Nicolas Maduro का भारत से पुराना नाता! सत्य साईं बाबा के भक्त कैसे बने वेनेजुएला के राष्ट्रपति?
वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को आज दुनिया एक विवादास्पद और सख्त शासक के रूप में जानती है, लेकिन सत्ता के शिखर तक पहुंचने से पहले उनका जीवन बेहद साधारण और संघर्षों से भरा रहा है... उनकी कहानी केवल राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें मेहनतकश जीवन, ट्रेड यूनियन आंदोलन और भारत के एक आध्यात्मिक गुरु से जुड़ा अनोखा विश्वास भी शामिल है... निकोलस मादुरो का जन्म 23 नवंबर 1962 को वेनेजुएला की राजधानी काराकस में एक साधारण परिवार में हुआ था... उनके पिता मजदूर संगठनों से जुड़े थे, जिससे सामाजिक असमानता और श्रमिक अधिकारों के मुद्दे मादुरो ने बचपन से ही करीब से देखे... आर्थिक परिस्थितियों के चलते वे उच्च शिक्षा पूरी नहीं कर पाए और युवावस्था में ही रोजगार की तलाश में निकल पड़े... इसी दौरान उन्होंने काराकस में बस ड्राइवर के रूप में काम करना शुरू किया... काराकस की भीड़भाड़ वाली सड़कों पर बस चलाते हुए मादुरो को आम लोगों की परेशानियों को बेहद करीब से समझने का मौका मिला... रोजमर्रा की जिंदगी की कठिनाइयां, महंगाई, बेरोजगारी और असमानता... ये सभी अनुभव बाद में उनकी राजनीतिक सोच की बुनियाद बने... बस ड्राइवर रहते हुए ही वो श्रमिक अधिकारों के लिए आवाज उठाने लगे और धीरे-धीरे ट्रेड यूनियन नेता के रूप में पहचान बनाने लगे.


























