महाकुंभ: ब्रह्मकुमारी का पंडाल है बेहद खास, मन मोहती हैं चैतन्य देवियों की झांकियां, हाईटेक अंदाज में है तैयार
ब्रह्मकुमारी संस्था के पंडाल में झांकियां इतनी मन मोह लेने वाली हैं, एक पल के लिए भी नजर नहीं हटती. पंडाल को देखने के लिए रोजाना हजारों की संख्या में श्रद्धालु और प्रयागराज के आम लोग भी पहुंच रहे हैं.

Mahakumbh 2025: महाकुंभ में वैसे तो सात हजार से ज्यादा संत महात्माओं और संस्थाओं के भव्य पंडाल लगे हुए हैं, लेकिन इनमें से दुनिया भर में मेडिटेशन के सेंटर चलाने वाली माउंट आबू की ब्रह्माकुमारी संस्था का पंडाल बेहद खास है. इस पंडाल का सबसे बड़ा आकर्षण चैतन्य देवियों की झांकी है. इस झांकी में देवी के नौ स्वरूपों को प्रदर्शित करने में किसी पुतले का इस्तेमाल नहीं किया जाता, बल्कि कुंवारी कन्याएं साढ़े तीन घंटे तक चैतन्य अवस्था में बिना हिले डुले इस तरह विराजमान रहती हैं कि किसी को पल भर के लिए भी यह एहसास नहीं हो सकता कि यहां पुतले नहीं बल्कि जीवंत कन्याएं चैतन्य स्वरूप में हैं.
इसके अलावा यहां मनुष्य की तमाम सामाजिक बुराइयों और इनसे दूर होने के उपायों के साथ ही रामराज्य आने की परिकल्पना से जुड़ी हुई झाकियों की पूरी सीरीज भी प्रदर्शित की गई है. यह झांकियां इतनी मन मोह लेने वाली हैं कि यहां पहुंचने के बाद एक पल के लिए भी नजर नहीं हटती. इस पंडाल को देखने के लिए रोजाना हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं के साथ ही प्रयागराज के आम लोग भी पहुंच रहे हैं.

ऐसे सजा है पंडाल
ब्रह्मकुमारी का यह पंडाल महाकुंभ क्षेत्र के सेक्टर सात में लगाया गया है. पंडाल में दाखिल होते ही इसके बेहद भव्य और अनूठे होने का एहसास होने लगता है. पंडाल के मुख्य द्वार पर दाहिनी तरफ सबसे आगे भारत माता की झांकी सजाई गई है. यहां भारत माता का एक बड़ा सा चित्र है. देश का नक्शा है और उस जगह पर शान से लहराता हुआ भारत का राष्ट्रीय ध्वज है. इसके ठीक बगल एक होलोग्राम रूम है. इस डिजिटल होलोग्राम को देखकर लोग खुद को नियंत्रित कर सकते हैं. इसके बाहर तमाम पक्षियों और जानवरों के साथ ही कई अन्य ऐसी आकृतियां भी हाईटेक अंदाज में तैयार की गई हैं जो एक्शन में दिखती हुई नजर आती हैं.
मुख्य द्वार के ठीक सामने बड़े से पंडाल में चैतन्य देवियों की झांकियां प्रदर्शित की गई है. रोजाना शाम साढ़े पांच से रात नौ बजे तक यहां लाइट एंड साउंड के शो का आयोजन किया जाता है. इस शो के जरिए महिषासुर मर्दिनी का प्रदर्शन किया जाता है. साथ ही पहाड़नुमा एक मॉडल पर देवी के सभी नौ स्वरूपों को प्रदर्शित किया जाता है. नौ देवियां अलग-अलग स्वरूपों में दर्शन देती हैं. देवियों के स्वरूप को दिखाने के लिए किसी पुतले का इस्तेमाल नहीं किया जाता, बल्कि ब्रह्माकुमारी संस्था से जुड़ी हुई कन्याओं को साक्षात रूप में यहां विराजमान किया जाता है.

