बीजेपी नेता धीरेन्द्र प्रताप सिंह हत्याकांड में नया खुलासा, प्लॉट-रुपयों का लालच आया सामने
धीरेन्द्र प्रताप सिंह उन्नाव के बांगरमऊ में जमीन पर कथित अवैध कब्जे के खिलाफ आवाज उठा रहे थे. उन्होंने नवंबर 2024 में मुख्यमंत्री को शिकायती पत्र भेजकर भू-माफियाओं और तहसील प्रशासन की शिकायत की थी.

उत्तर प्रदेश के लखनऊ में महाराणा प्रताप चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष और भाजपा नेता धीरेन्द्र प्रताप सिंह की हत्या के मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, नए और चौंकाने वाले एंगल सामने आ रहे हैं. हत्या की साजिश में शामिल आरोपियों को प्लॉट, दुकान और लाखों रुपये देने का लालच दिए जाने की बात सामने आई है. पुलिस अब इस एंगल की भी जांच कर रही है.
धीरेन्द्र प्रताप सिंह उन्नाव के बांगरमऊ में जमीन पर कथित अवैध कब्जे के खिलाफ आवाज उठा रहे थे. उन्होंने नवंबर 2024 में मुख्यमंत्री को शिकायती पत्र भेजकर भू-माफियाओं और तहसील प्रशासन की कथित मिलीभगत की शिकायत की थी. इस पत्र में कई अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए थे.
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CM को शिकायत के बाद बढ़ी थी दुश्मनी?
धीरेन्द्र प्रताप सिंह ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि बांगरमऊ तहसील क्षेत्र में तालाब और ग्राम समाज की जमीन पर कब्जे की कोशिश हो रही है. उन्होंने गाटा संख्या 488 और 487 की जमीन का जिक्र करते हुए जांच और जमीन को कब्जामुक्त कराने की मांग की थी.
शिकायत में तत्कालीन एसडीएम, तहसीलदार, सब-रजिस्ट्रार और अन्य कर्मचारियों की भूमिका की जांच की मांग भी की गई थी. उन्होंने आरोप लगाया था कि कथित भू-माफियाओं को तहसील प्रशासन का संरक्षण मिल रहा है.
शिकायत के बाद धीरेन्द्र प्रताप सिंह की कुछ लोगों से दुश्मनी बढ़ने की बात भी सामने आई है. अब पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या इसी रंजिश ने हत्या की साजिश को जन्म दिया?
हत्या के लिए दिया गया प्लॉट-दुकान और लाखों का लालच
जांच में सबसे अहम बात यह सामने आ रही है कि हत्या में शामिल आरोपियों को कथित तौर पर प्लॉट, दुकान और लाखों रुपये देने का लालच दिया गया था. आरोपियों को यह लालच किसने दिया, इसके पीछे कौन लोग थे और हत्या की सुपारी या साजिश में कितने लोग शामिल थे. पुलिस इन सवालों के जवाब तलाश रही है.
चलती गाड़ी में बेहोश किया, फिर मारी गोली
पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक धीरेन्द्र प्रताप सिंह को लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी इलाके से अगवा किया गया था. आरोप है कि चलती गाड़ी में उन्हें रूमाल के जरिए कोई नशीला पदार्थ सुंघाकर बेहोश किया गया. इसके बाद उन्हें गोली मार दी गई.
करीब तीन दिन बाद रविवार शाम उनका शव दुबग्गा इलाके के सराय प्रेमराज गांव के पास किसान पथ के नजदीक शारदा सहायक नहर से बरामद हुआ था. उनके सिर के पिछले हिस्से और दाहिने सीने में गोली के निशान मिले थे.
पुरानी शिकायत भी जांच के केंद्र में
हत्या के बाद नवंबर 2024 में मुख्यमंत्री को भेजा गया धीरेन्द्र प्रताप सिंह का शिकायती पत्र भी जांच का अहम हिस्सा बन गया है. पत्र में उन्होंने बांगरमऊ तहसील की जमीनों पर कथित कब्जे, तालाब पाटने और प्लॉटिंग की शिकायत की थी. उन्होंने पहले 13 नवंबर 2024 को एसडीएम बांगरमऊ और फिर 16 नवंबर को जिलाधिकारी उन्नाव को मामले की जानकारी देने का दावा किया था.
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