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पूरी दुनिया को मोहब्बत का पैगाम दे रही है ये इमारत, यहां इश्क को कहते हैं इबादत

आगरा का नाम सुनते ही आंखों के सामने ताजमहल की छवि उभर आती है। ताज के दीदार से थोड़ा ध्यान हटता है तो यहां के पेठे की मिठास से मुंह में पानी आ जाता है।

आगरा: एक शहर में बनी इमारत पूरी दुनिया को शान से यह बता रही है कि इश्क इबादत है। ताजमहल इसी इमारत की तस्वीर है और इस शहर को हम आगरा के नाम से जानते है। मोहब्बत की इस अजीमो-शान इमारत को देखकर आज भी न जाने कितने दीवाने एक-दूसरे के प्यार में बंधने की कसमें खाते हैं। इस प्यार में समर्पण, त्याग, खुशी और वो सबकुछ होता है जो इश्क को एक मुकम्मल जहां देता है।

आगरा का नाम सुनते ही आंखों के सामने ताजमहल की छवि उभर आती है। ताज के दीदार से थोड़ा ध्यान हटता है तो यहां के पेठे की मिठास से मुंह में पानी आ जाता है। आगरा का यूं तो अपना ऐतिहासिक महत्व है लेकिन आपको यह भी बता दें कि आगरा दुनिया का एकमात्र ऐसा शहर है जहां तीन वर्ल्‍ड हेरिटेज मॉन्‍यूमेंट हैं। यूनेस्‍को ने ताजमहल, आगरा किला और फतेहपुर सीकरी को यह दर्जा दिया हुआ है। तो चलिए हमारे साथ उस शहर के सफर में जहां मोहब्बत को ही इबादत कहते हैं।

अकबर का चर्च

सबसे पहले आपको लेकर चलते हैं अकबर के चर्च में। नाम सुनकर चौंक तो नहीं गए आप, तो जनाब चौंकिएगा नहीं क्योंकि यह चर्च ही है। वैसे तो आपने बहुत सारे चर्च देखे होंगे लेकिन ये कुछ अलग है। आगरा में 415 वर्ष पहले पहला क्रिसमस इसी चर्च में मनाया गया था। इस चर्च के इतिहास पर जाएं, तो मुगल शासक अकबर ने दीन-ए-इलाही धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए इस चर्च की नींव रखवाई थी। ईसाई समाज की एक पुस्तक के अनुसार सन् 1562 में ताजनगरी में ईसाईयों का आगमन शुरू हुआ, सम्राट अकबर द्वारा धन और जमीन देने पर सन् 1599 में जुसुइट फादर ने इस चर्च का निर्माण करावाया था। इस चर्च में मुगलिया आर्किटेक्चर की छाप नजर आती है यहां आकर आपको बेहद सुकून का अनुभव होगा।

आगरा का किला

ताजमहल से लगभग ढाई किलोमीटर दूर यमुना किनारे बना यह किला अपने अंदर कई ऐतिहासिक पलों के संजोए हुए है। माना जाता है कि करीब चार हजार मजदूरों ने रोज लगातार आठ वर्षों तक काम किया, जिसके बाद इस किले का निर्माण संभव हो सका। ताजमहल और आगरा का किला आगरा के ऐतिहासिक महत्व के साक्षी हैं, विशेष रूप से आगरा का किला। इस ऐतिहासिक किले को दुनिया भर से लोग देखने के लिए आते हैं। यूनेस्को ने आगरा के इस किले को विश्व धरोहर में शामिल किया है। किले के इतिहास को अगर देखें तो पहले ये राजपूत राजा पृथ्वीराज चौहान का किला कहा जाता था लेकिन जंग के बाद महमूद गजनवी ने इस किले पर कब्जा कर लिया था। इस किले की चहारदीवारी के अंदर एक पूरा शहर बसा हुआ है जिसकी कई इमारतें बेहतरीन कला के नमूनों में से एक है। आर्किटेक्ट की बात करें तो इस किले के आंतरिक भाग में ईंटों का इस्तेमाल किया गया है। बाहरी भाग को लाल पत्थरों से सजाया गया है। किला 21.4 मीटर ऊंची दुर्ग दीवार से घिरा हुआ है, इसके चारों तरफ चार दरवाजे हैं। औरंगजेब ने अपने पिता शाहजहां को आठ साल तक इसी किले में कैद रखा था और यहीं उनकी मृत्यु हुई थी।

