इमरान मसूद को लगेगा झटका! सपा में शामिल होंगे दामाद शायान?
UP News: यूपी विधानसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई हैं. दावा किया जा रहा है कि इमरान मसूद की बयानबाजी के बीच सपा मुखिया अखिलेश यादव कांग्रेस को झटका दे सकते हैं.

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव पहले एक बार फिर से कांग्रेस और समाजवादी पार्टी में तल्खी बढ़ते हुए दिख रही हैं खबरों की मानें तो चुनाव से पहले सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद की ओर सीटों को लेकर हो रही बयानबाजी के बीच सपा कांग्रेस और मसूद दोनों को ही बड़ा झटका दे सकती हैं. सियासी गलियारों में इस तरह की चर्चा है कि इमरान मसूद के दामाद शायान मसूद जल्द ही समाजवादी पार्टी में शामिल हो सकते हैं.
यूपी की राजनीति में इन दिनों इमरान मसूद के दामाद शायान मसूद को लेकर खबरें चर्चाओं में बनी हुई हैं. बड़ी बात ये हैं कि 2024 के लोकसभा चुनाव में शायान ने इमरान मसूद के चुनाव की कमान संभाली थी और उनको जिताने के लिए पूरी ताकत से चुनाव प्रचार किया था. ऐसे में अगर वो सपा के साथ जाते हैं तो इससे कांग्रेस और इमरान मसूद को बड़ा झटका लग सकता है. हालांकि इसे लेकर अभी तक दोनों ही ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है.
जानें कौन हैं शायान मसूद?
दरअसल शायान मसूद भी पश्चिमी यूपी के बड़े सियासी परिवार से ताल्लुक़ रखते हैं. वो पूर्व केंद्रीय मँत्री और पश्चिमी यूपी कद्दावर नेता काजी रशीद मसूद के पौत्र हैं. उनके पिता का नाम शाजान मसूद हैं. उनकी भी आसपास के इलाकों में अच्छी खासी पकड़ है और जमीनी नेता के तौर पर जाने जाते हैं. शायान कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के दामाद भी हैं. ऐसे में उनके सपा में जाने की खबरें आने के बाद इंडिया गठबंधन को लेकर सियासी हलकों में बहस छिड़ गई है.
सपा के शीर्षस्थ नेताओं के संपर्क में शायान
बताया जा है कि शायान मसूद आगामी विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन बीते दिनो इमरान मसूद ने सार्वजनिक तौर पर ये कहा था उनके परिवार से कोई भी आगामी विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेगा. उनके इस बयान से शायान नाराज़ बताए जा रहे हैं. जिसके बाद उन्होंने सपा से संपर्क साधा.
सूत्रों के मुताबिक शायान समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के संपर्क में हैं और दोनों पक्षों की बातचीत आखिरी दौर में है. अगर सब कुछ ठीक रहता है तो जल्द ही उन्हें सपा की सदस्यता दिलाई जा सकती है. शायान के सपा में जाने से पश्चिमी यूपी में कांग्रेस के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं. अब सबकी नजरें प्रदेश के आगामी सियासी घटनाक्रमों पर टिकी हुई हैं.
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