़्यादा मुफीद साबित होगी. वह अच्छे मन व ज़्यादा लगन से तैयारी कर सकेंगे और उनके लिए अवसर भी पहले से ज़्यादा बढ़ सकेंगे. दूसरी तरफ जानकारों के मुताबिक़ एक ही पात्रता परीक्षा होने से गड़बड़ियों की संभावना कम होगी और भर्तियों में कम समय भी लगेगा.

हालांकि इसके बावजूद सवाल यह उठ रहे हैं कि जब सरकारी नौकरियों की संख्या लगातार घटती जा रही है और एक एक भर्तियों के पूरा होने में कई -कई साल का वक्त लग जा रहा है, तो ऐसे में इस तरह के बदलाव का व्यवहारिक तौर पर कितना फायदा मिलेगा. केंद्र सरकार की रेलवे की भर्तियां भी सालों से रुकी हुई हैं. यूपी में तो भर्तियों का बहुत बुरा हाल है. कई भर्तियां तो छह और सात साल का वक़्त पूरा होने के बावजूद पूरी नहीं हो सकी हैं. कोई भी भर्ती ढाई तीन साल से पहले पूरी नहीं हो पाती है. यूपी में भर्ती कराने वाली सबसे बड़ी संस्था स्टेट पब्लिक सर्विस कमीशन की सबसे महत्वपूर्ण भर्ती पीसीएस आफिसर्स को भी पूरा होने में कई साल का वक्त लग जा रहा है. ऐसे में भर्तियों की समय सीमा निर्धारित किये बिना इस तरह के बदलाव का कोई ख़ास फायदा सही मायने में नहीं हो सकेगा.

केंद्र सरकार की रेलवे भर्ती के साथ ही यूपी की कुछ ऐसी भर्तियों पर एक नज़र, जो बरसों से लटकी पडी हैं और जिनमे लाखों अभ्यर्थियों ने आवेदन कर रखा है

1- रेलवे ने तकरीबन पौने दो साल पहले नान टेक्निकल के सैंतीस हज़ार पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की थी. इस भर्ती में शामिल होने के लिए डेढ़ करोड़ से ज़्यादा लोगों ने आवेदन किया था. यह देश की ऐसी सबसे बड़ी परीक्षा है, जिसमे सबसे ज़्यादा अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है. पौने दो साल बीत जाने के बावजूद रेलवे अभी परीक्षा तक नहीं करा सका है. कोरोना काल में डेढ़ करोड़ अभ्यर्थियों की परीक्षा करा पाना फिलहाल मुमकिन भी नहीं नज़र आ रहा है.

2- यूपी के प्राइमरी स्कूलों में असिस्टेंट टीचर्स के उनहत्तर हजार पदों पर भर्ती की प्रक्रिया साल 2018 में शुरू हुई थी. 6 जनवरी 2019 को लिखित परीक्षा हो गई. करीब डेढ़ साल बाद लिखित परीक्षा का रिजल्ट घोषित किया गया. तीन जून से काउंसलिंग शुरू होनी थी, लेकिन काउसंलिंग शुरू होते ही हाईकोर्ट ने भर्ती पर रोक लगा दी. इस परीक्षा के लिए चार लाख से ज़्यादा अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था. इस भर्ती से जुड़ा मामला अभी सुप्रीम और हाईकोर्ट दोनों ही जगहों पर पेंडिंग है.

3- यूपी पब्लिक सर्विस कमीशन ने करीब ढाई साल पहले एलटी ग्रेड टीचर्स की भर्ती की प्रक्रिया शुरू कराई थी. करीब पचीस महीने पहले जुलाई -2018 में लिखित परीक्षा हुई. पंद्रह विषयों के 10768 पदों पर भर्ती होनी थी, लेकिन पब्लिक सर्विस कमीशन जैसी बड़ी संस्था से पेपर लीक हो गया. कमीशन की तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक अंजू कटियार को जेल तक जाना पड़ा. इस भर्ती के लिए चार लाख से अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था. तेरह विषयों का रिजल्ट जारी हो गया है, लेकिन हिन्दी और सामाजिक विज्ञान के करीब तैंतीस सौ पदों के नतीजे अभी घोषित ही नहीं हुए हैं. जिन तेरह विषयों के नतीजे घोषित हुए हैं, उनके सफल अभ्यर्थियों को अभी नियुक्ति नहीं मिल पाई है.

