बीते दो सालों से दुधवा टाइगर रिजर्व में नहीं बढ़ाया गया शुल्क, फिर भी बढ़ी कमाई, जानें कैसे
UP News: लखीमपुर स्थित दुधवा टाइगर रिजर्व में बीते दो वर्षों में सरकार ने यहां पर्यटन शुल्क में कोई बढ़ोतरी नहीं की है, लेकिन फिर भी आय में जबरदस्त वृद्धि हुई है.

Lakhimpur News: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के प्रयासों से प्रदेश में पर्यटन का चेहरा तेजी से बदला है. सुरक्षा, स्वच्छता और सुविधाओं में सुधार के चलते प्रदेश के जंगल और धार्मिक स्थल देश-विदेश के पर्यटकों को खूब लुभा रहे हैं. खासतौर पर लखीमपुर खीरी स्थित दुधवा टाइगर रिजर्व ईको-पर्यटन के क्षेत्र में बड़ी पहचान बन चुका है.
बीते दो वर्षों में सरकार ने यहां पर्यटन शुल्क में कोई बढ़ोतरी नहीं की है, लेकिन फिर भी आय में जबरदस्त वृद्धि हुई है. इसका कारण है कि लगातार बढ़ती सुविधाएं और मजबूत कानून-व्यवस्था. दुधवा में सफारी, साफ-सफाई, रुकने की जगह, वॉशरूम और गाइड सेवाओं को बेहतर किया गया है, जिससे पर्यटकों का भरोसा बढ़ा है.
2024-25 की शुरुआत में ही तोड़ा पिछले साल का रिकॉर्ड
नवंबर 2024 से शुरू हुए नए पर्यटन सत्र में अभी दो महीने बाकी हैं, लेकिन सिर्फ 6 महीने में ही दुधवा टाइगर रिजर्व से सरकार को 1.48 करोड़ रुपये से ज्यादा की आय हो चुकी है. कुल 44,644 पर्यटक, जिनमें विदेशी सैलानी भी शामिल हैं, यहां प्राकृतिक खूबसूरती और बाघों की झलक के लिए पहुंचे.
अधिकारियों के मुताबिक, जून तक यह आंकड़ा डेढ़ करोड़ को पार कर सकता है. इस साल शुरुआत से ही रिकॉर्ड तोड़ पर्यटक आ रहे हैं. नवंबर 2024 में ही 5,462 लोग पहुंचे और ₹23 लाख की आय हुई. दिसंबर में यह संख्या 9,606 तक पहुंच गई.
बीते सालों की तुलना में आय में लगातार हुआ इजाफा
2020-21: 20,781 पर्यटक, ₹35 लाख से ज्यादा की आय (कोविड के चलते सीमित संचालन)
2021-22: 23,188 पर्यटक, ₹54 लाख की आय
2022-23: 28,347 पर्यटक, ₹1.45 करोड़ की आय
2023-24: 51,195 पर्यटक, ₹1.39 करोड़ की आय
पर्यटकों के लिए ‘अतिथि देवो भवः’ की भावना से सेवा
दुधवा टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक डॉ. रंगा राजू टी ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और वन मंत्री के निर्देशों पर हर साल पर्यटकों की सुविधाओं में इजाफा किया जा रहा है. पर्यटकों को सुरक्षित, साफ और यादगार अनुभव देने के लिए विभाग लगातार मेहनत कर रहा है.
दुधवा क्यों है खास?
दुधवा टाइगर रिजर्व भारत के प्रमुख टाइगर रिज़र्व में से एक है, जो लखीमपुर खीरी और बहराइच जिलों में फैला है. यह क्षेत्र बाघ, हाथी, दलदली हिरण (बारहसिंगा) और कई विदेशी पक्षियों के लिए प्रसिद्ध है. नवंबर से जून तक का समय यहां पर्यटन के लिए उपयुक्त होता है.
उत्तर प्रदेश सरकार का यह मॉडल बताता है कि बिना शुल्क बढ़ाए भी कैसे पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सकता है. बेहतर सुविधाएं, ईमानदार प्रयास और पर्यटकों के लिए सुलभ वातावरण ही सफलता की कुंजी बना है. दुधवा का यह उदाहरण अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है.
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Source: IOCL






















