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जंतर-मंतर पर जुटे प्रदर्शनकारी, पुलिस ने हिरासत में लिया, जानें क्या है इनकी मांग?

दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने जंतर मंतर पर प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई करते हुए उन्हें हिरासत में ले लिया है. 

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  • जंतर मंतर पर जाति-आधारित आरक्षण के खिलाफ प्रदर्शन हुआ।
  • दिल्ली पुलिस ने जंतर मंतर पर प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया।
  • प्रदर्शनकारियों ने शांतिपूर्ण विरोध किया, पुलिस ने हटाया।
  • कुछ प्रदर्शनकारी पुलिस बस पर चढ़े, तिरंगा लहराया।

दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने जाति-आधारित आरक्षण के विरोध में जंतर मंतर पर प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई करते हुए उन्हें हिरासत में ले लिया है. हिरासत में लिए गए लोगों ने कहा कि हमारा प्रदर्शनकारी पूरी तरह से शांतिपूर्ण था. हम यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (UGC) और एसी-एटी को लेकर शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे थे. 

न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली के जंतर मंतर पर शुक्रवार (21 अगस्त, 2026) को भारी संख्या में लोग जाति आधारित आरक्षण का विरोध करने के लिए इकट्ठा हुए थे. छात्र जाति-आधारित आरक्षण के विरोध में नारेबाजी कर रहे थे. इस बीच दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्सन फोर्स (आरएएफ) के जवानों पर प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेना शुरू कर दिया. 

घटनास्थल से सामने आए कई वीडियोज में नजर आ रहा है जिस बस के जरिए पुलिस प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर जा रही है, कई प्रदर्शनकारी उसी बस के ऊपर चढ़ गए हैं और तिरंगा लहरा रहे हैं. दूसरी तरफ से भारी संख्या में मौजूद प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की गाड़ी को घेर रखा है.

महिला प्रदर्शनकारियों को भी पुलिस ने हिरासत में लिया

जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने वालों में कई महिलाएं भी शामिल हैं, जिन्हें दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया है. छात्रों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे और पुलिस लोगों को जंतर मंतर से हटाने के लिए ताकत का इस्तेमाल करने लगी. जंतर मंतर को खाली करवाने और इलाके में सुरक्षा बढ़ाने के लिए प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई करना शुरू कर दिया.

देश के अलग-अलग हिस्सों पर जंतर मंतर पर इकट्ठा हुए प्रदर्शनकारी

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में स्थित जंतर मंतर पर जाति-आधारित आरक्षण के विरोध देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग अपनी बात रखने के लिए पहुंचे. इस दौरान उनके हाथों में काफी तरह के पोस्टर और बैनर भी थे. वहीं, प्रदर्शनकारी आरक्षण के विरोध में नारेबाजी कर रहे थे. 

प्रदर्शनकारियों की सरकार से क्या है चार प्रमुख डिमांड?

वहीं, जाति आधारित आरक्षण के खिलाफ जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान यूट्यूबर अजीत भारती ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में सरकार से अपनी चार मांगों के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि हमारी सबसे बड़ी मांग ये है कि सरकार एक व्हाइट पेपर (श्वेत पत्र) जारी करे, जिसमें इस बात की जानकारी दी जाए कि पिछले 80 सालों से देश में जो आरक्षण दिया गया है, उसका नतीजा क्या निकला है.

उन्होंने कहा, ‘हमारी दूसरी मांग ये है कि कोटा के अंदर कोटा की व्यवस्था लागू की जाए, जिस पर सरकार ने कहा है कि इसमें क्रीमी लेयर लागू नहीं की जाएगी, तो आप इसे क्यों लागू नहीं करेंगे? ये इतनी बेतुकी बात है कि सरकार सिर्फ उन कुछ दलित नेताओं के सामने झुक रही है, जो सिर्फ और सिर्फ अपने जाति समूह की बात करते हैं.’ 

