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पांडुकेश्वर में कुबेर पंचमी उत्सव का उत्साह, भक्तों के बीच आकर्षण बना गाडू देव स्नान

Pandukeshwar Gadu Dev Snan 2025: देवभूमि में पूरे साल प्राकृति और धार्मिक उत्सवों के कई रुप देखने को मिलते हैं. इन्हीं धार्मिक पर्वों में से एक है कुबेर पंचमी और गाडू देव स्नान की परंपरा काफी खास है.

Chamoli News Today: उत्तराखंड को देवभूमि के नाम से भी जाना जाता  है. यहां पर चारों धाम हैं, जहां पर हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं. पवित्र धार्मिक स्थलों में से एक है- पांडुकेश्वर. बद्रीनाथ धाम के समीप स्थित पांडुकेश्वर महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है. यहां हर वर्ष कई बड़े धार्मिक उत्सवों का आयोजन होता है.

इस बार बसंत पंचमी के अवसर पर पांडुकेश्वर में श्री कुबेर मंदिर प्रांगण में आयोजित कुबेर पंचमी टीका उत्सव विशेष रूप से आकर्षण का केंद्र रहा. खासकर इस दिन भगवान श्री कुबेर जी की पूजा और गाडू देव स्नान की परंपरा ने भक्तों को अपनी ओर खींच लिया. 

कुबेर पंचमी पर्व, भगवान श्री बदरी विशाल जी के खजांची श्री कुबेर जी की पूजा का विशेष दिन होता है. यह दिन खासकर उनके अवतारी पुरुष द्वारा किये जाने वाले पवित्र कार्यों को याद करने का दिन है. पांडुकेश्वर, जो बद्रीनाथ धाम के एक महत्वपूर्ण धार्मिक पड़ाव के रूप में माना जाता है, यहाँ हर साल इस दिन विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं. 

'गाडू देव स्नान' का हुआ आयोजन
इस बार के उत्सव में, बसंत पंचमी के दिन पांडुकेश्वर के कुबेर देव प्रांगण में खास तौर से "गाडू देव स्नान" का आयोजन हुआ. इस दिव्य स्नान की परंपरा के तहत, भगवान श्री कुबेर जी के अवतारी पुरुष ने अपनी खडग (आधिकारिक अस्त्र) की नोक पर आसन लिया और गंगाजल तथा दुग्ध से भरे घड़ों से पवित्र स्नान किया. यह स्नान अत्यधिक पवित्र और धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है, जिसे गाडू स्नान कहा जाता है. 

कुबेर चौक में सैकड़ों भक्तों की भीड़ इस दिव्य स्नान के साक्षी बनी. गाडू देव स्नान का दृश्य भक्तों के लिए अत्यंत श्रद्धा और आस्था का केंद्र रहा, जहां सभी भक्तों ने इस दिव्य स्नान के दर्शन कर अपने जीवन में पुण्य अर्जित करने की कामना की. इस दिन की महिमा को देखते हुए, भक्तों ने पारंपरिक पूजा विधियों के अनुसार श्रद्धा भाव से इस स्नान में भाग लिया. 

पांडुकेश्वर में कुबेर पंचमी का उत्सव
कुबेर पंचमी उत्सव का हिस्सा बनने के लिए पांडुकेश्वर में अलग-अलग धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया. दिन भर चलने वाले इस उत्सव में चोफुला चांचडी जैसे पारंपरिक देव लोक गीतों और नृत्यों का आयोजन किया गया. इन धार्मिक लोक गीतों और नृत्यों के माध्यम से पर्व का माहौल और भी आनंदमयी बन गया. भक्तों ने इन कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और संगीतमय वातावरण में धार्मिक भावनाओं को व्यक्त किया.

गाडू उत्सव की दिखी धूम
दिनभर के धार्मिक आयोजनों के बाद ठीक संध्या के समय कुबेर चौक में विधिपूर्वक गाडू उत्सव का आयोजन हुआ. इस अवसर पर भगवान श्री कुबेर भंडारी जी और मां नन्दा के अवतारी पुरुष (देव पशवा) द्वारा गंगाजल और दुग्ध पंच गर्व्या से पवित्र देव स्नान किया गया. यह विशेष स्नान भी देवता और भक्तों के बीच धार्मिक आस्था और पुण्य की महत्वपूर्ण परंपरा है. 

संध्या समय की इस पूजा में विशेष रूप से मंदिर प्रांगण में दीप जलाए गए और वातावरण को रौशन करने के लिए दिव्य ज्योति का संचार हुआ. भक्तों ने इस दिव्य आयोजन में भाग लेकर अपनी श्रद्धा और आस्था व्यक्त की. पांडुकेश्वर में आयोजित यह कुबेर पंचमी उत्सव न केवल धार्मिक महत्त्व से भरा हुआ था, बल्कि यह क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर को भी उजागर करता है. 

भाईचारे और सौहार्द को बढ़ावा
इस मौके पर यहां के भक्तों के बीच एक गहरी आस्था और समर्पण की भावना देखने को मिली. इस तरह के आयोजन न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि दूर-दूर से आए भक्तों के लिए भी आस्था और धार्मिक उत्सवों का अनुभव प्रदान करते हैं. सभी धार्मिक कार्यक्रमों का उद्देश्य न केवल देवताओं की पूजा करना था बल्कि धार्मिक संस्कृतियों और परंपराओं का पालन करना भी था. जो क्षेत्रीय समाज में आपसी भाईचारे और सौहार्द को बढ़ावा देता है. 

इस प्रकार पांडुकेश्वर में आयोजित कुबेर पंचमी टीका उत्सव का समापन एक अद्वितीय धार्मिक अनुभव के रूप में हुआ, जिसमें सभी भक्तों ने भगवान श्री कुबेर जी की कृपा प्राप्त करने की कामना की. यह उत्सव हर साल एक नई श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है और क्षेत्रीय लोगों के साथ-साथ दूर-दूर से आने वाले भक्तों के लिए भी अत्यंत श्रद्धेय बनता है.

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