बस्ती में स्वास्थ्य विभाग का गाड़ी घोटाला, बोलेरो की जगह ऑटो-बाइक, बिना परमिट वाहनों का खेल!
Basti News: गुलाब चंद्र सोनकर ने स्वास्थ्य विभाग से प्राइवेट वाहनों की सूची मांगी और इसे क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) से सत्यापित कराया. सत्यापन में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए.

उत्तर प्रदेश के बस्ती जनपद के स्वास्थ्य विभाग में प्राइवेट वाहनों की हायरिंग में बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है. पूर्व ब्लॉक प्रमुख और कप्तानगंज विधायक के प्रतिनिधि गुलाब चंद्र सोनकर ने डीएम को शिकायती पत्र सौंपकर स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने दावा किया कि विभाग द्वारा हायर की गई गाड़ियों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई है, जिससे सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ है.
शिकायत के बाद डीएम ने CDO की अध्यक्षता में त्रिस्तरीय जांच कमेटी गठित कर मामले की जांच के आदेश दिए हैं.
सीएमओ और आरटीओ की सूची में गड़बड़ी
गुलाब चंद्र सोनकर ने स्वास्थ्य विभाग से प्राइवेट वाहनों की सूची मांगी और इसे क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) से सत्यापित कराया. सत्यापन में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए:
- UP 45 AT 6155: सीएमओ कार्यालय की सूची में इसे बोलेरो बताया गया, लेकिन आरटीओ रिकॉर्ड में यह ऑटो रिक्शा है.
- UP 51 AF 7804: सीएमओ ने इसे कार बताया, जबकि आरटीओ के अनुसार यह मोटरसाइकिल है.
- UP 51 AB 8313: सीएमओ की सूची में बोलेरो, लेकिन आरटीओ में यह मोटरसाइकिल दर्ज है.
- 7 वाहन बिना परमिट: सात वाहन बिना परमिट के ही विभाग में हायर किए गए, जो नियमों का उल्लंघन है.
एक ही व्यक्ति को ठेका देने का आरोप
सोनकर ने आरोप लगाया कि कई वर्षों से एक ही व्यक्ति को प्राइवेट वाहनों का ठेका दिया जा रहा है, जिसकी भी जांच की मांग की गई है. उन्होंने कहा कि वर्ष 2022, 2023 और 2024 में इस तरह की गड़बड़ियां सामने आई हैं. आरटीआई के तहत मांगे गए रिकॉर्ड भी स्वास्थ्य विभाग ने पूरी तरह उपलब्ध नहीं कराए, लेकिन उपलब्ध सूची में ही एक ऑटो, दो मोटरसाइकिल और सात बिना परमिट वाहनों की गड़बड़ी उजागर हुई है.
जांच की मांग
गुलाब चंद्र सोनकर ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग में कई सालों से गाड़ियों का खेल चल रहा है. आरटीओ सत्यापन में ऑटो और बाइक के नंबर सामने आए, साथ ही बिना परमिट गाड़ियां भी हायर की गईं. अगर पिछले कुछ सालों की जांच हो जाए, तो बड़ा घोटाला सामने आएगा. उन्होंने डीएम से इस मामले की गहन जांच की मांग की है.
डीएम और सीएमओ की प्रतिक्रिया
डीएम रवीश गुप्ता ने बताया कि शिकायत प्राप्त हुई है और सीएमओ से इसकी प्रारंभिक जांच कराई गई. सीएमओ ने दावा किया कि गाड़ियों के नंबर में एक-दो अक्षर का अंतर होने से यह भ्रम पैदा हुआ है. हालांकि मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएम ने सीडीओ के नेतृत्व में जांच कमेटी गठित की है, जो जल्द ही अपनी रिपोर्ट सौंपेगी. वहीं सीएमओ राजीव निगम ने कहा कि मामले की जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी.
Source: IOCL





















