फतेहपुर मकबरा विवाद में बीजेपी जिलाध्यक्ष भी शामिल? पुलिस मेहरबान! जांच पर उठ रहे ये सवाल
Fatehpur News: बीजेपी जिलाध्यक्ष मुखलाल पाल ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर 11 अगस्त को पूजा की अनुमति मांगी थी, जिसके बाद सोमवार को बड़ी भीड़ जमा हुई और बवाल हो गया. पुलिस ने FIR में नाम नहीं जोड़ा.

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के आबुनगर रेडैया इलाके में स्थित ईदगाह पर भगवा झंडा लहराने और मकबरे को क्षतिग्रस्त करने का विवाद तूल पकड़ रहा है. इस घटना ने एक बार फिर कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. स्थानीय लोगों के मुताबिक हिंदू संगठनों ने दावा किया कि यह जगह 200 साल पुराने मकबरे के बजाय ठाकुर जी का मंदिर है, जहां पहले पूजा होती थी.
बीजेपी जिलाध्यक्ष मुखलाल पाल ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर 11 अगस्त को पूजा की अनुमति मांगी थी, जिसके बाद सोमवार को बड़ी भीड़ जमा हुई और बवाल हो गया.
पुलिस के सामने हुई तोड़फोड़
सोमवार सुबह हिंदू संगठनों की भीड़ ने भगवा झंडा लहराया, जिससे एक विशेष वर्ग के लोग आक्रोशित हो गए और पथराव शुरू हो गया. पुलिस मौजूद थी लेकिन तीन मजारों को नुकसान पहुंचाया गया. पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर शांति बहाल की, लेकिन तनाव बना रहा.
पुलिस ने 10 नामजद सहित 150 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया, जबकि जिलाध्यक्ष का नाम अभी एफआईआर में नहीं है. वीडियो फुटेज में मुखलाल पाल समेत हिंदू संगठनों के नेता फतेहपुर डाक बंगले से शुरू हुई यात्रा का हिस्सा दिखाई दिए, जो बाद में आक्रोश में बदल गई.
पुलिस ने वीडियो को आधार बनाकर आगे कार्रवाई का आश्वासन दिया है, लेकिन उनका नाम न होना संदेह पैदा कर रहा है.
पुलिस पर बचाने के आरोप
स्थानीय लोगों और विपक्षी दलों का आरोप है कि पुलिस बीजेपी जिलाध्यक्ष मुखलाल पाल को बचाने में जुटी है. वीडियो में उनकी मौजूदगी स्पष्ट है, फिर भी एफआईआर में उनका नाम न होना सवालों को जन्म दे रहा है.
एसपी अनूप सिंह ने कहा कि जांच जारी है और कार्रवाई होगी, लेकिन एफआईआर की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं. कुछ कार्यकर्ताओं का मानना है कि प्रशासनिक दबाव के चलते यह कदम उठाया गया. दूसरी ओर पाल ने दावा किया कि यात्रा में उपद्रवियों ने माहौल बिगाड़ा, और उन्होंने इसे नियंत्रित करने का प्रयास किया.
बीजेपी जिलाध्यक्ष ने क्या कहा
एबीपी न्यूज से विशेष बातचीत में बीजेपी जिलाध्यक्ष मुखलाल पाल ने कहा कि यह यात्रा शांतिपूर्ण थी, लेकिन कुछ उपद्रवी तत्वों ने इसमें घुसकर माहौल बिगाड़ दिया. हमने प्रशासन से अनुमति ली थी, फिर भी स्थिति बेकाबू हो गई.
उन्होंने प्रशासन की नाकामी पर सवाल उठाया कि जब पूजा का अल्टीमेटम दिया गया था, तब पुलिस का सूचना तंत्र कहां था? पाल ने कहा कि जांच में सच सामने आएगा. कोर्ट जाने की जरूरत नहीं, प्रशासन खुद कार्रवाई करेगा.
हालांकि, उनके बयान पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या वे अपनी जिम्मेदारी से बच रहे हैं. एबीपी संवाददाता ने जब उनसे पूछा कि वीडियो में उनकी मौजूदगी क्यों दिख रही है, तो उन्होंने जवाब दिया कि मैंने भीड़ को शांत करने की कोशिश की, लेकिन नियंत्रण मेरे हाथ में नहीं था. इस पर संवाददाता ने कहा कि अगर वे शांत करने की कोशिश कर रहे थे, तो पुलिस को पहले ही सूचित क्यों नहीं किया गया?
इस सवाल का पाल ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया, जिससे विवाद और गहरा गया.
चार साल से वीरान है मकबरा
मकबरे के मुतवल्ली अनीस बाबा की चार साल पहले मृत्यु के बाद यह जगह वीरान थी. हाल के दिनों में हिंदू संगठनों ने मंदिर होने का दावा कर विवाद शुरू किया. भारी पुलिस बल तैनात है, और स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन सियासी तनाव बढ़ता जा रहा है.
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Source: IOCL























