मानसिक स्वास्थ्य: मन की उलझनों का होगा समाधान! उत्तर प्रदेश में 'टेली-मानस' कैसे बना वरदान?
उत्तर प्रदेश सरकार मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ कर रही है. राज्य में टेली-मानस हेल्पलाइन, 'अस्मी' चैटबॉट और 'परीक्षा हेल्पलाइन 2026' जैसी पहलें शुरू की गई हैं.

शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ अब मानसिक स्वास्थ्य उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य नीतियों के केंद्र में आ गया है. उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने और इसे जन-जन तक पहुंचाने के लिए कई ऐतिहासिक कदम उठाए हैं. 'विकसित यूपी @2047' के रोडमैप के तहत योगी सरकार ने राज्य के दूर-दराज के गांवों से लेकर महानगरों तक मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं का जाल बिछाने की नई पहल शुरू की है.
टेली-मानस (Tele-MANAS) का विस्तार और 'अस्मी' चैटबॉट
उत्तर प्रदेश में टेली-मानस हेल्पलाइन (14416) एक वरदान साबित हो रही है. हाल ही में राज्य ने इसमें वीडियो कंसल्टेशन की सुविधा भी जोड़ दी है. इसके अलावा, 'अस्मी' (Asmi) नामक एआई (AI) चैटबॉट को पेश किया गया है, जो युवाओं और छात्रों को उनकी स्थानीय भाषा में तुरंत परामर्श और प्राथमिक सहायता प्रदान करता है. रिपोर्टों के अनुसार, उत्तर प्रदेश उन राज्यों में अग्रणी है जहां इस हेल्पलाइन पर सबसे अधिक कॉल प्राप्त हुए हैं.
यूपी बोर्ड छात्रों के लिए 'परीक्षा हेल्पलाइन 2026'
जनवरी 2026 में, यूपी बोर्ड ने 50 लाख से अधिक परीक्षार्थियों के लिए एक विशेष मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन और काउंसलिंग सेल सक्रिय किया है. प्रयागराज मुख्यालय के साथ-साथ मेरठ, बरेली, वाराणसी और गोरखपुर के क्षेत्रीय केंद्रों पर विशेषज्ञ काउंसलर नियुक्त किए गए हैं, जो छात्रों के परीक्षा संबंधी तनाव (Exam Stress) और चिंता को दूर करने का काम कर रहे हैं.
आयुष्मान आरोग्य मंदिर: गांव-गांव में काउंसलिंग
राज्य के 25,000 से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिरों (स्वास्थ्य उप-केंद्रों) में अब मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को अनिवार्य पैकेज के रूप में जोड़ा गया है. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) में 10 बिस्तरों वाले इन-पेशेंट वार्ड की सुविधा और डॉक्टरों को मानसिक स्वास्थ्य की पहचान के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि ग्रामीण आबादी को शहरों की ओर न भागना पड़े.
शिक्षण संस्थानों में 'हैप्पीनेस ज़ोन'
प्रदेश के विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों में 'मेंटल वेलनेस सेंटर' और 'हैप्पीनेस ज़ोन' बनाने की नई पहल शुरू की गई है. इसके तहत मास्टर ट्रेनर्स शिक्षकों को प्रशिक्षित कर रहे हैं ताकि वे छात्रों में डिप्रेशन या एंग्जायटी के शुरुआती लक्षणों को पहचान सकें.
दिव्यांगजन और मानसिक पुनर्वास
राज्य सरकार ने मानसिक मंदता और मानसिक बीमारियों से जूझ रहे लोगों के पुनर्वास के लिए अनुदान योजनाओं को और सरल बनाया है. स्वैच्छिक संस्थाओं के माध्यम से अब 'डे केयर सेंटर्स' और कौशल विकास केंद्रों को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि मानसिक रूप से स्वस्थ हो रहे व्यक्तियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके.
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