गाजीपुर में पुलिस की कथित पिटाई से BJP कार्यकर्ता की मौत के मामले में क्या-क्या हुआ? जानें- यहां
Ghazipur News: पीड़ित पक्ष लखनऊ में सीएम योगी से मुलाकत करेंगे. जबकि एडीजी जोन पीयूष मोर्डिया ने लोगों से धैर्य की अपील की है उन्होंने कहा कि इस घटना की जांच की जा रही है.

यूपी के गाजीपुर में दिव्यांग बीजेपी कार्यकर्ता सियाराम उपाध्याय की पुलिस की पिटाई से मौत का मामला ठंडा पड़ा नजर नहीं आ रहा. भाजपा कार्यकर्ताओ ने इस मामले में सीएम योगी से मुलाक़ात कर सख्त कार्रवाई की मांग है. जबकि परिजनों और ग्रामीणों बीजेपी नेताओं से नाराजगी जताई है.
इस मामले में आज पीड़ित पक्ष लखनऊ में सीएम योगी से मुलाकत करेंगे. जबकि एडीजी जोन पीयूष मोर्डिया ने लोगों से धैर्य की अपील की है उन्होंने कहा कि इस घटना की जांच की जा रही है. धर्म जाति के आधार पर वैमनस्यता न फैलाएं. हम परिजनों से मिलकर आये, दोषियों पर कार्रवाई होगी.
क्या है पूरा मामला ?
दरअसल गाजीपुर जिले के नोनहरा थाना क्षेत्र के गठिया गांव में 9 सितंबर को बिजली के खंभे लगाने के विरोध में ग्रामीणों और BJP कार्यकर्ताओं ने नोनहरा थाने पर धरना शुरू किया. आरोप था कि बिना पड़ोसी किसान की सहमति के खंभे लगाए जा रहे थे. धरने में करीब 40-50 लोग शामिल थे, जिनमें दिव्यांग BJP कार्यकर्ता सियाराम उपाध्याय उर्फ जोखू (निवासी रुकुंदीपुर) भी थे. रात करीब 1:30 बजे पुलिस ने थाने की लाइट बंद कर दी और अचानक लाठीचार्ज कर दिया.
ग्रामीणों का दावा है कि पुलिस ने दौड़ा-दौड़ा कर पिटाई की, जिसमें सियाराम समेत कई लोग घायल हो गए. सियाराम, जो दिव्यांग थे, भाग नहीं पाए और जमीन पर गिर पड़े, जहां उन्हें विशेष रूप से निशाना बनाया गया.
10 सितंबर: लाठीचार्ज वीडियो वायरल, सियाराम की हालत बिगड़ी
लाठीचार्ज का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें थाने में अंधेरे में पुलिस की बर्बरता दिखाई दे रही थी. घायल सियाराम को घर पहुंचाया गया, लेकिन उनकी हालत गंभीर बनी रही. परिजनों ने आरोप लगाया कि सिर, पीठ और शरीर पर गंभीर चोटें लगीं, जिससे पूरा शरीर काला पड़ गया. BJP कार्यकर्ताओं ने दोषी पुलिसकर्मियों पर हत्या का मुकदमा और मुआवजे की मांग की. इलाके में तनाव बढ़ गया, और ग्रामीणों ने थाने का घेराव किया.
11 सितंबर: सियाराम उपाध्याय की मौत, पुलिस पर बड़ा एक्शन
11 सितंबर को सुबह सियाराम उपाध्याय की मौत हो गई. मौत के बाद रुकुंदीपुर गांव में कोहराम मच गया. BJP जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश राय सांत्वना देने पहुंचे, लेकिन ग्रामीणों ने आक्रोश जताते हुए अफसरों को वापस भेज दिया.
एसपी ईरज राजा ने त्वरित कार्रवाई करते हुए नोनहरा थानाध्यक्ष सहित 6 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया. इसके अलावा 5 अन्य पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर किया गया. DM अविनाश कुमार ने मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए. परिजनों ने न्याय की गुहार लगाई, और BJP ने राज्य मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज की.
12-13 सितंबर: सियासी हलचल और जांच की शुरुआत
मौत के बाद BJP ने पूरे प्रकरण को लेकर सख्त रुख अपनाया. ग्रामीणों ने मुआवजे और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की. ADG वाराणसी ने पारदर्शी जांच का आश्वासन दिया.
14 सितंबर: CM योगी का सख्त निर्देश, SIT जांच का गठन
14 सितंबर को BJP जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश राय ने लखनऊ में CM योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की. करीब 30 मिनट की बैठक में पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी गई. CM ने सख्त रुख अपनाते हुए DGP राजीव कृष्ण को दूसरे जिले के SP स्तर के अधिकारी से SIT जांच कराने का आदेश दिया.
CM ने पीड़ित परिवार को न्याय का भरोसा दिलाया और कहा कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएग. मृतक के भाई ने पहले न्याय पर संदेह जताया, लेकिन बाद में CM पर भरोसा व्यक्त किया.
15 सितंबर: मेडिकल रिपोर्ट में हार्ट अटैक का दावा, BJP पर दबाव के आरोप
आज 15 सितंबर तक SIT जांच जारी है. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि सियाराम की मौत हार्ट अटैक से हुई.
मृतक के भाई ने कहा कि हार्ट अटैक से मौत हुई तो 10 लाख मुआवजा क्यों लें? उन्होंने BJP शीर्ष नेतृत्व पर मामले को रफा-दफा करने का दबाव बनाने का आरोप लगाया. गांव में BJP के खिलाफ रोष है, और कल BJP नेताओं को खरी-खोटी सुनाई गई. पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने पर आगे कार्रवाई होगी.
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Source: IOCL

























