भगवान राम-कृष्ण पर धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर विवाद, अयोध्या के संतों ने जताई नराजगी
धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री द्वारा भगवान श्री कृष्ण पर की गयी टिप्पणी को लेकर विवाद बढ़ गया है. अयोध्या में संतों ने इस पर नाराजगी जताई है और उन्हें इसको लेकर चेतावनी भी दी है.

बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण को लेकर की गई टिप्पणी पर विवाद गहराता जा रहा है. अयोध्या के संतों ने इस बयान पर अलग-अलग प्रतिक्रिया दी है.
सत्य सनातन धर्म प्रचारक दिवाकराचार्य महाराज ने धीरेंद्र शास्त्री पर सनातन धर्म के आराध्य देवी-देवताओं को लेकर विवादित टिप्पणी करने और हिंदू समाज को बांटने का आरोप लगाया है. वहीं संत सीताराम दास जी ने धीरेंद्र शास्त्री के बयान का बचाव करते हुए इसे भाव पक्ष से जुड़ा बताया है.
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श्रीकृष्ण को लेकर की टिप्पणी
दरअसल, धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपनी कथा के दौरान मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम को सीधे और लीला पुरुषोत्तम भगवान श्रीकृष्ण को टेढ़ी लीला वाला बताया था. इसी टिप्पणी को लेकर अब अयोध्या के संतों के बीच अलग-अलग मत सामने आ रहे हैं.
दिवाकराचार्य ने दी चेतावनी
दिवाकराचार्य महाराज ने धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि आए दिन सुर्खियों में बने रहने के लिए सनातन के आराध्य देवी-देवताओं को लेकर विवादित टिप्पणियां करना उचित नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि धीरेंद्र शास्त्री व्यास मंच से समाज को जोड़ने की बजाय तोड़ने का काम कर रहे हैं. महाराज ने उन्हें सलाह दी कि अनर्गल बयानबाजी बंद कर सनातन समाज को संगठित करने का काम करें. साथ ही चेतावनी दी कि इस तरह के बयान जारी रहे तो उनका खुलकर विरोध किया जाएगा.
सीताराम दास ने किया शास्त्री का बचाव
वहीं दूसरी ओर संत सीताराम दास जी ने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का बचाव किया है. उन्होंने कहा कि शास्त्री जी ने यह बात भाव पक्ष में कही है. भगवान श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं, जबकि भगवान श्रीकृष्ण लीला पुरुषोत्तम हैं. दोनों के स्वरूप और लीलाओं का वर्णन अलग-अलग भावों में किया जाता है, लेकिन दोनों एक ही परमात्मा के स्वरूप हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि भगवान राम और भगवान कृष्ण में कोई भेद नहीं है.
फिलहाल, धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की टिप्पणी को लेकर संतों के बीच दो अलग-अलग मत सामने आने के बाद यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है. एक तरफ बयान को सनातन समाज को बांटने वाला बताया जा रहा है, तो दूसरी तरफ इसे धार्मिक भाव और लीला के संदर्भ में कही गई बात करार दिया जा रहा है.
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