गाजियाबाद में मरना मना है! हिंडन किनारे कॉलोनियां डूबीं, श्मशान घाट तक पहुंचा पानी
Ghaziabad News In HIndi: स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते हिंडन नदी की सफाई की जाती तो लाखों लोगों को इस दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ता. अंतिम संस्कार में दिक्कत हो रही है.

उत्तर प्रदेश में गाजियाबाद के हिंडन नदी किनारे बनी हुई कालोनियों में इन दिनों लोगों का जीवन दुश्वार हो चुका है. बारिश और नगर निगम की लापरवाही ने घर तो घर शमशान में भी घुटनों तक पानी भर दिया है. ज्यादातर गलियों में घुटनों तक पानी है लोग घरों के दरवाजे पर बैठे हैं और कहीं आ-जा नहीं सकते.
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते हिंडन नदी की सफाई की जाती तो लाखों लोगों को इस दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ता. फिलहाल लोग सरकारी आस से नाउम्मीद होकर खुद ही मिट्टी और बालू मंगवा कर बंध बना रहे हैं. ये हाल तब है जब पिछले 7 दिनों से बारिश की एक बूंद यहां नहीं गिरी है बारिश में कैसा मंजर होगा यह देखकर रूह कांप जाती है.
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स्कूल-दफ्तर जाने के लिए दुश्वारियां
गाजियाबाद के करहेड़ा इलाके में लाखों लोग रहते हैं, जो गाजियाबाद दिल्ली या नोएडा में नौकरी या अपना काम करते हैं. फिलहाल स्कूली बच्चों को स्कूल और लोगों को काम पर जाने के लिए जंग लड़ने पड़ रही है. क्योंकि घर के बाहर चौखट पर घुटनों तक पानी भरा हुआ है. ऐसा हाल एक दो इलाकों का नहीं बल्कि पूरी कॉलोनी का है लाखों लोग केवल सरकारी एजेंसियों कि उस लाचारी के चलते परेशान हैं जिसे अपना काम समय पर और ईमानदारी से नहीं किया. लोग बताते हैं कि हिंडन नदी में फंसी हुई जलकुंभी और गाद अगर समय से निकाल दी जाती तो स्थिति इतनी खराब नहीं होती.
अंतिम संस्कार नामुमकिन
इतना ही नहीं श्मशान घाट पानी में डूबा हुआ है जहां अंतिम संस्कार होना नामुमकिन है. लोगों का आरोप है कि हर साल यही हालात होते हैं उन्हें दुश्वारियां से दो-चार होना पड़ता है, लेकिन कोई स्थाई समाधान नहीं निकल रहा है. साथ ही अगर किसी के बने हुए मकान के बराबर में खाली जगह है तो वहां पानी इतना भर गया है कि वह इस डर के साए में जी रहे हैं कि पता नहीं कब उनका मकान जमीणोदोज हो जाए.






















