बस्ती: बेटा अधिकारी बना तो पिता ने हाथी पर निकाला जुलूस
संसारीपुर चौराहे पर गाजे-बाजे के साथ एक भव्य स्वागत समारोह आयोजित किया गया. यहां पिता महेंद्र कुमार पाण्डेय ने नवचयनित अधिकारी बेटे अवनीश को बाकायदा हाथी पर बैठाकर विजय जुलूस निकाला.

उत्तर प्रदेश के बस्ती जनपद में हरैया थाना क्षेत्र के अंतर्गत केशवपुर गांव के रहने वाले अवनीश पाण्डेय ने ग्राम पंचायत अधिकारी के पद पर चयनित होकर पूरे जिले का नाम रोशन किया है. बेटे की इस शानदार सफलता पर पिता महेंद्र कुमार पाण्डेय की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. अपनी इस खुशी का इजहार करने के लिए पिता ने एक अनोखा और शाही तरीका अपनाया, जिसकी चर्चा अब पूरे इलाके में हो रही है.
संसारीपुर चौराहे पर गाजे-बाजे के साथ एक भव्य स्वागत समारोह आयोजित किया गया. यहां पिता महेंद्र कुमार पाण्डेय ने नवचयनित अधिकारी बेटे अवनीश को बाकायदा हाथी पर बैठाकर पूरे गाजे-बाजे के साथ विजय जुलूस निकाला. ढोल-नगाड़ों की थाप और ग्रामीणों के उल्लास के बीच निकला यह जुलूस हर किसी के लिए कौतूहल और आकर्षण का केंद्र बना रहा.
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स्थानीय लोगों ने फूल-मालाओं से किया स्वागत
स्थानीय लोगों ने इस खुशी के मौके पर बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जगह-जगह फूल-मालाओं से अवनीश का स्वागत किया और परिजनों को बधाइयाँ दीं. सोशल मीडिया पर भी पिता-पुत्र के इस खास पल का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे लोग एक पिता के गर्व और सफलता के जश्न का सबसे खूबसूरत दृश्य बता रहे हैं. अवनीश की यह उपलब्धि स्थानीय युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है.
पूरे गांव में जश्न सा माहौल
ग्राम पंचायत अधिकारी के पद पर चयनित हुए अवनीश पाण्डेय को जब उनके पिता महेंद्र कुमार पाण्डेय ने संसारीपुर चौराहे पर हाथी पर बैठाकर ढोल-नगाड़ों के साथ गाँव में प्रवेश कराया, तो यह केवल एक पारिवारिक जश्न भर नहीं रहा. यह ग्रामीण समाज में सफलता, संघर्ष और सम्मान के बदलते आयामों को बयां करती एक ऐतिहासिक घटना बन गई. भारतीय समाज में, विशेषकर ग्रामीण अंचलों में, एक पिता अपनी पूरी ज़िंदगी बच्चों की पढ़ाई और उनके भविष्य को संवारने में खपा देता है. जब वर्षों की वह तपस्या रंग लाती है, तो खुशी का बाँध टूटना स्वाभाविक है.
पिता का यह बादशाही अंदाज दिखावा नहीं, बल्कि उस अथक परिश्रम और उम्मीदों की जीत का उत्सव है, जो एक साधारण परिवार ने वर्षों तक संजोया था. हाथी की सवारी कोई धन-दौलत का प्रदर्शन नहीं, बल्कि उस असीम गर्व की अभिव्यक्ति है जो एक पिता को उसके बेटे की योग्यता ने दी है.
औरों के लिए बने प्रेरणा
यह वायरल होता वीडियो उन सभी युवाओं की आँखों में एक नया सपना बोता है कि अगर मेहनत ईमानदारी से की जाए, तो एक दिन उनके माता-पिता का मस्तक भी इसी तरह गर्व से ऊँचा होगा. ग्राम पंचायत अधिकारी के रूप में अवनीश अब व्यवस्था का एक हिस्सा बनने जा रहे हैं. मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि उनकी इस सफलता का सच्चा उत्सव तब और सार्थक होगा जब वह अपने इस पद का उपयोग अपने गाँव और क्षेत्र के विकास के लिए पूरी निष्ठा से करेंगे. फिलहाल, यह पल एक पिता के त्याग और बेटे के समर्पण की उस जीत का है, जिसने बस्ती ही नहीं, पूरे प्रदेश के युवाओं को प्रेरित किया है.
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