बरेली में अनुज का हौसला बना मिसाल! एक हाथ खोने के बाद भी दुर्गम पहाड़ों पर पूरा किया 2200km का सफर
Bareilly News: ड्राइविंग और पर्यटन के शौकीन अनुज ने पत्नी और दो बच्चों के साथ करीब 2200 किलोमीटर लंबा सफर तय कर हिमाचल प्रदेश की दुर्गम स्पीति घाटी तक पहुंचने का सपना पूरा किया.

उत्तर प्रदेश के बरेली में रहने वाले अनुज सक्सेना की कहानी हर किसी के लिए एक प्रेरणा हैं. भीषण हादसे में अपना एक हाथ कट गया दोनों पैरों में रॉड डली है. जिसने महीनों अस्पताल में जिंदगी से संघर्ष किया हो, उस अनुज सक्सेना ने आज हिमालय की दुर्गम वादियों में अपनी कार दौड़ाकर हौसले की नई परिभाषा लिख दी है.
बरेली के व्यवसायी अजीत सक्सेना के बेटे अनुज सक्सेना पेशे से अधिवक्ता हैं. कुछ साल पहले वो एक सड़क हादसे का शिकार हो गए थे. ये हादसा इतना भयावह था कि उन्हें अपना एक हाथ गंवाना पड़ा. उनके दोनों पैरों की हड्डियां टूट गईं, जिसकी वजह से उनमें रॉड डालनी पड़ी. जान बचाने के लिए करीब 11 बड़े ऑपरेशन हुए और कई महीने उनका इलाज चलता रहा.
ड्राइविंग के शौक को बनाया अपनी ताकत
इतने बड़े हादसे के बाद किसी का भी हौसला टूट सकता है लेकिन, अनुज ने जिंदगी के सामने हार नहीं मानी. पिता के साहस और पत्नी श्वेता सक्सेना के अटूट साथ ने उन्हें फिर से खड़ा कर दिया. उन्होंने दर्द को कमजोरी नहीं बनने दिया और अपने पुराने शौक ड्राइविंग को ही अपनी ताकत बना लिया.
ड्राइविंग और पर्यटन के शौकीन अनुज ने फिर से स्टीयरिंग संभाली, जिसके बाद अब तक वो देश के कई ख़तरनाक पर्यटनों स्थलों पर यात्रा कर चुके हैं. ऐसा ही कुछ उन्होंने इस बार किया. अनुज ने अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ करीब 2200 किलोमीटर लंबा सफर तय कर हिमाचल प्रदेश की दुर्गम स्पीति घाटी तक पहुंचने का सपना पूरा किया.
सबसे दुर्गम पहाड़ियों पर दौड़ाई कार
इस यात्रा का सबसे खास पड़ाव रहा 12,861 फीट की ऊंचाई पर स्थित लेपचा ला, जहां तक पहुंचना सामान्य लोगों के लिए भी आसान नहीं माना जाता. ऊंचे पहाड़, लगातार घुमावदार सड़कें, गहरी खाइयां और बदलता मौसम हर पल चालक की परीक्षा लेता है. लेकिन, अनुज ने अपने मजबूत इरादों से हर मुश्किल को पीछे छोड़ दिया.
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स्पीति घाटी हिमाचल प्रदेश के उत्तर-पूर्वी हिस्से में समुद्र तल से 12 से 15 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है. इसे 'लिटिल तिब्बत' के नाम से जाना जाता है. यहां का मौसम बेहद ठंडा और शुष्क रहता है. सर्दियों में तापमान माइनस 20 डिग्री तक पहुंच जाता है, जबकि गर्मियों में भी यहां बर्फीली हवाएं चलती रहती हैं.
अनुज ने इस यात्रा के दौरान काजा, ताशीगंग, मांजा और ल्हासा जैसे खूबसूरत इलाकों का भ्रमण किया. स्पीति घाटी अपनी बौद्ध संस्कृति और प्राचीन मठों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है. यहां स्थित की मठ और ताबो मठ बौद्ध धर्म के प्रमुख केंद्र माने जाते हैं. ताबो मठ को हिमालय का अजंता भी कहा जाता है. अनुज सक्सेना की यह यात्रा सिर्फ पहाड़ों तक पहुंचने की कहानी नहीं, बल्कि यह संदेश भी है कि अगर हौसले बुलंद हों तो जिंदगी की कोई भी मुश्किल इंसान को रोक नहीं सकती.
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Source: IOCL

























