बागपत में जमीयत उलेमा-ए-हिंद का बड़ा फैसला, अब निकाह से पहले देना होगा एफिडेविट
Baghpat News In Hindi: बागपत की जामा मस्जिद में जमीयत उलेमा-ए-हिंद और खिदमत सोसायटी ने फैसला लिया है कि अब इमाम से निकाह पढ़ाने से पहले अधिवक्ता का स्टाम्प पेपर देना अनिवार्य होगा.

बागपत के बड़ौत शहर की जामा मस्जिद में खिदमत सोसायटी और जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रतिनिधिमंडल की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई. बैठक में मस्जिदों के इमामों द्वारा निकाह पढ़ाने के दौरान सामने आने वाली कानूनी चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की गई. विभिन्न बिंदुओं पर विचार-विमर्श के बाद सर्वसम्मति से निकाह प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और कानूनी रूप से सुरक्षित बनाने के लिए अहम निर्णय लिया गया.
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि अब अगर कोई व्यक्ति मस्जिद के इमाम से निकाह पढ़वाना चाहता है, तो निकाह से पहले उसे अधिवक्ता द्वारा तैयार कराया गया एक स्टाम्प पेपर प्रस्तुत करना होगा.
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इस घोषणा-पत्र में संबंधित पक्षों द्वारा यह प्रमाणित किया जाएगा कि दी गई जानकारी सही है, विवाह से संबंधित कानूनी शर्तों का पालन किया गया है और अगर कोई तथ्य छिपाया जाता है तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित पक्षों की होगी. इस व्यवस्था का उद्देश्य भविष्य में उत्पन्न होने वाले विवादों से बचाव करना और निकाह प्रक्रिया को अधिक जिम्मेदार बनाना है.
इमामों को कानूनी परेशानियों से बचाने की पहल
खिदमत सोसायटी के अध्यक्ष डॉ. इरफान मलिक ने कहा कि कई बार लोग मस्जिद में आकर जल्दबाजी में निकाह पढ़वा लेते हैं, लेकिन बाद में पता चलता है कि किसी पक्ष का पहले से विवाह हो चुका है. मामला न्यायालय में विचाराधीन है या अन्य कानूनी विवाद मौजूद हैं.
ऐसी परिस्थितियों में बिना जानकारी के निकाह पढ़ाने वाले इमामों को भी अनावश्यक कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. इसलिए यह व्यवस्था इमामों की सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बनाई गई है.
दीनी तालीमी बोर्ड जमीअत उलेमा हिंद के जिलाध्यक्ष मौलाना आरिफ़-उल-हक़ ने कहा कि इमाम केवल धार्मिक दायित्व निभाते हैं. उनके पास किसी व्यक्ति के वैवाहिक, कानूनी या अन्य व्यक्तिगत रिकॉर्ड की जांच करने का अधिकार या संसाधन नहीं होता.
बाद में कोई विवाद सामने आता है तो इमाम भी कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ जाते हैं. ऐसे में आवश्यक दस्तावेज और लिखित घोषणा-पत्र की व्यवस्था समय की जरूरत है.
जमीअत उलेमा हिंद के नायब सदर बागपत मुफ्ती शाह आलम ने कहा कि सरकार द्वारा समय-समय पर बनाए गए कानूनों और कोर्ट के निर्देशों का सम्मान करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है.
उन्होंने कहा कि निकाह एक पवित्र सामाजिक और धार्मिक अनुबंध है, इसलिए इसे पूरी पारदर्शिता, सत्यता और कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप संपन्न किया जाना चाहिए. अगर सभी आवश्यक दस्तावेज पहले से उपलब्ध हों, तो भविष्य में विवादों और कानूनी समस्याओं से काफी हद तक बचा जा सकता है.
सभी दस्तावेज पूरे करने की अपील
जामा मस्जिद के इमाम मुफ्ती फुरकान ने लोगों से अपील की कि निकाह से पहले सभी आवश्यक दस्तावेज, सही जानकारी और वैधानिक औपचारिकताएं पूरी करें, ताकि न केवल दोनों परिवार सुरक्षित रहें बल्कि धार्मिक संस्थानों और इमामों को भी अनावश्यक कानूनी परेशानियों का सामना न करना पड़े.
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वहीं कारी साबिर ने कहा कि यह पहल किसी अतिरिक्त बाधा के लिए नहीं, बल्कि पारदर्शी, जिम्मेदार और कानून के अनुरूप निकाह प्रक्रिया सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की जा रही है. उन्होंने कहा कि इस नई व्यवस्था से निकाह से जुड़े विवादों में कमी आएगी और सभी पक्षों के हित सुरक्षित रहेंगे.















