'आंख खुली तो चारों तरफ भगदड़', ग्रेटर नोएडा बस हादसे की आपबीती
ग्रेटर नोएडा बस अग्निकांड में 9 जिंदगियां असमय काल के गाल में समा गईं. इस हृदय विदारक दुर्घटना जो यात्री बच गए, उन्होंने हादसे की खौफनाक दास्तान सुनाई है.

दिल्ली से महोबा के लिए रवाना हुई राज कल्पना ट्रेवल्स की एसी स्लीपर बस जब ग्रेटर नोएडा पहुंची. तब किसी ने सोचा भी नहीं था कि यह सफर काल बन जाएगा. देखते ही देखते बस में आग की लपटें उठने लगीं और पूरा केबिन धुएं के गुबार से भर गया. चीख-पुकार और अफरा-तफरी के बीच 9 जिंदगियां आग की भेंट चढ़ गईं. जो लोग जिंदा बचे, उनके दिलों में मौत का वो मंजर साफ तैर रहा है.
हादसे के बाद ग्रेटर नोएडा प्रशासन की पहल पर मिनी बस संख्या UP 16RT 9064 के जरिए 15 यात्रियों को महोबा उनके घर पहुंचाया गया. लौटने वालों में मामना के अंकित राजपूत, हिलुआ के प्रवेश कुमार, लाडपुर के गोकुल, मानव द्विवेदी, पनवाड़ी के पुष्पेंद्र, सुगिरा के सुनील व विकास और कुलपहाड़ के मुकेश गोस्वामी शामिल हैं.
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राममूर्ति ने सुनाई आपबीती
हादसे की आपबीती सुनाते हुए राममूर्ति ने बताया कि परी चौक से बस में बैठे अभी आधा घंटा ही हुआ था कि अचानक चालक ने दरवाजा खटखटाकर बाहर निकलने को कहा. बाहर धुएं का गुबार देखकर उन्होंने तुरंत अपने बच्चों को संभाला और खिड़की से कूदकर जान बचाई. उनका कहना है कि जान तो बच गई, लेकिन बैग में रखे 30 हजार रुपये नगद और महंगा मोबाइल जलकर खाक हो गया.
'आंख खुली तो चारों तरफ मची थी भगदड़'
महोबा में बंसल कंपनी में काम करने वाले बिहार के रहने वाले विश्वामित्र यादव ने बताया कि जब आग लगी तब वे सो रहे थे. लोगों के शोर मचाने पर आंख खुली तो चारों तरफ भगदड़ मची थी. लोग एक-दूसरे के ऊपर गिर रहे थे. विश्वामित्र के मुताबिक, बस में आग बुझाने का कोई सुरक्षा उपकरण मौजूद नहीं था.
ऐसा लगा भगवान ने हाथ खींचकर बाहर निकाला
यात्री चंद्रभान ने इसे ईश्वर का चमत्कार बताते हुए कहा कि ऐसा लग रहा था मानो भगवान ने ही उन्हें खींचकर बाहर निकाला हो. खौफ के इस मंजर के बीच यात्रियों ने डीएम और एसडीएम के सहयोग की सराहना की. प्रशासन ने न सिर्फ भोजन-पानी की व्यवस्था की, बल्कि रास्ते के खर्च के लिए प्रति यात्री एक-एक हज़ार रुपये देकर उन्हें सुरक्षित घर तक पहुंचाया.
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