झांकी दिखाने के लिए लगी बड़ी स्क्रीन
यह इतनी तन्मयता के साथ यहां विराजमान होती हैं कि एक पल के लिए भी हिलती डुलती नहीं है. यानी अगर किसी को यह ना बताया जाए कि यहां पुतले नहीं, बल्कि जीती जागती कन्याएं हैं तो कोई ना तो यकीन कर पाएगा और ना ही इस बारे में कल्पना कर सकेगा. चैतन्य देवियों की इस झांकी को दिखाने के लिए यहां एक बड़ी सी स्क्रीन भी लगाई गई है. इस शो को देखने के लिए रोजाना बड़ी संख्या में लोग आते हैं. ब्रह्माकुमारी संस्था की मीडिया कोऑर्डिनेटर शुभांगी के मुताबिक चैतन्य देवियां साढ़े तीन घंटे तक मेडिटेशन के नियमित अभ्यास की वजह से ही एकाग्र होकर बैठ पाती हैं.
चैतन्य देवियों की झांकियां जहां धर्म - अध्यात्म और एकाग्रता का संदेश देती हैं तो वही यहां झांकियां के जरिए ही बड़ा सामाजिक संदेश भी देने की कोशिश की गई है. इसके तहत पहले पार्ट में एक जंगल को दिखाया गया है. जंगल में दो दर्जन से ज्यादा झांकियां हैं. इसके जरिए यह दिखाने की कोशिश की गई है कि आज का इंसान सिर्फ अपने लिए जीवन जी रहा है. वह अपने फायदे के लिए दूसरे इंसान को मारने में भी कतई नहीं हिचकता. उसके अंदर तमाम बुराइयां आ गई है और वह अपनी जिम्मेदारी को भूल चुका है. जंगल वाली यह झांकियां मन मोह लेने वाली हैं.
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झांकियां बेहद कलरफुल और आकर्षक
दूसरे पार्ट में यह दिखाया गया है कि हम किस तरह से बुराइयों से दूर हो सकते हैं और किस तरह हमें आदर्श इंसान बनकर अपनी जिम्मेदारी को निभाना चाहिए. तीसरे पार्ट में यह दिखाने की कोशिश की गई है कि अगर हमने मनुष्य धर्म को निभाया तो फिर से रामराज्य स्थापित हो सकता है. हमारा देश स्वर्णिम भारत बन सकता है और हमारा समाज स्वर्ग सरीखा हो सकता है. दूसरे और तीसरे पार्ट को भी एक-एक दर्जन झांकियां के जरिए बेहद खूबसूरती के साथ दिखाया गया है. यह झांकियां बेहद कलरफुल और आकर्षक हैं.
झांकियों के बाद उन्नत कृषि पर प्रदर्शनी लगाई गई है. सामने के एक बड़े से पंडाल में ब्रह्मकुमारी के पूरे सफर को दिखाते हुए प्रदर्शनी लगाई गई है तो साथ ही यहां पर माइंड स्पा रूम भी है. यानी जब आप दिमागी तौर पर बेहद परेशान हो जाएं तो माइंड स्पा रूम से खुद को तनाव मुक्त कर सकते हैं. यहां तनाव मापने का हाईटेक मीटर भी लगाया गया है. इसके साथ ही समस्याओं और उनके समाधान के बारे में भी अलग-अलग बॉक्स लगाए गए हैं तो साथ ही बच्चों के लिए गेमिंग जोन है. इस गेमिंग जोन के जरिए बच्चों में नैतिक मूल्य और आदर्श स्थापित करने की कोशिश की गई है. पंडाल के इस सेक्टर को ज्ञान मंडपम का नाम दिया गया है.
ब्रह्माकुमारी संस्था की महाकुंभ प्रभारी दीदी मनोरमा और मीडिया कोऑर्डिनेटर शुभांगी का कहना है कि मेडिटेशन के जरिए जीवन में किस तरह से बुराइयों को त्याग कर अच्छाई के रास्ते पर चला जा सकता है. खुद को बेहतर इंसान बनाया जा सकता है. समाज और देश को मजबूत करने में योगदान दिया जा सकता है, यह सब ब्रह्मकुमारी के पंडाल के जरिए संदेश देने की कोशिश की गई है. बहरहाल इस पंडाल को देखने के लिए रोजाना हजारों की संख्या में लोग आ रहे हैं. यहां पहुंचने के बाद लोग घंटों वक्त बिताते हैं और यहां की झांकियों और संदेश की जमकर तारीफ भी करते हैं.
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