केदारनाथ यात्रा मार्ग पर एक्वाइन इन्फ्लूएंजा वायरस का खतरा, यूपी से आने वाले घोड़े-खच्चर पूरी तरह बैन
Kedarnath Dham Yatra: उत्तर प्रदेश से आने वाले सभी घोड़ा-खच्चरों पर फिलहाल पूर्ण प्रतिबंध लागू कर दिया गया है. एक्वाइन इन्फ्लूएंजा वायरस के खतरे को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है.

Char Dham Yatra 2025: केदारनाथ यात्रा मार्ग पर एक्वाइन इन्फ्लूएंजा वायरस की आशंका के चलते सरकार ने अस्वस्थ घोड़ा-खच्चरों की आवाजाही पर पूरी तरह से रोक लगा दी है. पशुपालन विभाग के सचिव डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने स्पष्ट किया है कि संक्रमित या कमजोर हालत में पाए गए किसी भी पशु को यात्रा मार्ग पर चलने की अनुमति नहीं दी जाएगी. इसके साथ ही उत्तर प्रदेश से आने वाले सभी घोड़ा-खच्चरों पर फिलहाल पूर्ण प्रतिबंध लागू कर दिया गया है.
डॉ. पुरुषोत्तम ने सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में जानकारी देते हुए बताया कि राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान संस्थान द्वारा 26 मार्च को रुद्रप्रयाग जिले के दो गांवों में की गई सैंपलिंग के दौरान एक्वाइन इन्फ्लूएंजा वायरस से संक्रमित कुछ घोड़े मिलने की सूचना मिली थी. इसके बाद राज्यभर में पशुपालन विभाग द्वारा सघन सैंपलिंग अभियान चलाया गया. अब तक 16 हजार से अधिक घोड़े-खच्चरों की जांच की जा चुकी है, जिसमें 152 सैंपल प्रारंभिक स्तर पर पॉजिटिव पाए गए थे. हालांकि बाद में जब इन्हें आरटीपीसीआर जांच के लिए भेजा गया तो सभी रिपोर्ट निगेटिव आई.
2 दिन में 13 घोड़ा-खच्चरों की मौत
पशुपालन सचिव ने बताया कि यात्रा मार्ग पर केवल दो दिन में 13 घोड़ा-खच्चरों की मौत हुई है, जिनमें से आठ की मौत डायरिया और पांच की एक्यूट कोलिक बीमारी से हुई है. इन मामलों की विस्तृत जांच के लिए मृत पशुओं के सैंपल इंडियन वेटरनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (आईवीआरआई) बरेली भेजे गए हैं.
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने अब यात्रा मार्ग पर 22 से अधिक अनुभवी पशु चिकित्सकों की टीम तैनात कर दी है. इसके साथ ही एक मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, दो उप मुख्य अधिकारी, राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान संस्थान के दो वैज्ञानिक तथा पंतनगर विश्वविद्यालय से आए दो विशेषज्ञ चिकित्सक भी मार्ग पर निगरानी कर रहे हैं.
हर घोड़ा-खच्चर की हो रही जांच
स्वास्थ्य परीक्षण के तहत हर घोड़ा-खच्चर की जांच की जा रही है, जिन पशुओं में कोई भी बीमारी के लक्षण पाए जा रहे हैं, उन्हें तुरंत क्वारंटीन किया जा रहा है. पशुपालन विभाग ने 600 घोड़ा-खच्चरों के लिए विशेष क्वारंटीन सेंटर बनाए हैं. इसके अलावा यात्रा के विभिन्न पड़ावों पर भी क्वारंटीन की व्यवस्था की गई है, ताकि संक्रमण फैलने की कोई गुंजाइश न रहे.
डॉ. पुरुषोत्तम ने बताया कि उत्तर प्रदेश से हर साल दो से तीन हजार घोड़ा-खच्चर यात्रा मार्ग पर आते हैं, लेकिन इस बार एक्वाइन इन्फ्लूएंजा वायरस के खतरे को देखते हुए यूपी से आने वाले सभी घोड़ा-खच्चरों पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाया गया है. हालांकि यह वायरस जानवरों से इंसानों में नहीं फैलता, लेकिन पशुओं के बीच इसकी संक्रामकता काफी अधिक होती है.
स्थानीय लोगों ने भी इस रोक को आगे बढ़ाने की मांग की है ताकि यात्रा सुरक्षित और सुचारू रूप से जारी रह सके. सचिव ने आश्वासन दिया कि सरकार हर स्थिति पर नजर बनाए हुए है और जरूरत के अनुसार सभी एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं.
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Source: IOCL






















