'अंकल' के बहाने आकाश आनंद की GenZ पॉलिटिक्स, BSP ने सेट किया एजेंडा
Akash Anand GenZ Politics: बसपा संयोजक आकाश आनंद ने हाथरस की रैली में अखिलेश यादव और राहुल गांधी को अंकल कहकर बुलाया, जिसके प्रदेश में GenZ को लेकर सियासी गर्मी तेज हो गई है.

बहुजन समाज पार्टी ने आगामी ने 2027 के विधानसभा चुनाव का आगाज कर दिया है. 10 अगस्त को हाथरस के सादाबाद में आकाश आनंद ने एक बड़ी जनसभा कर जोरदार शुरुआत की. इस दौरान जहां उन्होंने सत्ता पक्ष और विरोधी दलों को आड़े हाथों लिया तो वहीं सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और राहुल गांधी को अंकल कहकर पार्टी का नया एजेंडा सेट कर दिया.
आकाश आनंद का ये बयान महज़ एक राजनीतिक तंज नहीं बल्कि उनकी GenZ पॉलिटिक्स पर सीधा हमला था. उन्होंने ये साफ़तौर पर ये संदेश देने की कोशिश की कि राहुल गांधी और अखिलेश यादव भले ही अपने आप को युवाओं का नेता मान रहे हो लेकिन अब वो भी पुरानी पीढ़ी के नेता हो गए हैं उनके मुकाबले वो अब ख़ुद को GenZ नेता के तौर पर आगे बढ़ा रहे हैं.
आकाश आनंद की GenZ पॉलिटिक्स
बसपा सुप्रीमो मायावती के भतीजे आकाश आनंद ने विरोधियों की उम्र गिना-गिनाकर विरोधियों पर हमले किए. उनका राहुल-अखिलेश को 'अंकल' कहना GenZ राजनीति को आगे बढ़ाने के तौर पर देखा जा रहा है. जिसमें वो उम्र का अंतर बताकर ये दिखाना चाहते हैं कि एक युवा ही यूपी के GenZ का दर्द समझ सकता है.
दिल्ली के जंतर-मंतर पर जिस तरह से GenZ ने प्रदर्शन किया उसके बाद संसद से लेकर सड़क तक GenZ और उनसे जुड़े मुद्दों का असर देखने को मिल रहा है. कांग्रेस, समाजवादी पार्टी ही नहीं भारतीय जनता पार्टी भी अब उन्हें अपने पाले में लाने की कोशिशों में जुट गई हैं. बसपा में दलित राजनीति के साथ युवाओं को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है.
GenZ अपने पाले में लाने की कोशिश
आकाश आनंद की GenZ पॉलिटिक्स को मायावती ने भी आगे बढ़ाया उन्होंने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा कि देश का GenZ अब जाग गया है. इसके साथ ही उन्होंने युवाओं को अपनी समस्याओं को दूर करने के लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष की साज़िश से दूर रहने की अपील की.
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कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी GenZ को लुभाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं. नीट पेपर लीक मामले को लेकर उन्होंने न केवल छात्रों के आंदोलन का समर्थन किया बल्कि प्रयागराज में 'छात्रों की गूँज' कार्यक्रम किया और छात्रों की परीक्षा, रोज़गार और तमाम मुद्दों को उठाया. तो वहीं सीएम योगी की नज़र भी अब GenZ राजनीति पर हैं. उन्होंने भी ऐलान किया कि राज्य सरकार नई युवा नीति ला रही है.
GenZ का यूपी की सियासत पर असर
उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं. ऐसे में GenZ वोटरों की बड़ी भूमिका होने जा रही है. आंकड़ों के मुताबिक यूपी में करीब 3.23 करोड़ युवा आबादी हैं. इनमें 21.19 फीसदी युवाओं की उम्र 18-29 साल के बीच है. वहीं एसआईआर के बाद 18-19 साल के वोटरों की संख्या 18 लाख हैं. इस लिहाज़ से हर पांचवां वोटर GenZ है. सौ सीटों पर उनका असर देखने को मिल सकता है.
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