Basti: बस्ती में फर्जी डिग्री के सहारे डॉक्टर चला रहे थे अल्ट्रासाउंड मशीन, अधिकारी बोलें- 'करेंगे कार्रवाई'
UP News: बस्ती जनपद के महिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट के पोस्ट पर तैनात डॉक्टर आशुतोष वर्मा की डिग्री फर्जी निकली है. मामल सामने आने के बाद कार्रवाई की बात कही गई है.

Basti News: अस्पताल असली है और डॉक्टर साहब नकली है, रोजाना गर्भवती महिलाओं का इलाज करते है, मगर किसी को यह जानकारी नहीं है कि डॉक्टर साहब ने फर्जी डिग्री हासिल कर रखी है. हमारी रिसर्च टीम ने पड़ताल शुरू किया तो पता चला डॉक्टर ने जिस यूनिवर्सिटी की डिग्री लगाकर नौकरी हासिल की है वह फर्जी है, यानि कि संबंधित कॉलेज के पास उपरोक्त कोर्स को कराने का अधिकार ही नहीं है. इतना सबकुछ सामने आने के बाद भी जिम्मेदार आंख बंद कर कुंभकर्णी नींद सो रहे है. मामला उत्तर प्रदेश के बस्ती से सामने आया है. अब इस मामले में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी कार्रवाई की बात कह रहे हैं.
चलिए अब आपको पूरा मामला बताते है, इनका नाम है डॉक्टर आशुतोष शर्मा, ये बस्ती जनपद के महिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट के पोस्ट पर तैनात है, डॉक्टर साहब के नाम से पीसीपीएनडीटी का रजिस्ट्रेशन है ताकि अल्ट्रासाउंड का चार्ज उनके पास ही रहे. मगर इस पोस्ट के योग्यता में फेल होने के बावजूद डॉक्टर आशुतोष शर्मा द्वारा फर्जी डिग्री के सहारे नौकरी करने का दावा किया जा रहा है. इस बात का खुलासा बीजेपी के नेता रिंकू दुबे ने करते हुए प्रशासन से शिकायत किया है. बीजेपी नेता का आरोप है कि जिला महिला अस्पताल के रेडियोलॉजिस्ट विभाग के हेड डॉक्टर आशुतोष शर्मा की सोनोग्राफी की डिग्री फर्जी है.
जांच में फर्जी साबित हुआ डॉक्टर का दावा
डॉक्टर ने दावा किया है कि उन्होंने नागालैंड राज्य के ग्लोबल ओपन यूनिवर्सिटी से सोनोग्राफी का डिप्लोमा कोर्स किया है मगर जब हमने यूनिवर्सिटी से संपर्क साधा तो उनके मैनेजमेंट द्वारा बताया गया कि ग्लोबल यूनिवर्सिटी के द्वारा ऐसा कोई कोर्स नहीं करवाया जाता है. ऐसे में डॉक्टर का यह दावा पूरी तरह से गलत साबित हो गया. इसके अलावा अमृता विद्या पीठ वेल्लोर से MBBS का सर्टिफिकेट लेने का दावा किया गया है, और एमडी का कोर्स हॉस्पिटल मैनेजमेंट में किया है जिसका कार्य अस्पताल के प्रशासनिक व्यवस्था को देखना है.
इतना ही नहीं डॉक्टर आशुतोष शर्मा का कारनामा इसी से साबित होता है कि उनके द्वारा मानव संपदा की साइट पर शिकायत से पहले MBBS से लेकर सोनोग्राफी की डिग्री का संस्थान अलग बताया गया और जब डॉक्टर की पोल खुली तो उन्होंने आनन फानन में सारी डिग्री का संस्थान फिर से बदल दिया. मगर यहां भी वे गच्चा खा गए और सोनोग्राफी की डिग्री का संस्थान ऐसा लोड किया जिसके पास अधिकार ही नहीं है. डॉक्टर आशुतोष शर्मा का फ्रॉड खुलकर सामने आ चुका है.
क्या कहते हैं नियम
नियम के मुताबिक सोनोग्राफी का कोर्स कोई भी MBBS डॉक्टर उसी संस्थान से कर सकता है जिसे सरकार ने अधिकृत किया है व कालेज एम सी आई से मान्यता प्राप्त हो. बावजूद इसके डॉक्टर आशुतोष द्वारा नागालैंड की डिग्री फर्जी तरीके से अपलोड करना अपने आप में कई सवाल खड़ा करता है. किसी भी सरकारी अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट के नाम से ही पीसीपीएनडीटी पर रजिस्ट्रेशन होता है और अल्ट्रासाउंड की मशीन उसी डॉक्टर के अंडर में होती है. ऐसे में डॉक्टर ने फर्जी डिग्री लगाकर पोस्ट हासिल किया और फिर अल्ट्रासाउंड मशीन का रजिस्ट्रेशन करवा लिया और जब शिकायत हुई तो रातों रात डॉक्टर आशुतोष शर्मा ने अपनी डिग्री के संस्थान को बदलवा दिया. डॉक्टर ने अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक को पत्र लिखकर पहले ही अवगत करा दिया था कि उनकी डिग्री अल्ट्रासाउंड करने की योग्यता नहीं रखती है.
वही आरोपों के बारे में डॉक्टर आशुतोष शर्मा ने इस मसले पर कहा कि उनकी डिग्री बिल्कुल सही है, उन्होंने ग्लोबल यूनिवर्सिटी नागालैंड से सोनोग्राफी का कोर्स किया है, डिग्री का संस्थान बदलवाने के सवाल पर डॉक्टर आशुतोष ने कहा उनके द्वारा शासन को बता दिया गया है. खुद की सारी गलतियों को महिला अस्पताल के सीएमएस डॉक्टर ए .के वर्मा के ऊपर थोपते हुए कहा उन्हें सब पता है.
वही इसी अस्पताल में एक दूसरे रेडियोलॉजिस्ट डॉक्टर विमल द्विवेदी ने भी शासन को इस मामले में पत्र लिखा है, डॉक्टर का कहना है शासन ने उनसे ट्रेनिंग करा कर नियमानुसार केजीएमयू से सक्षमता परीक्षा पास कराया है, शासन से उनकी पोस्टिंग भी की गई है और उनके पास लोहिया संस्थान का सोनोग्राफी का कोर्स भी है बावजूद इसके उन्हें उनकी योग्यता के अनुसार पोस्टिंग नहीं दिया गया है और न ही उनका पीसीपीएनडीटी में रजिस्ट्रेशन करवाया जा रहा. वे मजबूरी में महिला अस्पताल में,बिना पहचान के कार्य कर रहे है और अधिकारी कोई सुनवाई नहीं कर रहे है.
जिम्मेदार बोलें- जांच के बाद करेंगे कार्रवाई
वही इस पूरे मामले को लेकर एडी हेल्थ से जब बात की गई तो उन्होंने बताया कि मामला संज्ञान में आया है, जांच करवाया जाएगा, फर्जी डिग्री के सवाल पर कहा कमेटी बनाकर जांच की जाएगी, फर्जी डिग्री पर नौकरी करते पाए गए तो तत्काल कार्यवाही की जाएगी. मगर अफसर मैडम के तेवर देखकर तो लगता है शायद कार्यवाही भी सरकारी बाबू की तरह लटकता और अटकता धीरे धीरे साल दर साल चलता रहे.
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Source: IOCL
























