लखनऊ से कानपुर की घट जाएगी दूरी! समय लगेगा कम, सिर्फ 45 मिनट में पूरा होगा सफर
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से कानपुर तक अब सिर्फ 45 मिनट में सफर हो जाएगा. इस संदर्भ में परियोजना को एनओसी मिल गई है.

Lucknow Kanpur Rapid Rail: लखनऊ और कानपुर के बीच चलने वाली रैपिड रेल परियोजना को आखिरकार हरी झंडी मिल गई है. लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने इस योजना को बुधवार को एनओसी (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) दे दी है. इससे पहले कानपुर और उन्नाव विकास प्राधिकरण इस परियोजना को मंजूरी दे चुके हैं. अब उम्मीद है कि आने वाले कुछ वर्षों में लखनऊ से कानपुर का सफर बेहद आसान और आरामदायक हो जाएगा.
यह रैपिड रेल ट्रेन 160 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से दौड़ेगी. अमौसी एयरपोर्ट से लेकर कानपुर के गंगा बैराज तक यह ट्रेन चलेगी. इस परियोजना को ‘नमो कॉरिडोर’ के नाम से विकसित किया जाएगा. खास बात यह है कि इस ट्रेन की रफ्तार पर कोहरा, बारिश या मौसम का कोई असर नहीं पड़ेगा. अभी सड़क मार्ग से लखनऊ से कानपुर पहुंचने में करीब डेढ़ से दो घंटे का समय लगता है. लेकिन रैपिड रेल इस सफर को आधे से भी कम समय में पूरा कर देगी.
होंगे ये स्टेशन?
इस रूट पर जो स्टेशन होंगे, वे अमौसी एयरपोर्ट, बनी, उन्नाव, जैतीपुर, अजगैन, मगरवारा होते हुए कानपुर के गंगा बैराज तक जाएंगे. बाद में इसे लखनऊ और कानपुर मेट्रो स्टेशनों से भी जोड़ने की योजना है. इस परियोजना को सड़क और रेलवे मार्ग के साथ मिलाकर तैयार किया जाएगा. इससे सड़क यातायात का दबाव और वायु प्रदूषण कम होगा. व्यापार, रोजगार और शिक्षा के क्षेत्र में भी इस योजना से बड़ी मदद मिलेगी.
गौरतलब है कि इस परियोजना की रूपरेखा नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (एनसीआरटीसी) ने वर्ष 2015 में तैयार की थी. इसके बाद वर्ष 2021 में तत्कालीन प्रमुख सचिव दीपक कुमार ने इस योजना का ड्राफ्ट तैयार कराया था. कोविड-19 महामारी के कारण इस पर काम धीमा पड़ गया था. लेकिन अब एक बार फिर से इस पर तेजी से काम शुरू होने की उम्मीद है.
एलडीए के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने कहा कि एनओसी इस शर्त पर दी गई है कि मास्टर प्लान का उल्लंघन नहीं होना चाहिए. प्रोजेक्ट को पांच साल के भीतर पूरा करने की योजना है.
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लखनऊ और कानपुर के बीच की दूरी लगभग 80 किलोमीटर है. ये दोनों शहर प्रदेश के सबसे बड़े औद्योगिक और व्यावसायिक केंद्रों में गिने जाते हैं. लाखों लोग हर दिन इन दोनों शहरों के बीच सफर करते हैं. ऐसे में यह रैपिड रेल प्रोजेक्ट बेहद फायदेमंद साबित होगा. इससे न सिर्फ समय बचेगा बल्कि यात्रा भी सुरक्षित और आरामदायक होगी.
सरकार की योजना है कि आने वाले वर्षों में इस रैपिड रेल नेटवर्क को और विस्तार दिया जाए. जैसे मेरठ-दिल्ली रैपिड रेल कॉरिडोर देशभर में एक आदर्श मॉडल बन रहा है, वैसे ही लखनऊ-कानपुर कॉरिडोर भी प्रदेश के विकास में नई रफ्तार भर देगा. अब उम्मीद की जा रही है कि जल्दी ही निर्माण कार्य शुरू होगा और लोग इस नई सुविधा का लाभ उठा सकेंगे.
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