UP News: संभल CO के बयान पर बोले पूर्व DGP बृजलाल, 'शब्द गलत थे, लेकिन आशय ठीक'
UP News In Hindi: संभल सीओ के विवादित बयान पर पूर्व डीजीपी और बीजेपी सांसद बृजलाल ने कहा कि उनके शब्द गलत थे, लेकिन आशय कानून-व्यवस्था बनाए रखने का था. उन्होंने माना कि भाषा में सावधानी बरतनी चाहिए.

उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक और बीजेपी सांसद बृजलाल ने संभल के सीओ के बयान को लेकर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि सीओ के बयान में इस्तेमाल किए गए शब्द सही नहीं थे, लेकिन उनके कहने का आशय कानून-व्यवस्था बनाए रखने का ही था.
बृजलाल ने कहा कि त्योहारों और धार्मिक कार्यक्रमों के दौरान शांति बनाए रखना बेहद जरूरी है. पुलिस का काम ही यही होता है कि किसी भी तरह की अव्यवस्था या टकराव की स्थिति न बनने पाए. उनके मुताबिक पुलिस प्रशासन इसलिए तैनात रहता है ताकि हर कार्यक्रम शांति और सम्मान के साथ संपन्न हो सके.
बृजलाल ने कहा, "जहां तक उनकी बात है कि अलविदा की नमाज और इसके अलावा अभी ईद भी आएगी और उसमें शाम को तरावीह होती है. उन्होंने कहा कि तमाम चीजें शांति और सम्मान के साथ पढ़नी चाहिए, जो बिल्कुल सही बात है. पुलिस का बंदोबस्त इसलिए रहता है कि कोई समस्या न हो."
शब्दों के इस्तेमाल पर जताई आपत्ति
हालांकि बृजलाल ने यह भी कहा कि बयान में कुछ शब्दों के इस्तेमाल में सावधानी बरतनी चाहिए थी. उनके मुताबिक ऐसी बातों को अधिक संयमित भाषा में कहा जाना चाहिए.
उन्होंने कहा, "यह कहना कि अगर लड़ना हो तो ईरान चला जाए, मुझे लगता है कि ऐसा कहना जरूरी नहीं था. जहां तक उन्होंने यह सही कहा कि अगर कोई व्यक्ति समस्या पैदा करने की कोशिश करेगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, तो उस पर कार्रवाई की जानी चाहिए."
उन्होंने कहा, "हालांकि इस संबंध में जो शब्द उन्होंने इस्तेमाल किए, उनमें थोड़ा सावधानी बरतनी चाहिए थी. ऐसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. आशय यही है कि कानून-व्यवस्था की कोई समस्या नहीं होनी चाहिए.
ईरान का मामला अलग, भारत से सीधा संबंध नहीं
बृजलाल ने आगे कहा कि ईरान की स्थिति अलग है और वहां जो कुछ हो रहा है, वह उनका आंतरिक मामला है. उन्होंने कहा कि भारत में किसी बाहरी मुद्दे को लेकर लगातार धरना-प्रदर्शन करना उचित नहीं माना जा सकता.
जहां तक ईरान का सवाल है, वह वहां की समस्या है. ईरान में लोग जो कर रहे हैं, वह उनका मामला है. यहां रोज आकर किसी एक मुद्दे को लेकर धरना-प्रदर्शन करना उचित नहीं है, क्योंकि उसका कोई सीधा संबंध भारत से नहीं है."
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