देहरादून: मरने से पहले युवक ने लिखा 9 पन्नों का सुसाइड नोट, पत्नी और ससुराल पर लगाए आरोप
Uttarakhand News: देहरादून के विकासनगर इलाके में 30 साल के युवक ने घर में फांसी लगाकर अपनी जान दे दी. मौके से मिले सुसाइड नोट और वीडियो संदेशों में मृतक ने अपनी पत्नी और ससुराल वालों पर आरोप लगाए हैं.

उत्तराखंड के देहरादून के विकासनगर इलाके में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. जहां 30 साल के युवक ने घर में फांसी लगाकर अपनी जिंदगी खत्म कर ली. मौत से पहले उसने कई बाते लिखी , जिन पर अब कई सवाल खड़े होते हैं. युवक ने आत्महत्या से पहले 9 पन्नों का एक पत्र और कई वीडियो जारी किए, जिनमें उसने अपनी पत्नी और ससुराल वालों पर गंभीर आरोप लगाए हैं.
पत्नी और उसके परिवार वालों से मानसिक रूप से प्रताड़ित था मृतक
मृतक महेंद्र वर्मा (30) अपनी पत्नी के साथ विकासनगर के कैनाल रोड स्थित पहाड़ी गली चौक के पास किराए के मकान में रहता था. दोनों एक ही होटल में नौकरी करते थे और करीब तीन साल की शादीशुदा जिंदगी में दोनों के बीच लगातार अनबन चलती रही. अभी कुछ समय पहले स्थिति इतनी बिगड़ी कि पत्नी मायके चली गई, जिसके बाद से महेंद्र मानसिक तौर पर टूटता चला गया और महेंद्र ने आत्महत्या कर ली.
मौके से मिले सुसाइड नोट और वीडियो संदेशों ने पूरे मामले को एक अलग मोड़ दे दिया, जिसमें महेंद्र ने साफ-साफ लिखा कि वह अपनी पत्नी और उसके परिवार वालों से मानसिक रूप से प्रताड़ित था. उसने वीडियो में बताया कि पत्नी के भाइयों ने उससे चार लाख रुपये की मांग की थी. इसके अलावा, उसने पत्नी के किसी और से संबंध होने का भी जिक्र किया.
पिता का आरोप मायके वालों ने बेटे को आत्महत्या के लिए मजबूर किया
मृतक महेंद्र के पिता हरिदास वर्मा ने विकासनगर कोतवाली में शिकायत दर्ज कर अपनी बहू और उसके मायके वालों पर बेटे को आत्महत्या के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया. सुसाइड नोट, वीडियो और अन्य सबूतों के आधार पर पुलिस ने पत्नी और उसके परिजनों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का भी मामला दर्ज कर लिया है. कोतवाली प्रभारी विनोद गुसांई ने बताया कि मामले की गहराई से जांच की जा रही है. पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है. सुसाइड नोट और वीडियो के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी.
मृतक के परिजन सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि अगर समय रहते महेंद्र की तकलीफ को समझा गया होता, तो शायद यह हादसा टाल सकता था. अब वे न्याय की गुहार लगा रहे हैं.






















