Ghaziabad News: युवक को अवैध हिरासत में रखने का आरोप, SHO समेत 3 दरोगाओं को कोर्ट का समन
Ghaziabad News In Hindi: गाजियाबाद में युवक को 3 दिन अवैध हिरासत में रखने के आरोप में कोर्ट ने तत्कालीन थाना प्रभारी समेत 3 सब इंस्पेक्टरों को तलब किया है. मामले में CCTV फुटेज भी मांगी गई है.

गाजियाबाद की एक अदालत ने थाना प्रभारी समेत 3 सब इंस्पेक्टरों को कोर्ट में हाजिर होने का आदेश दिया है. मामला एक युवक को कथित तौर पर 3 दिन तक अवैध हिरासत में रखने और बाद में मोबाइल चोरी के मामले में जेल भेजने के आरोपों से जुड़ा है. अदालत ने संबंधित पुलिस अधिकारियों को 23 जून को एडीजे कोर्ट संख्या-2 में पेश होने के लिए सम्मन जारी किया है.
साहिबाबाद क्षेत्र के शहीद नगर निवासी ममनून अली के मुताबिक उनका बेटा मोहम्मद अमन 6 जनवरी को काम के सिलसिले में ग्रेटर नोएडा जा रहा था. आरोप है कि रास्ते में पुलिस ने चेकिंग के नाम पर उसे रोक लिया. इसके बाद परिवार का अमन से संपर्क टूट गया और उसका मोबाइल फोन भी बंद हो गया.
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परिजनों का कहना है कि बेटे के घर नहीं लौटने पर उन्होंने थाना साहिबाबाद में गुमशुदगी दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें 24 घंटे इंतजार करने की बात कही. बाद में 8 जनवरी को गुमशुदगी दर्ज की गई, जिसमें यह उल्लेख था कि अमन 6 जनवरी से लापता है.
परिवार को बाद में पता चला कि बेटा जेल में है
ममनून अली का आरोप है कि गुमशुदगी दर्ज होने के बावजूद पुलिस ने उन्हें यह जानकारी नहीं दी कि उनका बेटा पुलिस की हिरासत में है. बाद में पता चला कि अमन को 9 जनवरी को एक मोबाइल चोरी के मामले में जेल भेज दिया गया है.
यही वह बिंदु था, जहां से पूरे मामले पर सवाल उठने शुरू हुए. परिवार का कहना है कि यदि अमन 6 जनवरी से लापता था और उसकी गुमशुदगी भी दर्ज थी, तो फिर वह उसी दौरान पुलिस की हिरासत में कैसे था.
अमन ने लगाए मारपीट और पैसे लेने के आरोप
मोहम्मद अमन का कहना है कि उसका पहले कभी किसी आपराधिक मामले से कोई संबंध नहीं रहा. अमन के मुताबिक, जब वह काम पर जा रहा था तब पुलिस ने चेकिंग के दौरान उसे रोका. उसने बाइक के सभी दस्तावेज और लाइसेंस दिखाए, लेकिन पुलिसकर्मियों ने उसका पर्स अपने पास रख लिया.
अमन का आरोप है कि उसके पर्स में 12 से 13 हजार रुपये थे. जब उसने पैसे वापस मांगे तो उसके साथ मारपीट की गई. उसका मोबाइल फोन भी बंद कर दिया गया और उसे तीन दिन तक अवैध रूप से हिरासत में रखा गया. इसके बाद 9 जनवरी को उसे मोबाइल चोरी के एक मामले में जेल भेज दिया गया.
कोर्ट पहुंचा परिवार, अधिकारियों को भेजा गया सम्मन
मामले में न्याय की मांग को लेकर ममनून अली ने 6 फरवरी को अदालत में याचिका दाखिल की. याचिका पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने तत्कालीन थाना प्रभारी शालीमार गार्डन बृजेश यादव, सब इंस्पेक्टर सुमित कुमार, गोपाल शर्मा और राजीव कुमार यादव को 23 जून को अदालत में पेश होने का आदेश दिया है.
पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता महकार कसाना का कहना है कि मामले में कई गंभीर सवाल हैं, जिनकी जांच जरूरी है. अदालत ने इसी आधार पर संबंधित पुलिस अधिकारियों को तलब किया है.
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गरीब परिवार ने इंसाफ के लिए उठाई आवाज
ममनून अली राजमिस्त्री का काम करते हैं, जबकि उनका बेटा पीवीसी पाइप फिटिंग का काम करता है. परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं है, लेकिन उनका कहना है कि उन्होंने यह लड़ाई सिर्फ अपने बेटे के लिए नहीं बल्कि इसलिए शुरू की है ताकि भविष्य में किसी और परिवार के साथ ऐसा न हो.
अब सभी की नजर 23 जून को होने वाली अदालत की सुनवाई पर टिकी है, जहां संबंधित पुलिस अधिकारियों को अपना पक्ष रखना होगा.