ताजमहल

ताजमहल सिर्फ हिंदुस्तान ही नहीं बल्कि दुनिया की धरोहर है। मुगल बादशाह शाहजहां ने इसे अपनी बेगम मुमताज की याद में बनवाया था। यह इमारत इस कदर खूबसूरत है कि इसे अजूबा भी कहा जाता है। इसकी बनावट और सजावट काबिले तारीफ है। आगरा के ताज महल को प्यार, इश्क, मोहब्बत की निशाना माना जाता है। इसकी खूबसूरती और प्यार की छाप दुनिया पर ऐसी पड़ी है सदियों के बाद आज भी लोग इसे देखने आते हैं। शाहजहां द्वारा निर्मित ताज महल को यूनेस्को ने विश्व धरोहर घोषित किया है। ताजमहल का प्रमुख केंद्र है मकबरा। यहां मुमताज के मकबरे को विशेष तरह से सजाया गया है। यह मकबरा 42 एकड़ में फैला हुआ है और चारों तरफ बगीचें हैं। ताजमहल के मकबरे के शिखर पर संगमरमर के गुम्बद दिखाई देते हैं। यह गुम्बद उलटे कलश की तरह दिखते हैं। गुम्बद पर किरीट कलश सुशोभित है यह कलश हिन्दू और फ़ारसी कला का मुख्य तत्व है।

सिकंदरा

आगरा से चार किलोमीटर की दूरी पर स्थित है सिकंदरा। इस जगह की खास बात यह है कि यहां पर स्थित है अकबर का मकबरा। यह मकबरा आठ साल में बनकर तैयार हुआ था, जिसका निर्माण खुद अकबर ने 1605 में शुरू करवाया था। बाद में 1613 से में इसे अकबर के बेटे जहांगीर ने पूरा करवाया। इस मकबरे की खासियत इसका बुलंद दरवाजा है और इसमें संगमरमर से बनी हुई चार मीनारें हैं। दरवाजे से होकर एक चौड़ा रास्ता मकबरे तक जाता है। यह मकबरा 119 एकड़ में फैला हुआ है। इस मकबरे में आपको ईसाई, इस्लामिक हिंदू, बौद्ध और जैन धर्म का सर्वोत्तम मिश्रण देखने को मिलेगा।

मरियम उज-जमानी का मकबरा

मरियम के मकबरे को उसकी याद में उसके बेटे जहांगीर ने बनवाया था। अकबर का मकबरा भी जहांगीर ने पूरा करवाया था और मां का मकबरा भी उसने की बनवाया था। जितनी कारीगरी आपको अकबर के मकबरे में देखने को मिलती है उतनी ही कारीगरी आपको मरियम के मकबरे में भी देखने को मिलेगी। इस मकबरे में तीन कब्रें हैं।

एत्माद उद्-दौला का मकबरा

एत्माद उद्-दौला का मकबरा मिर्जा गयास बेग की पत्नी असमत बेगम का मकबरा है। ये मुमताज महल के दादा थे। नूरजहां ने अपने माता-पिता के लिए यह मकबरा बनवाया। इस मकबरे का सर्वाधिक महत्व इसका रंगीन अलंकरण है, और इस प्रकार यह लाल पत्थर से श्वेत संगमरमर में परिवर्तन का सूचक है और सिकंदरे के अकबर के मकबरे से ताजमहल तक की विकास प्रक्रिया का दिव्य दर्शन कराता है।

