28 साल की तपस्या, 6.5 साल की जिम्मेदारी, चढ़ावा चोरी, 79 की उम्र में चंपत राय की अयोध्या से विदाई
Champat Rai Resignation: वर्ष 2018 में चंपत वीएचपी के उपाध्यक्ष चुने गए. दावा किया जाता है कि उनका कोई व्यक्तिगत बैंक खाता भी नहीं है. चढ़ावा चोरी के मामले में उनकी भी भूमिका संदिग्ध मानी जाती है.

28 साल तक राम मंदिर बनने के संकल्प के साथ संघर्ष किया और लगभग 6.5 साल तक श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव रहे चंपत राय, राम मंदिर में चढ़ावा चोरी, अयोध्या में जमीन की खरीद फरोख्त में अनियमितिताओं के साथ विदा हो रहे हैं.
उत्तर प्रदेश स्थित अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के संस्थापक महासचिव रहे चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है. ट्रस्ट के महंत नृत्यगोपाल दास की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह फैसला लिया गया.
मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के नगीना के रहने वाले चंपत राय विश्व हिन्दू परिषद् (वीएचपी) के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव थे. साल 1975 में आपातकाल के दौरान उन्हें गिरफ्तार किया गया था और उन्होंने करीब 18 महीने जेल में बिताए.
जेल से लौटे, VHP की ओर मुड़े
उस समय वह धामपुर के आरएसएम कॉलेज में रसायन विज्ञान विभाग में प्रोफेसर थे. जेल से लौट कर वह अकादमिक क्षेत्र की ओर नहीं गए और विश्व हिन्दू परिषद् से जुड़े. साल 1980 के दशक में उन्होंने वीएचपी से सक्रिय रूप से जुड़कर संगठनात्मक जिम्मेदारियां संभालीं.
साल 1991 से उन्होंने अयोध्या में संगठन का कामकाज देखना शुरू किया. 1991 से लेकर साल 2019 यानी कुल 28 साल तक वह राम मंदिर के संघर्ष रूपी संकल्प के साक्षी रहे. साल 2019 में ही श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के संस्थापक महासचिव बनाए गए थे.
वर्ष 2018 में चंपत वीएचपी के उपाध्यक्ष चुने गए. दावा किया जाता है कि उनका कोई व्यक्तिगत बैंक खाता भी नहीं है.
SIT की शुरुआती रिपोर्ट में चंपत राय के बारे में क्या कहा गया?
SIT की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में तत्कालीन महासचिव चंपत राय की भूमिका को संदिग्ध बताया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, चढ़ावे की गिनती, उसकी निगरानी और प्रशासनिक व्यवस्था में गंभीर लापरवाही सामने आई है. जांच में यह भी पाया गया कि मंदिर में कई कर्मचारी बिना किसी लिखित आदेश के कार्यरत थे और कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया में भी अनियमितताओं के संकेत मिले हैं.
हालांकि, SIT ने चंपत राय पर व्यक्तिगत रूप से चढ़ावा चोरी करने का आरोप नहीं लगाया है और न ही ऐसा कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य मिलने की बात कही है. प्रारंभिक रिपोर्ट ने उनकी भूमिका पर सवाल जरूर उठाए हैं.






















