बारिश ने खोली विकास के दावों की पोल! बाराबंकी में सड़कें बनीं तालाब, घरों में घुसा गंदा पानी
Barabanki News In Hindi: बड़ेल कस्बे में बारिश ने जल निकासी व्यवस्था की पोल खोल दी. सड़कें जलमग्न हैं और घरों में गंदा पानी घुस गया है. लोग दस साल पुरानी समस्या के समाधान की मांग कर रहे हैं.

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में लगातार हो रही बारिश ने शहर और आसपास के इलाकों में जल निकासी व्यवस्था की हकीकत सामने ला दी है. प्रशासन की ओर से मानसून से पहले जलभराव की समस्या से निपटने के दावे किए गए थे, लेकिन बारिश के बाद कई इलाकों में हालात बद से बदतर नजर आ रहे हैं. शहर से सटे बड़ेल कस्बे में जल निकासी की व्यवस्था नहीं होने से सड़कें पानी में डूब गई हैं, जबकि कई घरों में बारिश का गंदा पानी घुस गया है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि बड़ेल कस्बा पिछले करीब एक दशक से जल निकासी की समस्या से जूझ रहा है. बारिश के दौरान हर साल यहां जलभराव की स्थिति बन जाती है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हो सका है.
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लोगों के मुताबिक कई बार संबंधित विभागों, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला. इस बार भी लगातार बारिश ने पुराने जख्म फिर से ताजा कर दिए हैं.
सड़कों पर भरा पानी, घरों में पहुंचा गंदा पानी
बारिश के बाद कस्बे की कई गलियां और मुख्य रास्ते पानी से भर गए हैं. लोगों को आने-जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. सबसे ज्यादा परेशानी उन परिवारों को उठानी पड़ रही है, जिनके घरों में नालियों और सड़कों का गंदा पानी पहुंच गया है. स्थानीय निवासियों का कहना है कि घरों में पानी भरने से घरेलू सामान खराब हो रहा है और रातभर जागकर पानी की निगरानी करनी पड़ रही है.
नालियों की सफाई और जल निकासी व्यवस्था पर उठे सवाल
कस्बे के लोगों का आरोप है कि नालियों की नियमित सफाई नहीं होती. कई जगह नालियां जाम हैं या जल निकासी की व्यवस्था अधूरी पड़ी हुई है. यही वजह है कि थोड़ी सी तेज बारिश के बाद भी पूरा इलाका जलमग्न हो जाता है. ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि तत्काल नालियों की सफाई कराई जाए और भविष्य के लिए स्थायी जल निकासी की व्यवस्था बनाई जाए.
जलभराव से बढ़ा बीमारी का खतरा
लंबे समय तक गंदा पानी जमा रहने से इलाके में मच्छरों का प्रकोप बढ़ने लगा है. स्थानीय लोगों को डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों का डर सता रहा है. लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने कदम नहीं उठाए तो आने वाले दिनों में स्वास्थ्य संकट भी पैदा हो सकता है.
कागजी योजनाओं और जमीन की हकीकत में अंतर
बड़ेल कस्बे की तस्वीर प्रशासनिक दावों पर सवाल खड़े कर रही है. जहां एक ओर विकास और बेहतर सुविधाओं के दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर बारिश के बाद जलभराव की समस्या लोगों की परेशानियां बढ़ा रही है. स्थानीय लोगों ने अब प्रशासन से जल्द राहत कार्य शुरू करने और स्थायी समाधान की मांग की है, ताकि हर साल बारिश के मौसम में उन्हें इसी समस्या से न जूझना पड़े.
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