एक ही पात्रता परीक्षा का क्या फायदा, जब सालों -साल पूरी नहीं हो पातीं भर्तियां, पढ़ें ये स्पेशल रिपोर्ट

4- यूपी में पीसीएस की परीक्षा सबसे प्रमुख मानी जाती है. साल 2018 के 984 पदों की भर्तियों का अभी इंटरव्यू तक पूरा नहीं हो पाया है. पीसीएस-2018 में भर्ती के लिए 6 लाख से ज़्यादा अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था.

5- यूपी पीसीएस-2019 की भर्ती की मुख्य परीक्षा साल भर से ज़्यादा का वक्त बीतने के बावजूद अभी तक नहीं कराई जा सकी है. इस भर्ती के लिए भी छह लाख के करीब अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था.

6- यूपी पब्लिक सर्विस कमीशन ने समीक्षा अधिकारी और सहायक समीक्षा अधिकारी के करीब 600 पदों के लिए साल 2016 में विज्ञापन निकाला था. इसके लिए तीन लाख से ज़्यादा अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था. चार साल का वक्त बीतने के बावजूद कमीशन अभी तक प्रारम्भिक परीक्षा भी नहीं करा सका है.

7- यूपी माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड ने इंटर कॉलेजों में प्रवक्ताओं के पदों पर साल 2013 और 2016 में भर्तियां निकाली थीं. 2013 की भर्ती में ढाई हज़ार के करीब और 2016 की भर्ती में साढ़े तीन हज़ार से ज़्यादा पदों पर नियुक्तियां होनी थीं. तकरीबन सात और चार साल का वक्त बीतने के बावजूद चयन बोर्ड अभी तक रिजल्ट जारी नहीं कर सका है.

एक ही पात्रता परीक्षा का क्या फायदा, जब सालों -साल पूरी नहीं हो पातीं भर्तियां, पढ़ें ये स्पेशल रिपोर्ट

8- यूपी में अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने लोअर PCS के 483 पदों पर दो साल पहले विज्ञापन निकाला था. साल 2018 में शुरू हुई भर्ती प्रक्रिया के लिए पांच लाख के करीब आवेदन हुए थे. आयोग अभी तक मुख्य परीक्षा भी नहीं करा सका है.

9- अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने साल 2016 में जूनियर असिस्टेंट के दो हज़ार के करीब पदों और टेक्निकल असिस्टेंट के साढ़े तीन सौ पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की थी. चार साल बीत गए, लेकिन अभी परीक्षा तक नहीं हो सकी है.

10- यूपी पब्लिक सर्विस कमीशन ने साल 2018 में मेडिकल आफिसर पद पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था. दो साल का वक्त बीतने के बावजूद अभी इसमें कुछ भी नहीं हो सका है.

11- यूपी में ब्लाक एजूकेशन आफिसर यानी बीईओ पद पर पिछले आठ साल से भर्ती नहीं हुई थी. पिछले साल तीन सौ से ज़्यादा पदों के लिए विज्ञापन निकाला गया. इसके लिए सवा पांच लाख से ज़्यादा अभ्यर्थियों ने आवेदन किये. साल भर बाद अभी सिर्फ प्रारम्भिक परीक्षा ही हो सकी है, वह भी सिर्फ चार दिन पहले.

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मोहम्मद मोईन को पत्रकारिता का करीब तीन दशक का अनुभव है. वह प्रिंट - इलेक्ट्रानिक और डिजिटल तीनों ही माध्यमों में सालों तक काम कर चुके हैं. ABP नेटवर्क से वह पिछले करीब 18 सालों, स्टार न्यूज़ के समय से ही जुड़े हुए हैं. राजनीति - धर्म और लीगल टापिक के साथ सम सामयिक विषयों के एक्सपर्ट हैं. पत्रकार होने के साथ ही राजनीतिक विश्लेषक, एक्सपर्ट पैनलिस्ट, आलोचक और टिप्पणीकार भी हैं. इनकी चुनावी भविष्यवाणी ज्यादातर मौकों पर सटीक साबित हुई है. 8 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव कवर कर चुके हैं. 7 कुंभ और महाकुंभ की कवरेज कर अपनी अलग पहचान बनाई है. यह अपनी बेबाक- निष्पक्ष और तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. मोहम्मद मोईन ने चार विषयों पत्रकारिता एवं जनसंचार, राजनीति विज्ञान, हिंदी और मध्यकालीन व आधुनिक इतिहास विषयों में मास्टर डिग्री यानी स्नातकोत्तर किया हुआ है. लॉ ग्रेजुएट भी हैं. देश के कई राज्यों में काम करने का अनुभव रखते हैं. देश की तमाम नामचीन हस्तियों का इंटरव्यू ले चुके हैं और कई चर्चित घटनाओं को कवर चुके हैं. 

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