चीनी का रोजा

शाहजहां के जो वजीर थे, उनका नाम मुल्ला शुक्रुल्‍लाह शीराजी अफजल खां था। उन्होंने भी अपने खुद के लिए एक मकबरा ताबिल करवाया और इसको नाम दिया गया चीनी का रोजा। इसमें खंभे, उतरंग, छज्जे, छतरियां, या कोई भी अन्य तत्व नहीं हैं। न इसमें जालियां हैं, न पत्थर में उभरे हुए तक्षण हैं। यह इमारत ईरान की विलुप्‍त हो चुकी काशीकरी कारीगरी से बनी है। इस कला से निर्मित पूरे भारत में एकमात्र यही इमारत है, जो अभी तक संरक्षित है। इस मकबरे में लगी टाइल्‍स को इमारत के बाहर से लगाया गया है। ये नीले, पीले, हरे, नारंगी और सफेद रंग की हैं। ईरान के काशान इलाके में यह कला सबसे ज्‍यादा प्रचलित थी, इसलिए टाइलों को काशी कहा जाने लगा। यह टाइल तीन भागों में होती थी। प्‍लास्‍टर, जिसे खमीर कहते थे, शीशे को कांच कहा जाता और अस्‍तर को इसके बीच में लगाया जाता था। इसको बनाने में कई तरह के केमिकल, बलुआ पत्‍थर और वस्‍तुओं का प्रयोग होता था। विशेष रूप से बने मटकों में गर्म करके पिघालाया जाता था। इस विधि से टाइल्‍स की चमक हजार साल तक बनी रहती थी। इसे बनाने की कठिन विधि की वजह से यह कला समाप्‍त हो गई।

श्री मनकामेश्वर मंदिर

हमारा देश धर्म, आस्थाओं और परंपराओं का का केंद्र है। आगरा भी इससे अछूता नहीं है। ऐसा ही एक आस्था का केंद्र है मनकामेश्वर मंदिर। ये मंदिर आगरा रेलवे स्टेशन के निकट रावतवाड़ा में स्थित है। मंदिर में भगवान शिवजी का शिवलिंग चांदी के आवरण से ढका गया है। माना जाता है इसकी स्थापना स्वयं भगवान शिव ने द्वापर युग में की थी। यहां भगवान गणेश, माता पार्वती, भगवान कार्तिक, मां गौरा और मां अन्नपूर्ण की प्रतिमाएं भी बनी हैं। पर्यटकों को भगवान शिव की मुख्य मूर्ति के पास जाने की अनुमति है। पर वो केवल एक ही शर्त पर संभव है, जब पर्यटक ने कोई भी अंग्रेजी प्रकार का वस्त्र धारण नहीं किया हो। और यहां पर सबसे अनोखी चीज है यहां का राष्ट्र मंदिर। राष्ट्र मंदिर में महात्मा गांधी की प्रतिमा को स्थापित किया गया है।

राजा की मंडी

राजा की मंडी में आगरा का सबसे बड़ा शॉपिंग डेस्टिनेशन है।  हर तरह की शॉपिंग करने के लिए राजा की मंडी आगरा में one stop solution है। अबकर के जमाने से यानी मुगलिया काल से ये बाजार लगता आया है। अगर आप मोलभाव करने के आशिक हैं, तो यहां आप घर का सामना, लेदर आइटम, ड्रेसेज सब कुछ जो भी आपके जहन में आता हो, ले सकते हैं। अगर आप आगरा आ रहे हैं तो शॉपिंग के टाइम पर राजा की मंडी जरूर आएं।

गुरुद्वारा गुरु का ताल

आगरा शहर में बहुत सारे ऐतिहासिक स्थल है, उन्हीं ऐतिहासिक स्थलों में से एक है यहां का खास गुरुद्वारा गुरु का ताल। आगरा दिल्ली मार्ग पर सिकंदरा के नजदीक है गुरुद्वारा गुरु का ताल। यहां सिखों के गुरु श्री तेग बहादुर के चरण पड़े थे। गुरु तेग बहादुर जी ने यहां पर अपनी गिरफ्तारी दी थी, और ये स्थल उनकी शहादत से जुड़ा हुआ है। गुरुद्वारे में 24 घंटे लंगर चलता है। गुरुद्वारा गुरु का ताल में ही भौरा साहिब जी भी हैं। यहां एक गुफा भी है, जहां 24 घंटे गुरु ग्रंथ साहिब जी का पाठ चलता रहता है। इसके दर्शन मात्र से कष्ट दूर हो जाते हैं।

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