महोबा: BJP जिलाध्यक्ष और दीपाली तिवारी के बीच हुआ समझौता, 3 बार बयान बदलने के बाद थमा सियासी घमासान
Mahoba News In Hindi: जिलाध्यक्ष मोहनलाल कुशवाहा पर उनकी ही पार्टी की पूर्व जिला मंत्री दीपाली तिवारी द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद उपजा विवाद, प्रदेश स्तरीय जांच समिति के हस्तक्षेप के बाद सुलझा.

उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में भारतीय जनता पार्टी के भीतर पिछले कई दिनों से चल रहे आरोप प्रत्यारोप और विश्व का आखिरकार अंत हो गया है. जिलाध्यक्ष मोहनलाल कुशवाहा पर उनकी ही पार्टी की पूर्व जिला मंत्री दीपाली तिवारी द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद उपजा विवाद, प्रदेश स्तरीय जांच समिति के हस्तक्षेप के बाद सुलझ गया है.
दिलचस्प बात यह है कि तीन बार अपना रुख बदलने वाली दीपाली तिवारी ने अब स्पष्ट कर दिया है कि उनके और जिलाध्यक्ष के बीच कोई मतभेद नहीं है और जो कुछ भी हुआ वह भ्रम के कारण था. इसके बाद अब सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर जो सब हुआ वो क्या था ?
दीपाली तिवारी ने लगाया था आरोप
आपको बता दें कि मामले की जिला अध्यक्ष मोहनलाल कुशवाहा पर उन्हीं की पार्टी की पूर्व जिला मंत्री दीपाली तिवारी ने पद के बदले हमबिस्तर होने की डिमांड का आरोप लगाया था, जिसकी गंभीरता को देखते हुए प्रदेश नेतृत्व ने भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष कमलावती सिंह और क्षेत्रीय महामंत्री संत विलास शिवहरे को जांच के लिए महोबा भेजा था. दो दिनों तक चली लंबी पूछताछ और बैठकों के दौर के बाद समिति दोनों पक्षों के बीच सुलह कराने में कामयाब रही. हालांकि, पहले दिन दीपाली तिवारी ने समझौते के बाद फिर से यू-टर्न लेकर पुलिसिया कार्रवाई की बात कही थी, लेकिन आज दूसरे दौर की वार्ता के बाद उन्होंने आधिकारिक रूप से विवाद खत्म होने की घोषणा की.
दीपाली ने खुद को मानसिक रूप से व्यथित बताया
बार-बार बयान बदलने को लेकर उठे सवालों पर दीपाली तिवारी ने कहा कि वह मानसिक रूप से व्यथित थीं, इसलिए उन्होंने अलग-अलग बातें कहीं. उन्होंने साफ किया कि मुझ पर कोई दबाव नहीं है. जो आपसी मतभेद थे, वे अब मिट गए हैं. कुछ लोगों द्वारा जो भ्रम फैलाया गया था, मैं उससे परेशान थी। अब मुझे जिलाध्यक्ष जी से कोई शिकवा-शिकायत नहीं है. पार्टी सर्वोपरि है और हम सब मिलकर काम करेंगे.
जिलाध्यक्ष ने भी गिले-शिकवे भुलाए
वहीं जिलाध्यक्ष मोहनलाल कुशवाहा ने भी नरम रुख अपनाते हुए कहा कि कई लोगों ने उन्हें और बहन दीपाली तिवारी को भ्रमित किया था, जिससे मतभेद पैदा हुए. उन्होंने कहा कि विवाद के दौरान जो कुछ भी कहा गया, उसका उन्हें खेद है और दीपाली उनकी छोटी बहन जैसी हैं. हालांकि, उन्होंने उन बाहरी या भीतरी तत्वों का नाम लेने से इनकार कर दिया जिन्होंने इस आग में घी डालने का काम किया था.
दूसरों के बहकावे से हुई घटना
जांच समिति की प्रमुख प्रदेश उपाध्यक्ष कमलावती सिंह ने मीडिया को बताया कि दोनों पक्षों से बात करने पर निष्कर्ष निकला कि यह सब दूसरों के बहकावे और गलतफहमी का नतीजा था. उन्होंने स्पष्ट किया कि दीपाली तिवारी पार्टी का हिस्सा बनी रहेंगी और महोबा में भाजपा फिर से सशक्त होकर उभरेगी.
बहरहाल, इस समझौते के साथ ही जिले की सियासत में आया भूचाल तो शांत हो गया है, लेकिन तीन बार बयान बदलने और गंभीर आरोपों के बाद हुए इस हृदय परिवर्तन ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है.
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Source: IOCL























