पढ़िये सुषमा स्वराज का वो भाषण जिसने पाकिस्तान की बोलती बंद कर दी थी
भाजपा की वरिष्ठ नेता व पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का 67 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने देर रात दिल्ली के एम्स अस्पताल में अंतिम सांस ली। पढ़िये उनके भाषण जिसके सभी मुरीद थे।

नई दिल्ली, एबीपी गंगा। भाजपा की वरिष्ठ नेता और पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का दिल का दौरा पड़ने से 67 वर्ष की उम्र में मंगलवार को निधन हो गया। देर शाम उन्हें बेचैनी होने के बाद दिल्ली के एम्स में भर्ती कराया गया था। स्वराज पिछले काफी समय से अस्वस्थ चल रही थीं। खराब स्वास्थ के चलते उन्होंने खुद को कैबिनेट में न लिये जाने का आग्रह किया था।
सुषमा स्वराज का जन्म 14 फरवरी 1952 को हरियाणा के अंबाला में हुआ था। उन्होंने अंबाला छावनी के एसडी कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की। इसके बाद पंजाब विश्वविद्यालय से एलएलबी की डिग्री ली। उनकी छवि एक प्रखर वक्ता के रूप में थी। संसद से लेकर संयुक्त राष्ट्र में भारत का पक्ष रखने तक उनके भाषण यादगार रहे हैं। सदन में जब वह बोलतीं थीं तब विपक्ष भी उनका बातें ध्यान से सुनता था।
संयुक्त राष्ट्र में दी यादगार स्पीच
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने 29 सितंबर 2018 को संयुक्त राष्ट्र में दिए अपने भाषण से पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा था। सुषमा ने अपने भाषण की शुरुआत बेहद ही शानदार तरीके से की थी। उन्होंने इस तरह अपने भाषण की शुरुआत की। वसुधैव कुटुंबकम् की बुनियाद है परिवार और परिवार प्यार से चलता है , व्यापार से नहीं परिवार मोह से चलता है, लोभ से नहीं परिवार संवेदना से चलता है, ईर्ष्या से नहीं परिवार सुलह से चलता है, कलह से नहीं इसीलिए हमें संयुक्त राष्ट्र को परिवार के सिद्धांत पर चलाना होगा।
अमेरिका की खुफिया तंत्र की सफलता थी कि उन्होंने ओसामा को ढूंढ निकाला और मार गिराया। पाकिस्तान की हिमाकत देखिए कि सारा सच सामने आने के बाद भी उनके माथे पर शिकन नहीं है। 26/11 का मास्टरमाइंड रैलियां करवाता है, सरेआम घूमता है। दुनिया ने पाकिस्तान का चेहरा पहचान लिया है। हम पर बातचीत को रोकने का आरोप लगता है। यह सफेद झूठ है, हम मानते हैं कि सबसे मुश्किल मामलों को सुलझाने में भी बातचीत की अहम भूमिका होती है। पाकिस्तान के साथ कई मौकों पर बातचीत शुरू हुई है, यदि वो रूकी हैं तो यह केवल उनके व्यवहार के कारण।
एक आतंकी से बढ़कर मानवाधिकारों का सबसे बड़ा दमनकारी कौन है, जो लोग किसी भी तरीके से निर्दोष लोगों की जान ले लेते हें वे अमानवीय व्यवहार का पक्ष लेते हैं मानवाधिकारों का नहीं, पाकिस्तान हत्यारों को महिमामंडित करता है, उसे मासूमों का खून नहीं दिखता।
2015 में पाकिस्तान की उधेड़ी थी बखिया
वर्ष 2015 में सुषमा स्वराज ने विदेश मंत्री की हैसियत से न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र की 70वीं महासभा के अधिवेशन को संबोधित किया था। इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान को पूरे विश्व के सामने जमकर लताड़ा था। उन्होंने कहा कि खुलेआम पाकिस्तान को आतंकवाद की फैक्ट्री कहकर संबोधित किया था।
पाकिस्तान जो खुद को आतंकवाद से पीड़ित बताता है दरअसल झूठ बोल रहा है। जब तक सीमापार से आतंक की खेती बंद नहीं होगी भारत पाकिस्तान के बीच बातचीत नहीं हो सकती। पाकिस्तान आतंकवाद की फैक्ट्री बन गया है, भारत ने उसके 2-2 आतंकवादी जिंदा पकड़े हैं।

भारत हर विवाद का हल वार्ता के जरिए चाहता है किंतु वार्ता और आतंकवाद साथ-साथ नहीं चल सकते। कल इसी मंच से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने पाकिस्तान और भारत के बीच शांति पहल का एक चार सूत्रीय प्रस्ताव रखा था, मैं उसका उत्तर देते हुए कहना चाहूंगी कि हमें चार सूत्रों की जरूरत नहीं है, केवल एक सूत्र काफी है, आतंकवाद को छोड़िए और बैठकर बात कीजिए। अमल करने की बात तो दूर, सीमा पार से हाल ही में नए हमले हुए हैं। भारतीय सुरक्षा बलों ने सीमा पार के दो आतंकवादी जिंदा भी पकड़े हैं। ये हमले भारत में अस्थिरता फैलाने और भारत के जम्मू-कश्मीर राज्य के कुछ हिस्सों पर पाकिस्तान द्वारा किए गए अवैध कब्जे को वैध बनाने और शेष भाग पर उसके दावे को पुष्ट करने के उद्देश्य से किए जा रहे हैं।
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