खबर का असर: महोबा में इंजेक्शन से बिगड़ी थी आठ बच्चों की हालात, अब अस्पताल ने तोड़ी चुप्पी
Mahoba News: उत्तर प्रदेश के महोबा जनपद में बीते दिन जिला अस्पताल के बच्चों के वार्ड नंबर तीन में इंजेक्शन लगाने की वजह से आठ बच्चों की तबियत बिगड़ गई थी जिस पर अब सीएमएस डॉक्टर ने चुप्पी तोड़ी है.

Mahoba News: महोबा जिला अस्पताल में एबीपी न्यूज़ की खबर का असर हुआ है. बीते रोज बच्चा वार्ड तीन में इंजेक्शन लगने के बाद आठ बच्चों की हालत बिगड़ने के मामले में अब अस्पताल प्रशासन ने चुप्पी तोड़ दी है. अस्पताल प्रशासन की तरफ से सीएमएस डॉक्टर ने मीडिया से बातचीत की है.
सीएमएस डॉक्टर पवन अग्रवाल ने मीडिया से बातचीत में स्वीकार किया है कि यह गंभीर चूक अस्पताल में तैनात स्वास्थ्य कर्मियों की लापरवाही के चलते हुई है. उन्होंने पूरे घटनाक्रम की गंभीरता को समझते हुए बच्चा वार्ड और इमरजेंसी वार्ड का निरीक्षण किया, जिसमें कई अहम खामियां सामने आईं.
ये था पूरा मामला
दरअसल, सोमवार रात बच्चा वार्ड तीन में भर्ती आठ बच्चों को जब इंजेक्शन लगाए गए तो उनकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी. सभी बच्चों को तेज बुखार, कंपकंपी और उल्टी की शिकायतें हुईं, जिससे अस्पताल में मौजूद उनके परिजन घबरा गए और वार्ड में अफरा-तफरी मच गई. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए तत्काल सभी डॉक्टरों और स्टाफ को बुलाया गया.
सीएमएस द्वारा जब आज मामले को लेकर निरीक्षण किया गया तो सामने आया कि जिन बच्चों की तबीयत बिगड़ी, उन्हें Ceftrixone 1Gm इंजेक्शन लगाया गया था. पूछताछ में पता चला कि यह इंजेक्शन स्टाफ द्वारा पहले से सिरिंज में भरकर रखा गया था, जिसके कारण दवा में रिएक्शन हुआ और बच्चों की हालत बिगड़ी.
पहले से भरे हुए थे इंजेक्शन
निरीक्षण में यह भी पाया गया कि अभी भी इमरजेंसी और बच्चा वार्ड में कुछ इंजेक्शन पहले से भरे हुए रखे गए थे, जिस पर सीएमएस ने कड़ी नाराजगी जताई. सीएमएस डॉ. पवन अग्रवाल ने निर्देश दिए हैं कि अब किसी भी हालत में कोई इंजेक्शन पहले से भरकर नहीं रखा जाएगा. इस घटना के लिए बच्चा वार्ड में तैनात स्टाफ नर्स संगीता सोनी की भूमिका की भी जांच की जा रही है, और उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है.
डॉ. अग्रवाल ने कहा कि इस तरह की लापरवाही भविष्य में बर्दाश्त नहीं की जाएगी. उन्होंने स्टाफ को चेतावनी देते हुए कहा कि मरीजों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. अस्पताल प्रशासन अब इस मामले की जांच कर रहा है और ज़रूरत पड़ने पर दोषियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.
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