अयोध्या: राम की पैड़ी पर मछली पकाकर खा रहे थे मजदूर, संत समाज ने रंगे हाथ पकड़ा, जमकर हुआ बवाल
Ayodhya News In Hindi: अयोध्या में राम की पैड़ी पर मछली पकाने और खाने का मामला सामने आया है, जिसके बाद विवाद हो गया है, संत समाज में इसे लेकर नाराजगी देखने को मिल रही है.

रामनगरी अयोध्या में राम की पैड़ी के घाटों पर धार्मिक मर्यादाओं के उल्लंघन का मामला सामने आया है, जहां विकास कार्य में लगे मजदूरों के कुछ परिवारों पर कथित तौर पर मछली पकाने और सेवन करने का दावा किया गया है. संत समाज रंगे हाथ ऐसे लोगों को पकड़ा है. जिसके बाद इस घटना ने तूल पकड़ लिया है. संत समाज में इसे लेकर खासी नाराजगी देखने को मिल रही है.
अयोध्या में राम की पैड़ी को आस्था और धार्मिक मर्यादाओं का प्रतीक माना जाता है. स्थानीय संतों का आरोप है कि यहां निर्माण कार्य चल रहा है, जिसमें कई मज़दूर काम पर लगे हैं. संत समाज का आरोप है कि इन्हीं मजदूरों के परिवारों द्वारा पवित्र स्थल पर मछली पकाई गई और उसका सेवन किया गया. आस्था की जगह पर ऐसी अनैतिक गतिविधियां की गई.
राम की पैड़ी पर मछली पकाने व खाने का मामला
ये घटना रविवार रात की है. बीती रात संत समाज के कुछ लोगों ने कथित तौर पर राम की पैड़ी पर छापेमारी की, जहां मजदूरों के परिवारों को सरयू घाट के किनारे बने अस्थायी मकानों में मछली पकाते और उसका सेवन करते हुए पकड़ा गया. संतों का दावा है कि मौके का वीडियो भी बनाया गया है, जिसमें मांस छिपाने और हड्डियां मिलने जैसी बातें सामने आई हैं.
संत समाज का कहना है कि अयोध्या में मांस, मछली और मदिरा का सेवन पूरी तरह वर्जित है. इसके बावजूद इस तरह की गतिविधियां लगातार हो रही हैं, जो धार्मिक मर्यादाओं के खिलाफ है. जिसके बाद अब उनके इसे लेकर कड़ी नाराजगी देखने को मिल रही हैं. संत समाज की ओर से ऐसे लोगों पर सख्त कार्रवाई की मांग की गई है.
पुलिस पर भी लापरवाही बरतने का आरोप
इस पूरे मामले में लक्ष्मण घाट चौकी इंचार्ज रोहित पांडेय पर भी लापरवाही के आरोप लगाए जा रहे हैं. संतों का कहना है कि कई बार शिकायत के बावजूद पुलिस प्रशासन उदासीन बना रहा. गौरतलब है कि इससे पहले भी अयोध्या की व्यवस्थाओं और राम की पैड़ी में कथित भ्रष्टाचार को लेकर संत समाज दिल्ली में आयोजित कार्यक्रमों में आवाज उठा चुका है.
जगतगुरु परमहंस आचार्य ने जताई कड़ी नाराजगी
इस मामले पर तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगतगुरु परमहंस आचार्य ने कहा कि ये राम की नगरी है, यहां इस प्रकार के कृत्य बिल्कुल अस्वीकार्य हैं. हमने प्रशासन को कई बार शिकायत दी लेकिन, कोई कार्रवाई नहीं हुई. यहां नागेश्वर नाथ जैसे प्राचीन मंदिर हैं. सरयू का पवित्र किनारा है, जहां रोज़ आरती होती है.दूर-दराज से श्रद्धालु आते हैं, ऐसे कृत्य हमारी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाते हैं.
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