'केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग' Azam Khan की रिहाई और फिर गिरफ्तारी पर भड़की सपा
Azam Khan Arrest: रामपुर जेल से रिहा होते ही ED ने सपा नेता आजम खान को गिरफ्तार कर लिया गया. पैन कार्ड धोखाधड़ी और जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूछताछ होगी.

समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता और पूर्व मंत्री आजम खान के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शनिवार को बड़ी कार्रवाई की है. ईडी ने उत्तर प्रदेश के रामपुर में जिला जेल से बाहर आते ही आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को हिरासत में ले लिया.
ईडी की तरफ से जारी बयान में बताया गया, हमने आजम खान को गिरफ्तार कर लिया है और गाजियाबाद पीएमएलए कोर्ट में पेश करेंगे.
प्रवर्तन निदेशालय के इस एक्शन पर सपा भड़क गई. अखिलेश यादव की अध्यक्षता वाली सपा के विधायर रविदास मेहरोत्रा ने एक बयान में कहा कि 11 महीने और 14 दिन बाद, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मोहम्मद आजम खान को जमानत दी थी. लेकिन जैसे ही वे जेल से बाहर आए, ED ने उन्हें फिर से गिरफ्तार कर लिया. इससे साफ है कि BJP सरकार विपक्षी नेताओं के खिलाफ ED का इस्तेमाल कर रही है और केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है. BJP पर लंबे समय से यह आरोप लगते रहे हैं कि वह ED, CBI और आयकर विभाग के डर का इस्तेमाल करके विपक्षी नेताओं के खिलाफ मामले दर्ज करवाती है.
क्या है आजम खान का पूरा मामला?
बता दें कि आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम पैन कार्ड वाले मामले में रिहा हुए थे, तभी ईडी ने उन पर यह कार्रवाई की.इससे पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 29 अक्टूबर को दो पैन कार्ड रखने के मामले में आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को बड़ी राहत दी थी. अदालत ने दोनों की जमानत अर्जी मंजूर करते हुए उनकी सजा निलंबित कर दी. हालांकि, दोषसिद्धि पर रोक लगाने की मांग खारिज कर दी गई.न्यायमूर्ति समित गोपाल की एकलपीठ ने दोनों की पुनरीक्षण याचिकाओं पर सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया. याचिकाओं में अधीनस्थ अदालतों द्वारा दो पैन कार्ड रखने के मामले में सुनाई गई सजा और दोषसिद्धि को चुनौती दी गई थी.अभियोजन के अनुसार, यह मामला कथित तौर पर अलग-अलग जन्मतिथियों का उल्लेख करने वाले दूसरे पैन कार्ड को बनवाने और उसके इस्तेमाल से जुड़ा है. आरोपों में चुनावी नामांकन पत्रों में दूसरे पैन कार्ड के कथित इस्तेमाल का पहलू भी शामिल है. आजम खान और अब्दुल्ला आजम ने निचली अदालत के दोषसिद्धि और सजा के फैसले को आपराधिक पुनरीक्षण याचिकाओं के जरिए हाई कोर्ट में चुनौती दी थी. इसी क्रम में दोनों ने सजा निलंबित करने और जमानत देने की मांग की थी.दोषसिद्धि पर रोक और सजा निलंबन में हाई कोर्ट ने दोनों की सजा निलंबित करते हुए जमानत मंजूर की, लेकिन दोषसिद्धि पर रोक लगाने की मांग खारिज कर दी. ऐसे में दोषसिद्धि का आदेश बरकरार रहेगा. पुनरीक्षण याचिकाओं पर अंतिम फैसला अलग से होना है.






