मेरिट को लेकर रखी तीसरी डिमांड

यूट्यूबर भारती ने कहा, ‘तीसरी डिमांड मिनिमम मार्क्स का है. आप मेरिट से समझौता करके विकसित भारत का सपना नहीं बेच सकते हैं. अगर योग्य युवा और पढ़ने वाले लड़के-लड़कियों को IIT, IIM या उच्च शिक्षा संस्थानों में एडमिशन ही नहीं मिलेगा, तो आपकी इफिशिएंसी उसी जगह 50 प्रतिशत कम हो जाएगी. उसके बाद आपने टीचिंग में भी आरक्षण दिया हुआ है, तो वो पढ़ाएंगे क्या? इसलिए मेरिट से समझौता नहीं होने देना चाहिए.’ 

EWS वर्ग के लोगों को नहीं मिल रहा कोई भी फायदा- भारती

अजीत भारती ने कहा, ‘इसके बाद चौथी डिमांड है कि ईडब्ल्यूएस (EWS) को अनुसूचित जाति (एससी) के दायरे का हिस्सा बनाया जाए. जिस वर्ग की परिभाषा में हीं आर्थिक रूप से कमजोर होने की बात लिखी हुई है, उसे न तो फॉर्म खरीदने में कोई सहूलियत दी जा रही है, न हॉस्टल फीस माफ किया जा रहा है और न हीं कोर्स की फीस में कोई माफी दी जा रही है, तो उसे सिर्फ मान्यता देने से क्या हासिल होगा? इसके अलावा, परीक्षाओं के रिजल्ट में भी उसका कट-ऑफ जनरल कैटेगरी से बहुत ज्यादा अंतर का नहीं होता है, लगभग बराबर ही रहता है. तो इससे कोई फायदा तो नहीं हुआ, सिर्फ उन्हें एक झुनझुना पकड़ा दिया गया है.’

उन्होंने कहा, ‘सरकार ने ये मान लिया है कि दलित, पीड़ित-शोसित और वंचित है, तो वो तो इनकम टैक्स भी नहीं दे रहे और जो लोग कमाकर टैक्स दे रहे हैं ताकि एजुकेशन सब्सिडाइज हो जाए, तो किसकी सब्सिडाइज हो रही है, EWS की नहीं हो रही, बल्कि उन 50 प्रतिशत लोगों की हो रही है, जो हमारी जान के पीछे पड़े हुए हैं, तो आप पहले ये बताओ कि इन माइनस 40 या मानइस 60 वाले से कैसे विकसित भारत बना लोगे.’ 

उन्होंने आगे कहा, ‘ये तीन-चार बातें हैं, जिससे एससी-एसटी, ओबीसी को कोई नुकसान नहीं होने वाला है. आगे चलकर ये जंतर मंतर कितने जगहों पर जाने वाला है, ये सरकार को समझ नहीं आ रहा है. इसलिए कम से कम इतना तो संकेत दें कि हम इस मुद्दे पर बैठकर बातचीत करने जा रहे हैं.’

यह भी पढ़ेंः दिल्ली में H1N1 और फ्लू को लेकर बढ़ी सतर्कता, जेपी नड्डा ने की समीक्षा बैठक

पिछले करीब पांच सालों से भारतीय मीडिया का हिस्सा हैं. अक्टूबर, 2024 से एबीपी न्यूज नेटवर्क में बतौर हिंदी कंसल्टेंट राइटर के तौर पर भूमिका निभा रहे हैं. प्रिंट मीडिया के साथ अपने पत्रकारिता सफर की शुरुआत की है और आज डिजिटल मीडिया में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय डेस्क पर लेखन कार्य कर रहे हैं. साल 2020 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के नोएडा कैंपस से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री हासिल की. क्षेत्रीय से लेकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति, चुनाव और सामाजिक विषयों पर खबरें लिखते रहे हैं. तथ्यों की गहराई और भाषा की संवेदनशीलता पर हमेशा बेहतर करने की कोशिश है. स्केचिंग, पेटिंग, फिल्में देखना, शायरी-कविताएं लिखना और घूमना बहुत ज्यादा पसंद है. 

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