UP News: गाजियाबाद नगर निगम पर लगा 2.25 करोड़ का जुर्माना, जानें क्या है पूरा मामला
UP News: एनजीटी ने गाजियाबाद के लोनी इलाके में पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने पर नगर पालिका पर 2.25 करोड़ का जुर्माना लगाया है. NGT ने अगली सुनवाई में अधिकारियों को पेश होने के लिए कहा है.

उत्तर प्रदेश स्थित गाजियाबाद में राष्ट्रीय हरित अधिग्रहण यानी एनजीटी की तरफ से बड़ी कार्रवाई की गई है. एनजीटी ने गाजियाबाद के लोनी इलाके में पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने पर नगर पालिका पर 2.25 करोड़ का जुर्माना लगाया है. दरअसल, शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि नगर पालिक द्वारा इलाके की ग्रीन बेल्ट में लगातार सीवेज और ठोस कचरा डाला जा रहा है, जिससे न केवल हरियाली नष्ट हो रही है बल्कि ग्राउंड वाटर भी प्रदूषित हो रहा है और कई पेड़ सूख गए. हैं.
इस मामले में NGT ने टिप्पणी की प्रशासनिक लापरवाही और विभागों के बीच समन्वय की कमी से पर्यावरण को गंभीर नुकसान हो रहा है. एनजीटी ने मामले में नगर पालिका परिषद, जल निगम और ज़िलाधिकारी गाजियाबाद के वरिष्ठ अधिकारियों को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है. जल निगम को लोनी क्षेत्र में सीवरेज योजना तुरंत लागू करने का निर्देश दिया गया है.
पहले भी गाजियाबाद नगर निगम पर लग चुका है जुर्माना
आपको बता दें कि, राष्ट्रीय हरित अधिग्रहण यानी एनजीटी की तरफ से यह कोई पहली कार्रवाई गाजियाबाद नगर निगम पर नहीं की गई है. एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, एनजीटी ने इससे पहले गाजियाबाद नगर निगम 4 करोड़ 57 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था. दरअसल, मधुबन बापूधाम पॉकेट डी स्थित एसटीपी प्लांट में कूड़ा डालने के लिए एनजीटी ने गाजियाबाद नगर निगम पर चार करोड़ 57 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था. साथ ही नगर निगम की तरफ से गलत जानकारी प्रस्तुत किये जाने पर नाराजगी जाहिर की थी.
बताते चलें कि मधुबन बापूधाम वेलफेयर सोसायटी की ओर से साल 2022 से 2024 में कांवड़ यात्रा के बहाने पाकेट डी स्थित एसटीपी में कूड़ा डाला जा रहा था. सोसायटी के सदस्यों ने कूड़ा डालने का विरोध करते हुए उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जिलाधिकारी, नगर निगम व जीडीए सहित अन्य उच्चाधिकारियों से शिकायत की थी. सोसायटी के लोगों के विरोध को निगम प्रशासन के अधिकारियों ने पुलिस के बल पर बंद करवा दिया था. हालांकि सोसायटी की ओर से 7 अगस्त 2024 को एनजीटी नई दिल्ली में शिकायत दर्ज कराई गई थी.






















